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सांस नली में बादाम फंसने से हुई बच्चे की मौत पर लोग आक्रोशित, लगाई न्याय की गुहार

Sun, 07 Apr 2019 08:26 PM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: संदीप भट्ट Updated Sun, 07 Apr 2019 08:26 PM IST
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Peoples react on 11-Month Old Baby's death in PGI chandigarh
रिवांश का फाइल फोटो

11 माह के बच्चे की सांस की नली में बादाम फंसने से मौत हो गई है। इसमें पीजीआई के डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई है। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। सोशल मीडिया ने भी इस खबर को हाथों हाथ लिया। जिसने भी यह खबर पढ़ी, उसका दिल दहल उठा।

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बच्चा समय पर पीजीआई पहुंच गया था लेकिन डॉक्टरों ने उसके इलाज में आनाकानी की जिस वजह से बच्चे को समय पर इलाज नहीं मिल पाया जबकि डॉक्टरों के पास बच्चे को बचाने के लिए पूरा समय था। 
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पीजीआई के डॉक्टरों के इस रवैया से लोग निराश और मायूस हैं। अब लोग इस खबर पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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ऐसे ही एक पाठक चंडीगढ़ के रहने वाले अदित कपूर हैं। उन्होंने लिखा कि यह भयानक और दिल दहला देने वाली घटना है। हमें उम्मीद है कि दोषियों को बहुत जल्द सजा दी जाएगी। पीड़ित परिवार के साथ हमारी प्रार्थनाएं हैं।

अर्शदीप नाम के पाठक ने भी अपना रोष व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि आज 11 माह के बच्चे के संबंध में पीजीआई की लापरवाही की खबर देखी। रिवांश तायल एक प्रिय मित्र का भतीजा था। उन्हें भी इस मामले में इंसाफ की उम्मीद है। वहीं रमनदीप सरपाल भी लिखते हैं कि 11 माह के बच्चे की मौत के बारे में चौंकाने वाली खबर पढ़ी।

विश्वास नहीं हो रहा है कि पीजीआई के डॉक्टर वास्तव में किसी के जीवन के साथ ऐसे खेल सकते हैं। मुझे लगता है कि बच्चे के माता-पिता ने अपनी सहमति नहीं दी होगी, यह असंभव है। इस तरह के व्यवहार के लिए डॉक्टरों पर शर्म आनी चाहिए और उन्हें इसके लिए दंडित किया जाना चाहिए। इतना ही नहीं रमनदीप ने न्याय की उम्मीद भी जताई।

बता दें कि चंडीगढ़ पीजीआई में सांस की नली में बादाम फंसने से 11 महीने के रिवांश की मौत हो गई थी। मौत की वजह समय पर इलाज न मिलना बताया जा रहा है। इस मामले में पीजीआई चंडीगढ़ का कहना है कि परिजनों की ओर से ब्रोंकोस्कोपी की अनुमति नहीं मिलने से वह इलाज करने में असमर्थ थे। जबकि परिजनों और रिश्तेदारों का आरोप है कि पीजीआई के डॉक्टरों ने ब्रोंकोस्कोपी की अनुमति तो मांगी लेकिन साथ ही यह कहा कि इस प्रक्रिया में बच्चे की मौत हो सकती है। 

इससे वह लोग घबरा गए और तुरंत अनुमति देने से मना कर दिया। परिवार में विचार-विमर्श हुआ और करीब एक घंटे के बाद डॉक्टरों को अनुमति देने का आग्रह किया। आरोप है कि उसके बाद डॉक्टर इलाज के लिए तैयार ही नहीं हुए। बच्चा दो अप्रैल को शाम छह बजे पीजीआई पहुंच गया था और तीन अप्रैल की सुबह छह बजे तक उसे इलाज नहीं मिला। इसके बाद उसने करीब सुबह साढ़े छह बजे दम तोड़ दिया। बच्चे के पिता ने इस मामले में पुलिस में शिकायत भी दी है। 

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