Chandigarh Health Department: कोविड-डेंगू की रफ्तार हुई तेज, मंकी पॉक्स और एचएफएमडी भी बने चिंता का कारण
देश के विभिन्न क्षेत्रों में मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए पीजीआई ने केंद्र सरकार के निर्देश पर कमेटी गठित कर दी है। त्वचा रोग विभाग के विशेषज्ञों को इसमें लिए विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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कोरोना महामारी के बीच डेंगू और उसके बाद मंकीपॉक्स के बढ़ते खतरे से स्थिति गंभीर होती जा रही है। आलम यह है कि कुछ महीनों की राहत के बाद चंडीगढ़ में कोरोना वायरस ने फिर से अपनी रफ्तार बढ़ा दी है। प्रतिदिन 100 से ज्यादा केस आने लगे हैं। गंभीर बात यह है कि पिछले 48 घंटों में कोरोना से दो मौतें भी हो चुकी हैं। इससे प्रशासन की नींद उड़ गई है। वहीं डेंगू भी चुपके चुपके लोगों को चपेट में ले रहा है।
इन सबके बीच देश के अन्य कोनों में मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों को देखते हुए शहर में भी एहतियात बढ़ा दी गई है। हालांकि शहर में अभी मंकीपॉक्स या हैंड फुट एंड माउथ (एचएफएमडी) के संक्रमण से जुड़ा कोई भी मरीज नहीं मिला है। वहीं संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग राहत व बचाव से जुड़ी तैयारियां पूरी करने का दावा कर रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों के अनुसार शहर के विभिन्न अस्पतालों में कोरोना से जुड़े बेड, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन व दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा चुकी है।
मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों को देखते हुए पीजीआई ने गठित की कमेटी
देश के विभिन्न क्षेत्रों में मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए पीजीआई ने केंद्र सरकार के निर्देश पर कमेटी गठित कर दी है। त्वचा रोग विभाग के विशेषज्ञों को इसमें लिए विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीजीआई के नेहरू एक्सटेंशन में मंकीपॉक्स के मरीजों के लिए बेड आरक्षित किया जा चुका है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने मंकीपॉक्स व हैंड फुट एंड माउथ डिजीज से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। इसका कोई भी संदिग्ध मरीज मिलने पर उसका जांच का नमूना लेकर पुणे भेजा जाएगा।
स्कूल भी हुए सजग, डॉक्टर बोले- संक्रमण से डरने की जरूरत नहीं
मंकीपॉक्स, हैंड फुट एंड माउथ डिजीज के खतरे को देखते हुए शहर के स्कूल भी सचेत हो गए हैं। कुछ स्कूलों में बच्चों के हाथ और मुंह में दाने दिखने पर स्कूल प्रबंधन ने एहतियातन कक्षाएं बंद कर दी हैं। वहीं कुछ स्कूलों ने छोटे बच्चों की कक्षाओं को ऑनलाइन कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में होने वाले संक्रमण को लेकर ज्यादा गंभीर होने की जरूरत नहीं है। लक्षण आने पर उस बच्चे को 8 से 10 दिन के लिए आइसोलेट करने के साथ ही कुछ दवाओं की खुराक से इस संक्रमण को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
सभी टीके लगवाने के बावजूद कोरोना ने बनाया शिकार
कोरोना से पिछले दो दिनों से लगातार मौत दर्ज की जा रही है। मरने वालों में दोनों ही मरीज 70 साल से ज्यादा उम्र के हैं। चिंता की बात यह है कि जिन्होंने कोरोना टीके की सभी खुराक लगवाई है, वह भी मौत का शिकार हो रहा है। ऐसे में प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग मानकों का कड़ाई से पालन करने की सलाह दे रहा है। शहर में कोरोना संक्रमण की दर पिछले 7 दिनों के दौरान 9.18 प्रतिशत रही है। वहीं सक्रिय मरीजों की संख्या 808 है जबकि अब तक 1167 मरीजों की मौत हो चुकी है। वहीं कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 95952 पर पहुंच गई है। इनमें से अब तक 93977 मरीज ठीक हो चुके हैं।
ऑक्सीजन की भरपूर व्यवस्था
स्वास्थ विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना के मरीजों के लिए शहर में ऑक्सीजन की भरपूर व्यवस्था की जा चुकी है। मौजूदा समय में पीजीआई में 2000 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट), जीएमएसएच 16 में 500 और 800 एलपीएम के दो, जीएमसीएच 32 में 1000 और 800 एलपीएम के दो और सेक्टर- 48 के अस्पताल में 100 एलपीएम का ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट संचालित किया जा रहा है।डेंगू के भी बढ़ने लगे मरीज
बरसात के साथ ही शहर में डेंगू के मरीजों की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। कुछ दिनों पहले तक डेंगू के मरीजों की संख्या महज 10 थी, जो अब 25 पर पहुंच गई है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बचाव के लिए मलेरिया विभाग फॉकिग, एंटी लारवा व चेकिंग का काम तेजी से कर रहा है जबकि हकीकत कुछ और ही है। बरसात के दौरान जलभराव से बचाव की व्यवस्था अधूरी है। शहर की रोड गलियां जाम पड़ी है जिसमें तेजी से मच्छर पनप रहे हैं।
कोरोना से बचाव के लिए अस्पतालों में बेड आरक्षित करने के साथ ही ऑक्सीजन व वेंटिलेटर की आपूर्ति सुनिश्चित कर ली गई है। वहीं डेंगू से बचाव के लिए मलेरिया विभाग लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है जबकि देश में मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार के निर्देश पर पीजीआई में बेड आरक्षित करने के साथ ही कमेटी गठित की जा चुकी है। शहर में अभी इसका कोई मामला सामने नहीं आया है। -डॉ. वीके नागपाल, कार्यवाहक निदेशक स्वास्थ्य
विशेषज्ञों की सलाह-हैंड फुट एंड माउथ डिजीज से डरकर स्कूल न करें बंद
हैंड फुट एंड माउथ डिजीज (एचएफएमडी) को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन व चंडीगढ़ डर्मेटोलॉजी सोसायटी के विशेषज्ञों ने स्कूल ना बंद करने की अपील की है। दोनों ही एसोसिएशन के विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। हर वर्ष बरसात के दौरान बच्चों में यह संक्रमण देखने को मिलता है। पिछले कुछ वर्षों से ऐसी घटनाएं बढ़ गई हैं। यह मौसमी वायरल संक्रमण है जिसे लेकर ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर की सलाह से इलाज शुरू करने के साथ ही संक्रमित बच्चे को आइसोलेट करने की जरूरत होती है।आईएमए अध्यक्ष डॉ. रमणीक शर्मा ने लोगों से अपील की है कि इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। वहीं उनका कहना है कि इस संक्रमण के लक्षणों की जानकारी अभिभावकों व शिक्षकों को होना जरूरी है। इसके आधार पर वह संक्रमित बच्चों को अन्य बच्चों से अलग कर सकें। वहीं डर्मेटोलॉजी सोसायटी के अध्यक्ष रोहित बंसल के अनुसार वायरल संक्रमण के लिए स्कूल बंद करना और शिक्षा को ऑनलाइन मोड पर लाना अनावश्यक है। ऐसी स्थिति में चंडीगढ़ प्रशासन को आम जनता और विद्यार्थियों के बीच भय की स्थिति उत्पन्न होने से बचाने के लिए जागरुकता पर फोकस होने की जरूरत है।