1000 की पेंशन वो भी चार माह से नहीं मिली: चंडीगढ़ में भटक रहे बुजुर्ग-विधवा और दिव्यांग, जवाब भी नहीं मिलता
चंडीगढ़ में करीब 25 हजार वृद्धावस्था, दिव्यांग और विधवाओं को मासिक पेंशन जारी की जाती है। यहां वृद्धावस्था, दिव्यांग और विधवा पेंशन महज 1000 रुपये है, जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में इससे तीन गुना पेंशन मिलती है। नौ साल से पेंशन राशि में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है। इन वर्षों में महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है लेकिन पेंशन नहीं बढ़ाई गई है।
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देश की पहली योजनाबद्ध और 'स्मार्ट सिटी' कहलाने वाली चंडीगढ़ में बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांगों की हालत किसी अनसुनी पुकार जैसी हो गई है। महज 1000 रुपये की पेंशन के लिए भी लोगों को महीनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। जनवरी से अब तक पेंशन नहीं मिली है और लोग समाज कल्याण विभाग और संपर्क केंद्र के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं।
यूटी प्रशासन के समाज कल्याण विभाग की इस लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ प्रशासन 'वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान' और 'समावेशी समाज' की बातें करता है, दूसरी तरफ इन्हीं कमजोर वर्गों को अपने हक के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
जनवरी के बाद से पेंशन नहीं आने की वजह से बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग काफी परेशान हैं। वो पहले बैंक जाते हैं तो जवाब मिलता है कि पैसे नहीं आए। कारण पता करने के लिए कई जब संपर्क केंद्र को पहुंचे तो उन्हें वहां से समाज कल्याण विभाग में पता करने के लिए भेज दिया है। विभाग ने कोई ढंग से जवाब नहीं देता, यही पिछले कई महीनों से हो रहा है।
क्या समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लिए भी बजट का इंतजार करना पड़ेगा? बुजुर्गों की पेंशन के लिए बजट खत्म हो जाना ये गंभीर बात है। जब लाखों-करोड़ों की स्कीमें और प्रोजेक्ट बिना रुकावट चल सकते हैं, तब बुजुर्गों की 1000 रुपये की पेंशन के लिए बजट खत्म कैसे हो जाता है। सवाल यह भी उठते हैं कि हर साल इन योजनाओं का बजट तय होता है, लाभार्थियों की संख्या भी लगभग स्थिर रहती है। फिर आखिर ऐसा कैसे हो गया कि चार-चार महीने पेंशन देने लायक फंड ही नहीं बचा। क्या बजट की प्लानिंग में लापरवाही हुई, या कहीं फंड डायवर्ट कर दिए गए। जो प्रशासन अपने बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को नजरअंदाज करता है, वह कितनी भी योजनाएं बना ले, वो एक संवेदनशील समाज की कल्पना नहीं कर सकता।
पेंशन के लिए लोगों ने डीसी से लगाई गुहार
चार महीने से पेंशन नहीं मिलने पर लोगों ने डीसी से गुहार लगाई है। विकास नगर निवासी समाजसेवी देशराज सानवर ने डीसी को पत्र लिख कहा है कि चंडीगढ़ में हजारों वृद्ध और दिव्यांग लाभार्थी कई महीनों से पेंशन न मिलने के कारण आर्थिक और मानसिक संकट झेल रहे हैं। उन्होंने तुरंत पेंशन जारी करने, आगे से देरी न हो यह सुनिश्चित करने और एक पारदर्शी प्रणाली लागू करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि डीसी ने उनके पत्र को समाज कल्याण विभाग को भेज दिया है।
शहर में पेंशन की स्थिति
पेंशन वर्ग संख्या राशि (रुपये)
दिव्यांग 4650 1000 (0-69 फीसदी) और 2000 (70 फीसदी से ज्यादा)
विधवा 8592 1000 रुपये
वृद्धावस्था 12,192 1000 रुपये
यही पेंशन सहारा है लेकिन नहीं मिल रही
बुढ़ापे में तो यही पेंशन सहारा है। दवा से लेकर खाने तक का खर्च इससे चलता था। अब चार महीने हो गए, न पैसा आया न कोई जवाब। हर बार यही कहा जाता है कि जल्दी आ जाएगी। - शांति देवी (74), रामदरबार निवासी
चार महीने से एक रुपये नहीं आया
पेंशन आता है तो एक सहारा होता है। छोटे मोटे खर्चे चल जाते हैं लेकिन चार महीने से एक रुपये नहीं आया है। संपर्क केंद्र जाओ तो वो विभाग में जाकर पता करने को बोलते हैं। - प्रभाती लाल, रामदरबार निवासी
बताना तो चाहिए कि क्यों नहीं आ रही पेंशन
पेंशन क्यों नहीं आ रही है, ये पता करने के लिए इधर-उधर चक्कर काटने पड़ते हैं। अगर विभाग पेंशन नहीं जारी कर रहा है तो उन्हें बताना तो चाहिए कि पेंशन क्यों नहीं आ रही है। - अरविंद, विकास नगर निवासी
विभाग के पास बजट खत्म हो गया था लेकिन अब नए वित्त वर्ष में बजट आ गया है। मैपिंग की जा रही है। अगले 5-6 दिनों में पेंशन लोगों के खातों में डाल दी जाएगी। - पालिका अरोड़ा, निदेशक, समाज कल्याण विभाग