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Chandigarh News: बीस साल से शामलात जमीन पर मकान बनाकर रह रहे लोगों को मिलेगा मालिकाना हक
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चंडीगढ़। हरियाणा के गांवों में शामलात जमीन पर 20 साल से मकान बनाकर रह रहे ग्रामीणों को अब मालिकाना हक दिया जाएगा। हालांकि, अधिकतम 500 वर्ग गज तक के मकानों को ही वैध माना जाएगा। इसी तरह 20 साल से शामलात देह जमीन को पट्टे पर लेकर खेती कर रहे किसानों के नाम जमीन की जा सकेगी।
हरियाणा विधानसभा में साेमवार की शाम इस संबंध में हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 में संशोधन करने के लिए हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2024 पारित किया गया। मालिकाना हक के लिए उन्हें बाजार मूल्य के आधार पर जमीन की कीमत चुकानी होगी। इसके साथ ही गांवों में 20 साल से शामलात जमीन पर खेती कर रहे किसानों और मकान बनाकर रह रहे ग्रामीणों को जमीन का मालिकाना हक मिलने का रास्ता साफ हो गया है। विवादित जमीनों को वैध रूप से किसानों और ग्रामीणों के नाम किया जा सकेगा।
तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में पांच मार्च को हुई कैबिनेट बैठक में शामलात भूमि को 20 साल पहले पट्टे पर लेने वाले किसानों को मालिकाना हक देने के लिए निर्णय लिया गया था। इसके बाद लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई और कानून में बदलाव नहीं किया जा सका। फिर 12 जुलाई को मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पंचायती जमीन पर 31 मार्च 2004 से पहले तक अधिकतम 500 वर्ग तक का घर बना चुके परिवारों के निर्माण वैध करने की मंजूरी दी गई। साथ ही खेती के लिए 20 साल के लिए पट्टे पर दी गई शामलात देह जमीन को शामलात देह के दायरे से बाहर रखने का निर्णय लिया गया। मूल पट्टेदार, हस्तांतरित व्यक्ति या उनके कानूनी उत्तराधिकारी को स्वामित्व अधिकारों के हस्तांतरण के लिए संबंधित ग्राम पंचायत को एक राशि का भुगतान करना होगा।
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हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2024 पास
हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास और विनियमन अधिनियम, 1975 को संशोधन करने के लिए हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2024 पारित किया गया। उन कॉलोनियों के लिए पूर्णता प्रमाण-पत्र प्रदान करने में तेजी लाने के लिए और पहले से बसी हुई परियोजनाओं को समापन प्रमाणपत्र प्रदान करने पर सरकार ने संशोधन किया है, जहां प्लाॅटेड कॉलोनियों के अलावा अन्य कॉलोनियों के मामले में सभी बिल्डिंग ब्लॉकों के लिए व्यवसाय प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा चुका है। जहां प्लाॅटेड कॉलोनियों के मामले में पूरे क्षेत्र के लिए आंशिक पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी किया जा चुका है, उनको अब नए सिरे से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है?
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हरियाणा विधानसभा में साेमवार की शाम इस संबंध में हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 में संशोधन करने के लिए हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2024 पारित किया गया। मालिकाना हक के लिए उन्हें बाजार मूल्य के आधार पर जमीन की कीमत चुकानी होगी। इसके साथ ही गांवों में 20 साल से शामलात जमीन पर खेती कर रहे किसानों और मकान बनाकर रह रहे ग्रामीणों को जमीन का मालिकाना हक मिलने का रास्ता साफ हो गया है। विवादित जमीनों को वैध रूप से किसानों और ग्रामीणों के नाम किया जा सकेगा।
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तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में पांच मार्च को हुई कैबिनेट बैठक में शामलात भूमि को 20 साल पहले पट्टे पर लेने वाले किसानों को मालिकाना हक देने के लिए निर्णय लिया गया था। इसके बाद लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई और कानून में बदलाव नहीं किया जा सका। फिर 12 जुलाई को मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पंचायती जमीन पर 31 मार्च 2004 से पहले तक अधिकतम 500 वर्ग तक का घर बना चुके परिवारों के निर्माण वैध करने की मंजूरी दी गई। साथ ही खेती के लिए 20 साल के लिए पट्टे पर दी गई शामलात देह जमीन को शामलात देह के दायरे से बाहर रखने का निर्णय लिया गया। मूल पट्टेदार, हस्तांतरित व्यक्ति या उनके कानूनी उत्तराधिकारी को स्वामित्व अधिकारों के हस्तांतरण के लिए संबंधित ग्राम पंचायत को एक राशि का भुगतान करना होगा।
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हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2024 पास
हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास और विनियमन अधिनियम, 1975 को संशोधन करने के लिए हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2024 पारित किया गया। उन कॉलोनियों के लिए पूर्णता प्रमाण-पत्र प्रदान करने में तेजी लाने के लिए और पहले से बसी हुई परियोजनाओं को समापन प्रमाणपत्र प्रदान करने पर सरकार ने संशोधन किया है, जहां प्लाॅटेड कॉलोनियों के अलावा अन्य कॉलोनियों के मामले में सभी बिल्डिंग ब्लॉकों के लिए व्यवसाय प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा चुका है। जहां प्लाॅटेड कॉलोनियों के मामले में पूरे क्षेत्र के लिए आंशिक पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी किया जा चुका है, उनको अब नए सिरे से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है?