अस्पताल परिसर में अंधविश्वास का परीक्षण, करंट से युवक की मौत, शव को रेत से दबाया
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हद है! सिविल अस्पताल परिसर में अंधविश्वास के कर्मकांड शुरू हो गए। हैरानी की बात है कि एसएमओ और पुलिस भी मूकदर्शक बनी रही। दरअसल मंगलवार की दोपहर को करंट लगने के बाद एक युवक को सिविल अस्पताल लाया गया।
जहां डॉक्टर ने चेकअप के बाद उसे मृतक घोषित कर दिया। इसी बीच किसी ने करंट लगने वाले को मिट्टी या रेत में दबाने से जिंदा होने की बात कही तो उसी समय परिजन शव को इमरजेंसी और डीएमसी कार्यालय के सामने वाले पार्क में रेत से दबाकर जिंदा करने की कोशिश में जुट गए।
हुआ यूं कि करतारपुर के समीपवर्ती गांव पत्तड़ कलां निवासी रूप सिंह बजरी के टिप्पर के साथ जाता है। मंगलवार को भी वह टिप्पर के ऊपर बैठकर जा रहा था। अचानक वह बजरी को नीचे गिरने से बचाने के लिए समेटने के लिए उठा तो ऊपर बिजली की तार से जा लगा।
इससे उसे करंट का झटका लगा। उसे सिविल अस्पताल कपूरथला लाया गया। वहां ड्यूटी डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस पर परिजन विलाप करने लगे तो किसी ने करंट लगने वाले को रेत में दबाकर जिंदा करने की बात कही।
इस पर भीड़ शव को इमरजेंसी के बाहर पार्क में रेत में दबाकर जिंदा करने की कोशिश करने में जुट गई। फिर भी कुछ नहीं हुआ तो डेड बॉडी लेकर चले गए। हैरानी की बात है कि यह सब एसएमओ डॉ. तारा सिंह और थाना सिटी के एसएचओ एसआई हरजिंदर सिंह के साथ आई पुलिस के सामने होता रहा लेकिन किसी ने उनको रोकने की कोशिश नहीं की।
इससे अस्पताल परिसर में इस अंधविश्वासी कार्रवाई की चर्चा होती रही कि जो काम इलाज से संभव है, उसे टोटके कैसे कर सकते हैं। एसएमओ डॉ. तारा सिंह का कहना मृतक के परिजनों के साथ 150 से ज्यादा लोग थे जोकि उनसे लड़ने को आ रहे थे। इसलिए वह किसी को रोक नहीं सके। मृतक के परिजनों के उग्र होने पर उन्होंने पुलिस को भी बुलाया था।