आंखें गंवा चुके मरीजों की जांच में कई खुलासे
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सर्जरी कैंप में आंखों की रोशनी गंवाने वाले मरीजों की जांच कर रहे डॉक्टरों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। आंखों के इस आपरेशन कैंप ने प्रशासन और सेहत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रोगियों की जांच कर रहे ईएनटी अस्पताल अमृतसर के एसोसिएट प्रोफेसर डा. कर्मजीत सिंह ने बताया कि बहुत से रोगियों की आंखों की रोशनी वापस आने की उम्मीद नहीं के बराबर है।
आपरेशन के बाद रोगियों की आंखों के लिए आवश्यक दिशा निर्देश, देखरेख और दवाओं का ध्यान नहीं रखा गया। इसलिए संक्रमण हुआ और रोशनी चली गई।
किसान संघर्ष कमेटी ने दी पहली शिकायत
रोगियों की गलते आपरेशन की सूचना पहले किसान संघर्ष कमेटी ने डीसी को दी थी। कोई सुनवाई न होने पर क्षेत्र के सभी रोगियों का इकट्ठा किया और बस से लाकर वीरवार देर शाम अस्पताल में दाखिल कराया गया।
फिर डीसी को सूचित करके मीडिया को बताया गया। इसके बाद सरकार और प्रशासन हरकत में आया। उन्होंने कहा कि अगर आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न हुई और रोगियों का इलाज सहीं ढंग से न हुआ तो किसान राज्य भर में संघर्ष शुरू कर देंगे।
चिकित्सक हैरान, लापरवाही के कई कारण
गुरदासपुर में आंखों की सर्जरी के कैंप में मरीजों की आंख की रोशनी चली जाने की घटना से समूह आंखों के चिकित्सक हैरान हैं। अमर उजाला ने आंखों के प्रसिद्ध सर्जन व सैकड़ों कैंप लगा चुके अकाल आई अस्पताल के सर्जन डॉ. सतबीर सिंह भौरा से बात की तो उन्होंने कहा कि खामी अकेली चिकित्सक में नहीं, कई स्टेजों पर हो सकती है।
डॉ. भौरा के मुताबिक, पहला खामी आंखों में नॉन फोल्डेबल लैंस लगाने में हो सकती है। नॉन फोल्डेबल लैंस लगाते समय आंखों को बड़ा चीरा लगाना पड़ता है, जो इंफेक्शन का कारण बन सकता है। आजकल की तकनीक फोल्डेबल लैंस की है। आंखों में छोटा से चीरा लगाकर फोल्डेबल लैंस अंदर डाला जाता है, जो बाद में खुल जाता है।
आंखों की सर्जरी कैंप के लिए नियमानुसार सिविल सर्जन कार्यालय से परमिशन लेनी पड़ती है, जगह की लगातार स्टरलाइजेशन कर उसको कल्चर स्वैब करना पड़ता है ताकि पता चल सके कि सर्जरी वाले थिएटर में बैक्टिरिया तो नहीं। आजकल अस्पतालों में तो हैपाफिल्टर लगे होते हैं जबकि कैंपों में यह इस्तेमाल नहीं होते। डॉ. भौरा के मुताबिक एक अन्य बड़ा कारण बैलेंस सैलाइन सोल्यूशन का इस्तेमाल होना है।
कुछ मरीजों की आंखों से रिस रहा खून
इन रोगियों के साथ आए रिश्तेदारों गुरबचन सिंह, मंजीत कौर, निर्मल कौर, जसवंत सिंह, दलबीर सिंह और सुबेग सिंह ने कहा कि सभी रोगियों की उम्र 50 वर्ष से अधिक है। आपरेशन कैंप के आयोजकों ने पहले आसपास के गांवों में लाउड स्पीकरों से प्रचार किया था कि उनके गांव के गुरुद्वारे के पास आंखों की जांच के लिए कैंप लग रहा है।
डाक्टरों ने वहां चेकअप करके उनसे आपरेशन करवाने के लिए कहा और यह भी बताया कि उनके आपरेशन फ्री किए जाएंगे। आपरेशन के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। वादे के अनुसार उन्हें न तो दवाएं दी गईं और न ही यह बताया गया कि उन्होंने कैसे देखभाल करनी और क्या परहेज करना है।
जिस दिन से रोगियों के आपरेशन हुए उनकी आंखों का दर्द खत्म नहीं हुआ। आंखों से लगातार पानी टपकता रहता है। कुछ रोगियों की आंखों से खून आता था। उन्होंने कहा कि डाक्टर यहां जांच के लिए तो आ रहे हैं लेकिन दवाएं उन्हें खुद ही बाहर से लानी पड़ती हैं।
रोगियों के परिजनों में दहशत व डर का माहौल
यहां सरकारी अस्पताल में दाखिल रोशनी खो चुके रोगियों के परिजनों में दहशत व डर का माहौल है। जब परिजनों को डाक्टरों की जांच के बाद पता चला कि अब मरीजों की आंखों की रोशनी दोबारा आने की उम्मीद बहुत कम है तो उनके चेहरों पर मायूसी छा गई है। वे कहते हैं कि रोशनी पाने की उम्मीद में रोशनी ही चली गई।
इस समय अमृतसर के सरकारी ईएनटी अस्पताल में गांव गगो माहल के जोगिंदर सिंह, गांव डडियां की प्यार कौर, गगो माहल की महिला शिंदर कौर, गांव बंदी छन्ना के दलीप सिंह, गांव गिल्लावाली की गुरदीप कौर, गांव क्याडपुर के जसवंत सिंह, गांव किरल गढ़ की भजन कौर, गांव चाडपुरा की चरण कौर, गांव गगो माहल की सविंदर कौर, इसी गांव के प्रीतम सिंह, सुलखन सिंह और बलवंत सिंह, गांव बेदी छन्ना की भगवंती, गांव गगो माहल की महिमा संपूर्ण कौर, गांव बेदी छन्ना की महिला पूरो, इसी गांव के गुरबचन सिंह गांव हरड़ कलां के निशान सिंह और गांव गगो माहल के जोगिंदर सिंह इलाज के लिए दाखिल हैं। इनके परिजन अपने लोगों की आंखों की रोशनी लौटने के लिए दुआ मांग रहे हैं।
सभी रोगियों की उम्र 50 से अधिक
इन रोगियों के साथ आए रिश्तेदारों गुरबचन सिंह, मंजीत कौर, निर्मल कौर, जसवंत सिंह, दलबीर सिंह और सुबेग सिंह ने कहा कि सभी रोगियों की उम्र 50 वर्ष से अधिक है। आपरेशन कैंप के आयोजकों ने पहले आसपास के गांवों में लाउड स्पीकर से प्रचार किया था कि उनके गांव के गुरुद्वारे के पास आंखों की जांच के लिए कैंप लग रहा है।
डाक्टरों ने वहां चेकअप करके उनसे आपरेशन करवाने के लिए कहा और यह भी बताया कि उनके आपरेशन फ्री किए जाएंगे। आपरेशन के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। वादे के अनुसार उन्हें न तो दवाएं दी गईं और न ही यह बताया गया कि उन्होंने कैसे देखभाल करनी और क्या परहेज करना है।
उच्च स्तरीय जांच के लिए सरकार से सिफारिश
अमृतसर के डीसी रवि भगत ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए सरकार को लिख दिया है। वहीं सिविल सर्जन डॉ राजीव भल्ला ने कहा कि एनजीओ ने जिला प्रशासन और सेहत विभाग की बिना किसी स्वीकृति के आपरेशन गैरकानूनी ढंग से कर दिए।
यह अपराध है। उनके विभाग की ओर से जिला प्रशासन को सिफारिश की गई है कि आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
दूसरी ओर मेडिकल एजुकेशन मंत्री अनिल जोशी भी सरकारी ईएनटी अस्पताल में दाखिल पीडि़तों का हाल जानने पहुंचे। उन्होंने कहा कि सभी रोगियों का इलाज निशुल्क होगा और सरकार मामले की जांच कराएगी।
सिविल सर्जनों की इजाजत के बिना नहीं लगेंगे मेडिकल कैंप
पंजाब सरकार ने जिलों में सिविल सर्जनों की इजाजत के बिना मेडिकल कैंप आयोजित करने पर रोक लगा दी है। गैर सरकारी संगठनों की ओर से स्वास्थ्य जांच शिविर के दौरान मरीजों की आंख की रोशनी जाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी ने निर्देश जारी किए हैं।
सरकार ने सिविल सर्जनों को निर्देश जारी किए हैं कि वह आवश्यक संख्या में मेडिकल विशेषज्ञ न होने की स्थिति में किसी भी संस्था को मेडिकल कैंप लगाने की स्वीकृति न दें।
जम्मू में विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे ज्याणी ने यह मामला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के संज्ञान में लाया। नड्डा ने जांच कैंप के पीड़ित सभी मरीजों को एम्स और पीजीआई में इलाज करवाने की पेशकश की है।
मुख्यमंत्री ने की मुआवजे की घोषणा
पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने गुरदासपुर जिले के गांव घुमाण में एक नेत्र चिकित्सा शिविर की वजह से घटी दर्दनाक घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही शिविर के दौरान आंखों की रोशनी गंवाने वाले लोगों को एक-एक लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा भी की है।
मुख्यमंत्री के राष्ट्रीय मामले व मीडिया सलाहकार हरचरण बैंस के अनुसार, मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव विन्नी महाजन को इस घटना के सभी पक्षों की निजी रूप से जांच करने को कहा है। महाजन को इस घटना वाले स्थान पर स्वयं जाकर सभी तथ्य हासिल करने और पीड़ितों को तेजी से राहत देने के प्रबंधों की स्वयं निगरानी करने के लिए कहा गया है।
बैंस ने आगे बताया कि मुख्यमंत्री ने इस दर्दनाक घटनाक्रम में अपनी आंखों की रोशनी खो चुके पीड़ितों के परिवारों को एक-एक लाख रुपये की अंतरिम राहत देने की घोषणा की है। पीड़ितों को निशुल्क मेडिकल उपचार उपलब्ध करवाने की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि सभी रोगियों का सरकारी स्तर पर नए सिरे से उपचार करने के लिए फिर से मुआयना किया जाएगा।