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पटियाला: हिंसक झड़प के बाद एक्शन में सरकार, आईजी, एसएसपी और एसपी का तबादला, इंटरनेट सेवा बंद

Sat, 30 Apr 2022 03:16 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 30 Apr 2022 03:16 PM IST
सार

पटियाला में शुक्रवार को खालिस्तान के मुद्दे को लेकर शिव सैनिक और खालिस्तान समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। शुक्रवार को सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ यह सिलसिला दोपहर तीन बजे तक चला।

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Patiala Violence Clash Curfew & Bandh Latest News Updates in Hindi From Punjab
पटियाला में शनिवार को पुलिस अलर्ट रही। - फोटो : ANI

विस्तार

पटियाला हिंसा मामले में आखिरकार राज्य सरकार ने जिले के आला पुलिस अफसरों पर गाज गिरा दी। मुख्यमंत्री भगवंत मान के आदेश पर राज्य सरकार ने शनिवार को पटियाला रेंज के आईजी राकेश अग्रवाल, एसएसपी डा. नानक सिंह और एसपी (सिटी) हरपाल सिंह का तबादला करते हुए तीनों को राज्य के डीजीपी को रिपोर्ट करने को कह दिया। इनके अलावा डीएसपी अशोक कुमार, थाना लाहौरी गेट के एसएचओ गुरप्रीत सिंह और थाना कोतवाली पटियाला के एसएचओ विक्रम सिंह को भी हटा दिया गया है। राज्य के डीजीपी की कार्यप्रणाली से भी सीएम खफा नजर आए।

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इस बीच पुलिस मुख्यालय सूत्रों के अनुसार शुक्रवार देर शाम आला पुलिस अफसरों की बैठक में मुख्यमंत्री राज्य में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और पटियाला हिंसा मामले में हुई चूक के लिए डीजीपी वीके भावरा से काफी खफा दिखाई दिए। हालांकि बैठक में उन्होंने सीधे तौर पर कोई सख्त टिप्पणी नहीं की, लेकिन बिगड़ते हालात को लेकर मुख्यमंत्री ने अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठा दिए। मुख्यमंत्री ने दो दिन के भीतर पटियाला हिंसा के मुख्य दोषियों को गिरफ्तार करने की हिदायत देते हुए साफ कर दिया कि इस मामले में दोषियों के साथ ही लापरवाही बरतने वाले अफसरों को बख्शा नहीं जाएगा।
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मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि मुखविंदर सिंह छीना को पटियाला का नया आईजी, दीपक पारिक को एसएसपी और वजीर सिंह को एसपी नियुक्त किया गया है। दरअसल, पटियाला में शुक्रवार को हिंदू शिव सेना और खालिस्तान समर्थकों के बीच हिंसा की घटना को लेकर पुलिस व खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। 
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गौरतलब है कि हाल के दिनों में प्रतिबंधित संगठन सिख फार जस्टिस (एसएफजे) के कनवीनर गुरपतवंत पन्नू ने 29 अप्रैल को खालिस्तान स्थापना दिवस मनाने का एलान किया था। इसके जवाब में हिंदू शिव सेना (बाल ठाकरे) के निष्कासित कार्यकारी प्रदेश प्रधान हरीश सिंगला ने 29 अप्रैल को शहर में पन्नू का पुतला फूंकने और खालिस्तान विरोधी मार्च निकालने की घोषणा की थी। वहीं खालिस्तान समर्थकों ने हिंदू शिव सेना से इस मार्च का विरोध करने का एलान किया था।

पुलिस और खुफिया तंत्र पर उठ रहे सवाल

शुक्रवार को दोनों ही धड़े अपने तय कार्यक्रम के अनुसार पटियाला की सड़कों पर उतरे, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस ने पहले से कोई कदम नहीं उठाया और न ही समय रहते इन कार्यक्रमों पर रोक लगाई। दोनों धड़ों के बीच जब काली माता मंदिर से सामने झड़प हो गई तब पुलिस जागी और भीड़ को खदेड़ने के लिए कार्रवाई की गई। इस दौरान मंदिर की छत के दूसरे धड़े पर पथराव किया गया, जिसे लेकर अब यह कहा जा रहा है कि हिंदू शिव सेना ने हिंसा की पूरी तैयारी पहले ही कर रखी थी। वहीं, जब तलवारें लहराते खालिस्तान समर्थकों ने मंदिर का मुख्य गेट तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की तो पुलिस ने हवाई फायरिंग कर भीड़ को तितर-बितर किया। इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं कि हिंसा सुनियोजित होने के बावजूद पुलिस और खुफिया तंत्र को इसकी भनक नहीं लग सकी।

हरीश सिंगला अदालत में पेश, दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा

शिव सेना (बाल) ठाकरे के निष्कासित नेता हरीश सिंगला को शनिवार को डाक्टरी जांच के बाद पुलिस की ओर से अदालत में पेश किया गया। सरकारी वकील ने सिंगला के चार दिनों के पुलिस रिमांड की मांग की, लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद हरीश सिंगला को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। गौरतलब है कि हरीश सिंगला ने शुक्रवार को खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च की अगुवाई की थी। 

इस मौके पर सरकारी वकील ने अदालत के सामने दलील दी कि हरीश सिंगला को मार्च निकालने के लिए किसने कहा। इसमें कौन-कौन शामिल रहा। इसकी तारें किसके साथ जुड़ी हुई हैं। इन सबके बारे में पूछने के लिए समय चाहिए, इसलिए अदालत की ओर से हरीश सिंगला का चार दिन का पुलिस रिमांड दिया जाए, लेकिन सिंगला के वकील ने इसका विरोध किया। 

इसके बाद कोर्ट ने सिंगला को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। इस मौके पर हरीश सिंगला के वकील आशु शर्मा ने बताया कि उनके खिलाफ सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने, धार्मिक भावनाओं के साथ खेलते सार्वजनिक शांति भंग करने, धमकियां देने, साजिश रचने की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। सिंगला को सोमवार को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि सिंगला की ओर से खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च निकालने के बाद भड़की हिंसा के बाद शिव सेना बाल ठाकरे की ओर से उसे पार्टी के बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। पार्टी का कहना है कि सिंगला ने मार्च निकालने के लिए पार्टी हाईकमान से मंजूरी नहीं ली थी। उधर, अदालत में पेश होने के वक्त सिंगला ने उस पर पुलिस प्रशासन की ओर से गलत पर्चा डालने के आरोप लगाए। सिंगला ने कहा कि पुलिस प्रशासन शुक्रवार को हालात संभालने में असफल रहा।

पटियाला में रहा तनाव, चप्पे-चप्पे पर तैनात रही पुलिस 

पटियाला में खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च को लेकर हुई हिंसा के अगले दिन शनिवार को भी शहर में तनाव का माहौल रहा। चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही। सुबह से ही बड़ी संख्या में हिंदू तख्त और शिव सेना हिंदुस्तान के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने श्री काली माता मंदिर के बाहर इकट्ठा होकर धरना शुरू कर दिया। पहले इन संगठनों का पटियाला बंद का आह्वान था, लेकिन बाद में शहर में रोष मार्च निकालने का फैसला हुआ। 

इससे पहले ही मौके पर एसएसपी व डीसी ने पहुंच कर हिंदू नेताओं को रोष मार्च न निकालने को मना लिया। हिंदू संगठनों ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया कि अगर इस समय के दौरान श्री काली माता मंदिर पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई न की, तो फिर तीखा आंदोलन छेड़ा जाएगा। इसके गंभीर परिणामों की जिम्मेदार सरकार व प्रशासन खुद होगा। इसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया।

सुबह साढ़े 9 बजे से लेकर शाम साढ़े चार बजे तक बंद रहीं इंटरनेट सेवाएं

शुक्रवार शाम सात बजे से लगाया गया कर्फ्यू शनिवार सुबह छह बजे प्रशासन की ओर से हटा दिया गया। प्रशासन की ओर से सावधानी बरतते हुए अफवाहें फैलने से रोकने के लिए सुबह साढ़े 9 बजे से इंटरनेट और एसएमएस सेवाओं को बंद कर दिया गया, जो शाम करीब साढ़े चार बजे बहाल कर दी गईं। हालांकि पहले इन सेवाओं को शाम साढ़े छह बजे बहाल करने की बात कही गई थी।

मंदिर की तरफ जाने वाली सड़क रही सील, पुलिस शहर में सारा दिन गश्त पर रही

शनिवार को पूरा दिन श्री काली माता मंदिर के बाहर पुलिस की ओर से सख्त सुरक्षा प्रबंध रहे। श्री काली माता मंदिर की तरफ जाने वाली सड़क सील रखी गई। शहर को बाहर से भी सील कर दिया गया। इस वजह से शहर के अंदर कर्फ्यू जैसे हालात रहे, पुलिस की टीमें दिन भर शहर में गश्त पर रहीं।

श्री काली माता मंदिर हमला एक सोची-समझी साजिश : हिंदू नेता 

धरने के मौके पर मीडिया से बात करते शिव सेना हिंदुस्तान के राष्ट्रीय प्रधान पवन गुप्ता और हिंदू तख्त के धर्मांधीश जगद्गुरु पंचानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि श्री काली माता मंदिर पर तलवारों के साथ किया हमला एक सोची समझी साजिश के तहत हुआ है। उन्होंने कहा कि मंदिर पर हमला करने से पहले गुरुद्वारा श्री दुखनिवारण साहिब में बैठक हुई और उसके बाद घटना को अंजाम दिया गया। यह बहुत ही निंदनीय है।
 
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