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कुठाराघातः पीसीएस इंटरव्यू की मेरिट लिस्ट पर फिर से रोक
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 06 May 2015 09:19 AM IST
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साल 2013 में आयोजित पीसीएस (कार्यकारी शाखा) एवं एलाइड सर्विस के 121 पदों की लिखित परीक्षा के अंकों पर हुए विवाद के मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एकल बेंच के दोबारा मेरिट बनाने संबंधी फैसले पर रोक लगा दी है। डिवीजन बेंच की ओर से मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया।
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साथ ही पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 21 मई तय की गई है। पहले दायर की गई याचिका में कहा गया था कि पंजाब लोकसेवा आयोग की ओर से आयोजित परीक्षा में जनरल स्टडी विषय को चार पेपरों में बांटा गया था। जबकि न्यूनतम अंक विषय के होने चाहिए न कि प्रति पेपर।
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जस्टिस रैना ने याचिकाएं मंजूर करते हुए चार पेपरों को एक ही विषय के मानक के तौर पर लिए जाने का आदेश दिया था। पीपीएससी ने जनरल स्टडीज़ विषय के चार पेपर लिए थे। प्रत्येक पेपर के न्यूनतम अंक 33 फीसदी रखे थे। इसी को याचिकाकताओं ने चुनौती दी थी।
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कहा था कि न्यूनतम अंक विषय के होने चाहिए न कि प्रति पेपर। जनरल स्टडीज़ के चार पेपरों के अधिकतम अंक 250 अंक प्रति पेपर थे। इस हिसाब से अब चारों पेपरों के कुल 1000 अंकों में से चारों पेपरों में 330 अंक लेने वाला उर्त्तीण होगा। जनरल स्टडीज़ के अलावा तीन अन्य विषयों की परीक्षा भी ली गई थी।
इनके प्रति विषय अधिकतम अंक 100 रखे गए थे। यह मुख्य परीक्षा थी। परीक्षा परिणाम के आधार पर पीपीएससी इंटरव्यू के लिए मेरिट बना चुका था। कई उम्मीदवारों ने एडवोकेट गुरिंदर सिंह के माध्यम से मेरिट को चुनौती देते हुए जनरल स्टडीज़ को एक ही विषय मानने की मांग याचिका में की थी। तब हाईकोर्ट ने इंटरव्यू पर रोक लगा दी थी।
बहस के दौरान एडवोकेट गुरिंदर सिंह ने बेंच को बताया था कि भर्ती का विज्ञापन जारी करने के बाद विषय संबंधी नोटिफिकेशन जारी की गई। जबकि, नियमानुसार यह नोटिफिकेशन विज्ञापन जारी करने से पहले जारी होनी चाहिए थी। एडवोकेट जनरल अशोक अग्रवाल ने पैरवी करते हुए कहा कि वेबसाइट पर पूरी डीटेल उपलब्ध करा दिया गया था।
ऐसे में यह नहीं हो सकता कि उम्मीदवार भर्ती संबंधी किसी प्रक्रिया से अनभिज्ञ हों। पैरवी के बाद जस्टिस आरएन रैना की एकल बेंच ने याचिकाएं मंजूर करते हुए मेरिट दोबारा तैयार करने का निर्देश दे दिया था। एकल बेंच के इसी फैसले को अपील के माध्यम से चुनौती दी गई थी। मंगलवार को जस्टिस एसके मित्तल के नेतृत्व वाली डिवीजन बेंच ने यथास्थिति का निर्देश देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।