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Chandigarh News: दिव्यांगों के अधिकारों और पहुंच पर संसद में बहस
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चंडीगढ़। दिव्यांगजनों को सरकारी सुविधाओं और दफ्तरों तक आसान पहुंच के मुद्दे को लेकर कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने संसद में सवाल उठाया। केंद्र सरकार ने लोकसभा में इसका विस्तृत जवाब देते हुए चंडीगढ़ में दिव्यांगजनों के लिए चल रही व्यवस्थाओं और योजनाओं का विवरण प्रस्तुत किया।
सरकार ने बताया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत सार्वजनिक भवनों को दिव्यांग अनुकूल बनाना राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके तहत सरकारी दफ्तरों में रैंप, दिव्यांग शौचालय, कम ऊंचाई वाले काउंटर, संकेत बोर्ड और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह काम सुगम्य भारत अभियान के अंतर्गत हो रहा है।
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सहायक उपकरणों के लिए एडीआईपी योजना लागू है। बीते दो वर्षों में चंडीगढ़ में 330 श्रवण यंत्र वितरित किए गए और दो कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी कराई गई। पात्र दिव्यांगजनों को उनकी आय के आधार पर अनुदान दिया जाता है। सरकार ने यह भी बताया कि सुगम्य भारत एप के जरिए लोग सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों में पहुंच संबंधी दिक्कतों की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा एएलआईएमसीओ की ग्राहक सेवा प्रणाली और हेल्पलाइन भी संचालित की जा रही है। चंडीगढ़ में प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र के माध्यम से सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं और समस्याओं का समाधान किया जाता है। सरकार का कहना है कि इन पहलों से दिव्यांगजनों की सुविधा और अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार सुधार हो रहा है।
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