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PGI टेली कंसल्टेशन सर्विस से मरीजों को नहीं मिल रही राहत, फोन न लगने से बिगड़ने लगी सेहत
Mon, 21 Sep 2020 02:24 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 21 Sep 2020 02:24 PM IST
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कोरोना के कारण अस्पतालों की बंद हुई ओपीडी से परेशान मरीजों को आराम देने के लिए शुरू किए गए टेली कंसल्टेशन सर्विस का भी कोई खास लाभ नहीं मिल रहा है। पीजीआई द्वारा संचालित टेलीकंसल्टेशन सर्विस में लगातार मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण ज्यादातर मरीजों के कॉल नहीं लग पा रहे हैं। जिसके कारण वह अपना पंजीकरण नहीं करा पा रहे हैं।
ऐसी स्थिति में सैकड़ों मरीज अपना नंबर आने का हफ्तों से इंतजार कर रहे हैं। मरीजों का कहना है कि ओपीडी बंद होने के कारण हजारों मरीजों का इलाज बाधित है। ऐसी स्थिति में अगर टेलीकंसल्टेशन सर्विस का संचालन किया जा रहा है तो उसके टेलीफोन नंबरों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए जिससे कॉल करने पर मरीज को ज्यादा परेशान ना होना पड़े।
27 अगस्त से लगा रहा हूं कॉल
चंडीगढ़ निवासी सुरेश मौर्य ने बताया कि 27 अगस्त से लगातार पीजीआई के एडवांस आई सेंटर के नंबर पर कॉल कर रहे हैं। लेकिन उनका नंबर नहीं लग पा रहा। सुरेश ने बताया कि उनकी माता का पिछले 2 सालों से पीजीआई में इलाज चल रहा है। कोरोना के कारण ओपीडी सेवा बंद होने से फॉलोअप की प्रक्रिया बाधित हो गई है।
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फरवरी में दिखाने पर डॉक्टर ने बताया था कि उनकी दवाइयां बदलनी होंगी। लेकिन उसके बाद से डॉक्टर से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। मजबूरन उन्हें अब भी वही दवाएं दी जा रही हैं ।सुरेश का कहना है कि मरीजों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए पीजीआई प्रशासन को टेली कंसल्टेशन सर्विस को और विस्तारित करना चाहिए ताकि मरीजों को समय पर सही परामर्श मिल सके।
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ऐसी स्थिति में सैकड़ों मरीज अपना नंबर आने का हफ्तों से इंतजार कर रहे हैं। मरीजों का कहना है कि ओपीडी बंद होने के कारण हजारों मरीजों का इलाज बाधित है। ऐसी स्थिति में अगर टेलीकंसल्टेशन सर्विस का संचालन किया जा रहा है तो उसके टेलीफोन नंबरों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए जिससे कॉल करने पर मरीज को ज्यादा परेशान ना होना पड़े।
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27 अगस्त से लगा रहा हूं कॉल
चंडीगढ़ निवासी सुरेश मौर्य ने बताया कि 27 अगस्त से लगातार पीजीआई के एडवांस आई सेंटर के नंबर पर कॉल कर रहे हैं। लेकिन उनका नंबर नहीं लग पा रहा। सुरेश ने बताया कि उनकी माता का पिछले 2 सालों से पीजीआई में इलाज चल रहा है। कोरोना के कारण ओपीडी सेवा बंद होने से फॉलोअप की प्रक्रिया बाधित हो गई है।
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फरवरी में दिखाने पर डॉक्टर ने बताया था कि उनकी दवाइयां बदलनी होंगी। लेकिन उसके बाद से डॉक्टर से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। मजबूरन उन्हें अब भी वही दवाएं दी जा रही हैं ।सुरेश का कहना है कि मरीजों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए पीजीआई प्रशासन को टेली कंसल्टेशन सर्विस को और विस्तारित करना चाहिए ताकि मरीजों को समय पर सही परामर्श मिल सके।
कर्मचारियों के लिए अलग नम्बर
टेली कंसल्टेशन सर्विस के नंबर पर समय पर कॉल न लगने की समस्या के कारण ही पीजीआई के कर्मचारियों ने डायरेक्टर से अनुरोध करके अपने लिए एक अलग नंबर की सुविधा शुरू कराई है। कर्मचारियों का कहना है कि पंजीकरण के लिए तय किए गए डेढ़ घंटे के समय में कॉल की संख्या इतनी ज्यादा होती है कि जारी किए गए सभी नंबर व्यस्त बताए जाते हैं। ऐसी स्थिति में अगर गंभीर मरीज के इलाज के लिए टेलीकंसल्टेशन सर्विस पर निर्भर रह गया तो जान जोखिम में पड़ सकती है।
टेली कंसल्टेशन सर्विस के जरिए प्रतिदिन 2000 मरीजों को इलाज मिल रहा है। ओपीडी सेवा बंद होने के कारण मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। सुविधाओं के विस्तार के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
- डॉ अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता
टेली कंसल्टेशन सर्विस के जरिए प्रतिदिन 2000 मरीजों को इलाज मिल रहा है। ओपीडी सेवा बंद होने के कारण मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। सुविधाओं के विस्तार के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
- डॉ अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता