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यात्रीगण कृप्या ध्यान दें! ISBT43 में दो साल से रखा है आपका सामान, जरूरत का है तो ले जाएं
मोनिका, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 15 Nov 2018 02:54 PM IST
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- फोटो : Firebox
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आईएसबीटी-43 चंडीगढ़ में के क्लॉक रूम में पड़े लावारिस सामान ने प्रबंधन की नींद उड़ा दी है। दो साल से यह सामान पड़ा हुआ है। आलम यह है कि रैक पूरी तरह से भर चुके हैं, और जमा करवाए गए सामान को लेने के लिए मालिक पिछले दो साल से आए ही नहीं है। ऐसे में प्रबंधन ने भी कोताही बरतते हुए क्लॉक रूम में पड़े सामान को पुलिस के हवाले नहीं किया है। उधर, नियमों के अनुसार क्लॉक रूम में पड़े सामान को अगर कोई तीन महीने के भीतर नहीं ले जाता है तो, प्रबंधन को उसे पुलिस के हवाले करना होता है, लेकिन आईएसबीटी-43 के क्लॉक रूम में सामान दो साल से पड़ा हुआ है।
बहरहाल, यही कारण है कि बस स्टैंड के क्लॉक रूम में पहुंच रहे यात्रियों को अपना सामान सुरक्षित रखने के लिए जगह तक नहीं मिल पा रही है। क्योंकि दो साल से आईएसबीटी-43 के क्लॉक रूम में यात्री अपना सामान भूलते गए और अब आलम यह है कि सामान रखने को बनाया गया रैक लगभग भर चुका है। हैरत की बात यह है कि दो साल से यात्री अपना सामान लेने नहीं आए हैं। नियमों के मुताबिक क्लॉक रूम के कर्मचारियों को तीन महीने की समयावधि पूरी होने पर वहां रखा सामान पुलिस को सूचना देकर जमा करवाना होता है, लेकिन प्रबंधन ने ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की है। क्लॉक रूम में दो साल से अधिक समय से यात्रियों के बैग और कपड़े की गठरियां पड़ी हुई हैं। यात्रियों के करीब 50 बैग और अन्य सामान दो साल से क्लॉक रूम में धूल फांक रहा है।
यह है पहले दिन से तीन महीने तक का किराया..
क्लॉक रूम में 24 घंटे तक बैग रखने का किराया 10 रुपये है। दूसरे दिन 20 रुपये किराया है। एक साथ तीन दिन के लिए सामान रखने पर किराया 60 रुपये लिया जाता है। सात दिन तक का किराया 30 रुपये पड़ता है। सात दिन के बाद प्रतिदिन का किराया 40 रुपये होता है। एक महीने के बाद पचास रुपये प्रतिदिन हो जाता है। दो महीने के बाद और तीन महीने तक प्रतिदिन किराया 100 रुपये लगता है। इसके साथ ही तीन महीने की समयावधि पूरी होने पर क्लॉक रूम प्रबंधन को यात्रियों का छूटा सामान पुलिस के पास जमा करवाना होता है, लेकिन दो साल से ऐसा नहीं किया गया।
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एक-दो यात्री ही सामान लेने आए..
स्टेशन सुपरवाइजर गुरचरण सिंह का कहना है किएक-दो यात्री सामान लेने आए थे, लेकिन किराया अधिक होने के चलते वे दोबारा सामान लेने नहीं आए। उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों से बात करने के बाद ही व्यवस्था से संबंधित कुछ कहा जा सकता है।
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बहरहाल, यही कारण है कि बस स्टैंड के क्लॉक रूम में पहुंच रहे यात्रियों को अपना सामान सुरक्षित रखने के लिए जगह तक नहीं मिल पा रही है। क्योंकि दो साल से आईएसबीटी-43 के क्लॉक रूम में यात्री अपना सामान भूलते गए और अब आलम यह है कि सामान रखने को बनाया गया रैक लगभग भर चुका है। हैरत की बात यह है कि दो साल से यात्री अपना सामान लेने नहीं आए हैं। नियमों के मुताबिक क्लॉक रूम के कर्मचारियों को तीन महीने की समयावधि पूरी होने पर वहां रखा सामान पुलिस को सूचना देकर जमा करवाना होता है, लेकिन प्रबंधन ने ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की है। क्लॉक रूम में दो साल से अधिक समय से यात्रियों के बैग और कपड़े की गठरियां पड़ी हुई हैं। यात्रियों के करीब 50 बैग और अन्य सामान दो साल से क्लॉक रूम में धूल फांक रहा है।
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यह है पहले दिन से तीन महीने तक का किराया..
क्लॉक रूम में 24 घंटे तक बैग रखने का किराया 10 रुपये है। दूसरे दिन 20 रुपये किराया है। एक साथ तीन दिन के लिए सामान रखने पर किराया 60 रुपये लिया जाता है। सात दिन तक का किराया 30 रुपये पड़ता है। सात दिन के बाद प्रतिदिन का किराया 40 रुपये होता है। एक महीने के बाद पचास रुपये प्रतिदिन हो जाता है। दो महीने के बाद और तीन महीने तक प्रतिदिन किराया 100 रुपये लगता है। इसके साथ ही तीन महीने की समयावधि पूरी होने पर क्लॉक रूम प्रबंधन को यात्रियों का छूटा सामान पुलिस के पास जमा करवाना होता है, लेकिन दो साल से ऐसा नहीं किया गया।
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एक-दो यात्री ही सामान लेने आए..
स्टेशन सुपरवाइजर गुरचरण सिंह का कहना है किएक-दो यात्री सामान लेने आए थे, लेकिन किराया अधिक होने के चलते वे दोबारा सामान लेने नहीं आए। उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों से बात करने के बाद ही व्यवस्था से संबंधित कुछ कहा जा सकता है।