{"_id":"5d39649e8ebc3e6cd11bb5bf","slug":"people-facing-problems-in-use-of-online-services-in-zirakpur","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अफसरशाही हावी: लोगों को नहीं मिल रहा ऑनलाइन सुविधाओं का लाभ, कहीं तो चलती ही नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफसरशाही हावी: लोगों को नहीं मिल रहा ऑनलाइन सुविधाओं का लाभ, कहीं तो चलती ही नहीं
Thu, 25 Jul 2019 01:43 PM IST
खुशबू गोयल
दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर
दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 25 Jul 2019 01:43 PM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकारी ऑनलाइन सुविधाओं पर अफसरशाही हावी है, जिसके चलते आए दिन लोग परेशान हो रहे हैं। योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचे, इसके लिए सरकार ने ऑनलाइन पोर्टल शुरू किए, लेकिन लोगों को सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। तीन डिजीटल सुविधाओं की अमर उजाला ने पड़ताल की तो पाया कि कहीं सरकारी सुविधाओं से जुड़े ऑनलाइन पोर्टल खुलते ही नहीं, जहां खुलते हैं वहां सरकारी नंबरों पर अकसर कोई फोन नहीं उठाता। कई बार प्रतियोगी परीक्षा के लिए परीक्षार्थियों को ऑनलाइन आवेदन के बाद परेशान होना पड़ता है। सरकार जिन सुविधाओं को आसान बनाने की कोशिश कर रही, उसे अफसरशाही पतीला लगाने में जुटी है।
केस नंबर एक
वेबसाइट पर पूरी जानकारी नहीं, फोन करो तो कॉल पिक नहीं होती
नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रीड्रेसल कमीशन से जुड़ी पूरी जानकारी आपको वेबसाइट से नहीं मिल सकती। अगर आपको केस रजिस्टर कराना है या कोई सवाल है तो ऑफिस में जाना पड़ेगा, क्योंकि साइट पर दिए गए फोन नंबरों पर आप कॉल करेंगे तो यहां कॉल तो कनेक्ट हो जाएगा, लेकिन अकसर कोई कॉल पिक नहीं करता। अमर उजाला ने बुधवार को नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रीड्रेसल की साइट पर दिए गए इनक्वायरी नंबरों और कुछ अधिकारियों के नंबरों पर कॉल कर पड़ताल की तो पाया कि वेबसाइट पर दिए गए नंबरों पर अकसर कॉल पिक नहीं होती। इनमें इनक्वायरी नंबर सहित ज्वाइंट रजिस्ट्रार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार के नंबर शामिल हैं।
विज्ञापन
केस नंबर एक
वेबसाइट पर पूरी जानकारी नहीं, फोन करो तो कॉल पिक नहीं होती
नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रीड्रेसल कमीशन से जुड़ी पूरी जानकारी आपको वेबसाइट से नहीं मिल सकती। अगर आपको केस रजिस्टर कराना है या कोई सवाल है तो ऑफिस में जाना पड़ेगा, क्योंकि साइट पर दिए गए फोन नंबरों पर आप कॉल करेंगे तो यहां कॉल तो कनेक्ट हो जाएगा, लेकिन अकसर कोई कॉल पिक नहीं करता। अमर उजाला ने बुधवार को नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रीड्रेसल की साइट पर दिए गए इनक्वायरी नंबरों और कुछ अधिकारियों के नंबरों पर कॉल कर पड़ताल की तो पाया कि वेबसाइट पर दिए गए नंबरों पर अकसर कॉल पिक नहीं होती। इनमें इनक्वायरी नंबर सहित ज्वाइंट रजिस्ट्रार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार के नंबर शामिल हैं।
विज्ञापन
केस नंबर दो
जीआरपी हेल्प एप में कोई ऑप्शन नहीं, कहां करें शिकायत
ट्रेन में सफर करते समय छेड़खानी, चोरी-डकैती, जहरखुरानी जैसी समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए जीआरपी ने बाकायदा ऑफिशियल हेल्प एप बनाया हुआ है, लेकिन यह यात्रियों के लिए कारगर साबित नहीं है। मोबाइल के प्ले-स्टोर में जीआरपी हेल्प एप इंस्टॉल करने का आप्शन है, लेकिन यह एप आसानी से डाउनलोड नहीं होती। अगर एप डाउनलोड हो भी गई तो होम पेज के आगे कोई आप्शन ही नहीं आता। जब ऑप्शन ही नहीं होगा तो यात्री शिकायत कहां करेंगे। बता दें कि जीआरपी की ओर से दावा किया गया था कि जीआरपी हेल्प एप से पूरे देश की सभी स्टेट के जीआरपी के सीनियर अफसर जुड़े हैं, जो पैसेंजरों की शिकायतों और उस पर होने वाली कार्रवाई की मॉनीटरिंग करते हैं, लेकिन सवाल ये है कि जब एप ही नहीं खुलेगी तो यात्री शिकायत कैसे करेंगे।
केस नंबर तीन
एचपीएससी की वेबसाइट पर आवेदन करना बना परेशानी
हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन में नायब तहसीलदार के पद के लिए पंचकूला के आवेदक मनीष गुप्ता ने 2015 में एचपीएससी पोर्टल पर फार्म अप्लाई किया था। उस समय उनका आवेदन स्वीकार कर लिया गया, लेकिन उसी परीक्षा के लिए 2019 में उसी में ऑनलाइन फार्म पर कभी फोटो तो कभी हस्ताक्षर में दिक्कत दिखाई गई। जब फिर से फार्म को ठीक करके नए फॉर्मेट में अपलोड किया गया तो साइट पर मैसेज आया कि साइट पर 24 घंटे बाद चेक कीजिए। जब मनीष ने 24 घंटे बाद चेक किया तो दोबारा मैसेज आया कि 24 घंटे बाद चेक कीजिए। मनीष का कहना है कि डिजीटल इंडिया के जमाने में ऐसी दिक्कतें युवाओं को नहीं होनी चाहिए कि पहले सेम आवेदन को स्वीकार कर लिया जाए और उसी आवेदन में चार साल बाद एचपीएससी की वेबसाइट पर तकनीकी खराबी दिखा दी जाए। ये परेशानी नहीं तो और क्या है।
जीआरपी हेल्प एप में कोई ऑप्शन नहीं, कहां करें शिकायत
ट्रेन में सफर करते समय छेड़खानी, चोरी-डकैती, जहरखुरानी जैसी समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए जीआरपी ने बाकायदा ऑफिशियल हेल्प एप बनाया हुआ है, लेकिन यह यात्रियों के लिए कारगर साबित नहीं है। मोबाइल के प्ले-स्टोर में जीआरपी हेल्प एप इंस्टॉल करने का आप्शन है, लेकिन यह एप आसानी से डाउनलोड नहीं होती। अगर एप डाउनलोड हो भी गई तो होम पेज के आगे कोई आप्शन ही नहीं आता। जब ऑप्शन ही नहीं होगा तो यात्री शिकायत कहां करेंगे। बता दें कि जीआरपी की ओर से दावा किया गया था कि जीआरपी हेल्प एप से पूरे देश की सभी स्टेट के जीआरपी के सीनियर अफसर जुड़े हैं, जो पैसेंजरों की शिकायतों और उस पर होने वाली कार्रवाई की मॉनीटरिंग करते हैं, लेकिन सवाल ये है कि जब एप ही नहीं खुलेगी तो यात्री शिकायत कैसे करेंगे।
केस नंबर तीन
एचपीएससी की वेबसाइट पर आवेदन करना बना परेशानी
हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन में नायब तहसीलदार के पद के लिए पंचकूला के आवेदक मनीष गुप्ता ने 2015 में एचपीएससी पोर्टल पर फार्म अप्लाई किया था। उस समय उनका आवेदन स्वीकार कर लिया गया, लेकिन उसी परीक्षा के लिए 2019 में उसी में ऑनलाइन फार्म पर कभी फोटो तो कभी हस्ताक्षर में दिक्कत दिखाई गई। जब फिर से फार्म को ठीक करके नए फॉर्मेट में अपलोड किया गया तो साइट पर मैसेज आया कि साइट पर 24 घंटे बाद चेक कीजिए। जब मनीष ने 24 घंटे बाद चेक किया तो दोबारा मैसेज आया कि 24 घंटे बाद चेक कीजिए। मनीष का कहना है कि डिजीटल इंडिया के जमाने में ऐसी दिक्कतें युवाओं को नहीं होनी चाहिए कि पहले सेम आवेदन को स्वीकार कर लिया जाए और उसी आवेदन में चार साल बाद एचपीएससी की वेबसाइट पर तकनीकी खराबी दिखा दी जाए। ये परेशानी नहीं तो और क्या है।