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सेक्टर-48 के अस्पताल में भर्ती मरीजों को ईसीजी और एक्स कराने में छूट रहे पसीने
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चंडीगढ़। सेक्टर-48 में भर्ती मरीजों को ईसीजी और एक्स-रे कराने में पसीने छूट रहे हैं। कारण अस्पताल में ईसीजी टेक्नीशियन और रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होना है। ऐसे में एक्स-रे कराने के बाद भी रिपोर्ट के लिए जीएमसीएच-32 के डॉक्टर के आने का इंतजार करना पड़ रहा है या फिर रिपोर्ट लेने वहां जाना पड़ रहा है। वहीं ईसीजी टेक्नीशियन के न होने से जांच के लिए जीएमसीएच जाना पड़ रहा है। जांच की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को 5 से 7 किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। इस कारण जीएमसीएच-32 से सेक्टर- 48 में शिफ्ट होने की बात सुनकर मरीजों का तनाव बढ़ जा रहा है। वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वहां भर्ती मरीजों के डॉक्टर जांच की सुविधा शुरू करने की मांग नहीं कर रहे इसलिए सुविधा बहाल नहीं की गई है।
गौरतलब है कि कोरोना की तीसरी लहर के बाद सेक्टर-48 के अस्पताल में जीएमसीएच-32 के गैर कोविड मरीजों को भर्ती करना शुरू कर दिया गया है लेकिन वहां न तो कैंटीन है, न हीं दवा की दुकान। इस कारण मरीजों के साथ उनके परिजनों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि अस्पताल में कैंटीन के लिए टेंडर किया जा चुका है। उम्मीद है कुछ दिनों में कैंटीन संचालित होने लगेगी।
बॉक्स
मौत के बाद सत्यापन के लिए भेजा जाता है जीएमसीएच-32
स्थिति यह है कि सेक्टर-48 में भर्ती गंभीर मरीज की मौत होने पर सत्यापन के लिए ईसीजी कराने जीएमसीएच-32 ले जाना पड़ता है। कोरोना के चरम के दौरान सेक्टर-48 में इस तरह की समस्या कई बार सामने आ चुकी है। उसके बावजूद अस्पताल प्रशासन जांच की व्यवस्था को लेकर अनदेखी कर रहा है। जीएमसीएच-32 के जिन मरीजों को सेक्टर-48 भेजने को कहा जा रहा है वे अव्यवस्था के डर से वहां जाने से इनकार कर दे रहे हैं। नतीजन 100 बेड अतिरिक्त मिलने के बावजूद जीएमसीएच-32 में मरीजों का दबाव कम नहीं हो पा रहा।
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इन विभागों के मरीज हैं यहां भर्ती
टीबी एंड रेस्पेरेटरी, मनोरोग विभाग, त्वचा रोग और रेडियोथैरेपी विभाग के लगभग 50 मरीजों को यहां भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा कोविड के दौरान अस्पताल को कोविड डेडिकेटेड अस्पताल घोषित कर संक्रमित मरीजों को यहां भर्ती किया गया था। इसके बावजूद यहां मरीजों के जांच की व्यवस्था नदारत है।
कोट-
सेक्टर-48 के लिए जीएमसीएच-32 प्रत्येक स्तर पर सुविधाएं मुहैया कराने को तैयार है। अगर इसीजी और एक्स-रे को लेकर वहां भर्ती मरीजों को परेशानी हो रही है तो सोमवार को संबंधित विभागाध्यक्षों से बात कर ये सुविधाएं वहां शुरू करा दी जाएंगी।
-डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएस-32
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गौरतलब है कि कोरोना की तीसरी लहर के बाद सेक्टर-48 के अस्पताल में जीएमसीएच-32 के गैर कोविड मरीजों को भर्ती करना शुरू कर दिया गया है लेकिन वहां न तो कैंटीन है, न हीं दवा की दुकान। इस कारण मरीजों के साथ उनके परिजनों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि अस्पताल में कैंटीन के लिए टेंडर किया जा चुका है। उम्मीद है कुछ दिनों में कैंटीन संचालित होने लगेगी।
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मौत के बाद सत्यापन के लिए भेजा जाता है जीएमसीएच-32
स्थिति यह है कि सेक्टर-48 में भर्ती गंभीर मरीज की मौत होने पर सत्यापन के लिए ईसीजी कराने जीएमसीएच-32 ले जाना पड़ता है। कोरोना के चरम के दौरान सेक्टर-48 में इस तरह की समस्या कई बार सामने आ चुकी है। उसके बावजूद अस्पताल प्रशासन जांच की व्यवस्था को लेकर अनदेखी कर रहा है। जीएमसीएच-32 के जिन मरीजों को सेक्टर-48 भेजने को कहा जा रहा है वे अव्यवस्था के डर से वहां जाने से इनकार कर दे रहे हैं। नतीजन 100 बेड अतिरिक्त मिलने के बावजूद जीएमसीएच-32 में मरीजों का दबाव कम नहीं हो पा रहा।
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इन विभागों के मरीज हैं यहां भर्ती
टीबी एंड रेस्पेरेटरी, मनोरोग विभाग, त्वचा रोग और रेडियोथैरेपी विभाग के लगभग 50 मरीजों को यहां भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा कोविड के दौरान अस्पताल को कोविड डेडिकेटेड अस्पताल घोषित कर संक्रमित मरीजों को यहां भर्ती किया गया था। इसके बावजूद यहां मरीजों के जांच की व्यवस्था नदारत है।
कोट-
सेक्टर-48 के लिए जीएमसीएच-32 प्रत्येक स्तर पर सुविधाएं मुहैया कराने को तैयार है। अगर इसीजी और एक्स-रे को लेकर वहां भर्ती मरीजों को परेशानी हो रही है तो सोमवार को संबंधित विभागाध्यक्षों से बात कर ये सुविधाएं वहां शुरू करा दी जाएंगी।
-डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएस-32