अमर उजाला पड़ताल: पीजीआई चंडीगढ़ में बच्चों के सीटी स्कैन कराने में छूट रहे अभिभावकों के पसीने
रेडियोडाइग्नोसिस विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार जन्म से लेकर इतने छोटे बच्चे जो बिना हिले-डुले जांच नहीं करवा सकते उनके लिए बेहोशी की जरूरत पड़ती है क्योंकि सीटी स्कैन के दौरान मरीज के हिलने पर जांच नहीं हो सकती। इसलिए ऐसे बच्चों को जांच से पहले बेहोश करना जरूरी होती है।
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पीजीआई की ओपीडी में आने वाले छोटे बच्चों की सीटी स्कैन हफ्ते में सिर्फ एक दिन मंगलवार को हो रही है। इसका कारण एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में होने वाली इस जांच के लिए बेहोशी के डॉक्टरों का उपलब्ध न होना है। ऐसे में पीजीआई के अलग-अलग विभागों में इलाज के लिए आए सैकड़ों बच्चों को हफ्ते में सिर्फ एक दिन के लिए जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
जांच के लिए कतार में लगे बच्चों की संख्या सैकड़ों है जबकि महज एक दिन में 40 बच्चों की सीटी स्कैन हो रही है। संस्थान के अजीबो-गरीब मानक के कारण जहां एक ओर बच्चों की जांच न होने से इलाज में विलंब हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ अभिभावकों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। अभिभावकों का कहना है कि इतने बड़े संस्थान में डॉक्टरों की कमी का हवाला देकर इलाज बाधित करना गलत है। कम से हफ्ते में तीन दिन जांच की सुविधा होनी चाहिए।
पहला मामला: बिहार की कांता अपने छह माह के बच्चे को लेकर पिछले तीन हफ्ते से चंडीगढ़ में हैं। हृदय संबंधी मर्ज होने पर पीजीआई की ओपीडी में देखने के बाद डॉक्टर ने सीटी स्कैन कराने को कहा है, लेकिन कांता चाहकर भी पिछले दो हफ्ते से अपने बच्चे की जांच नहीं करवा पा रही है। कारण एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में मंगलवार को होने वाली जांच के लिए बुकिंग फुल होने से उन्हें दो हफ्ते बाद की डेट मिली है।
दूसरा मामला: मध्य प्रदेश निवासी चंद्रमुखी के साथ भी ऐसा ही हुआ है। वह भी अपने तीन महीने की बेटी की सीटी स्कैन कराने के लिए परेशान है। तमाम प्रयास के बावजूद भी सफलता नहीं मिल सकी है। चंद्रमुखी ने बाहर से जांच कराने का प्रयास भी किया लेकिन उसे निराशा ही हाथ लगी है क्योंकि बच्चों को बेहोश करके होने वाली यह जांच निजी सेंटरों में उपलब्ध नहीं है।
बच्चों के लिए एनेस्थेसिया की टीम जरूरी
रेडियोडाइग्नोसिस विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार जन्म से लेकर इतने छोटे बच्चे जो बिना हिले-डुले जांच नहीं करवा सकते उनके लिए बेहोशी की जरूरत पड़ती है क्योंकि सीटी स्कैन के दौरान मरीज के हिलने पर जांच नहीं हो सकती। इसलिए ऐसे बच्चों को जांच से पहले बेहोश करना जरूरी होती है।
महज 10 से 15 मिनट की जांच के लिए ऐसे बच्चों को प्री और पोस्ट मानिटरिंग की जरूरत होती है। बेहोशी के डॉक्टरों की टीम की देखरेख में जांच करने के बाद उस बच्चे को होश में आने तक उनके सुपरविजन में रखा जाता है जिससे कोई अनहोनी न हो। जांच के दौरान बच्चे की बीपी, पल्स, हार्ट बीट और अन्य आवश्यक मानकों को जांचते रहना बेहद जरूरी होता है जो बेहोशी के डॉक्टर ही कर सकते हैं।
निजी डाइग्नोसिस सेंटर में जांच उपलब्ध नहीं
स्थिति यह है कि छोटे बच्चों को बेहोश कर किए जाने वाली सीटी स्कैन में बेहोशी के डॉक्टरों की अनिवार्यता के कारण ही निजी सेंटरों में जांच संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में परिजन चाहकर भी अपने बच्चे को समय पर जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। परिजन परेशान हैं लेकिन पीजीआई प्रशासन नियम कानून और व्यवस्था का हवाला दे रहा है। गौरतलब है कि पीजीआई में बच्चों के सीटी स्कैन का शुल्क अंग के अनुसार तय है। इसकी कीमत 300 रुपये से 1100 रुपये तक है।
शिशु सीटी स्कैन की संख्या
- 2019- 20 881
- 2020- 21 706
- 2021- 22 350
यह कहना सही नहीं है कि पीडियाट्रिक ओपीडी के मरीजों का सिर्फ मंगलवार को ही सीटी स्कैन किया जाता है, क्योंकि ऐसे केस यहां प्रतिदिन होते हैं। वार्ड के मरीजों का भी प्रतिदिन सीटी स्कैन होता है। बहुत छोटे बच्चों के सीटी स्कैन के लिए बेहोश करने की आवश्यकता होती है, जिसमें एनेस्थीसिया सहायक की जरुरत पड़ती है। मंगलवार को अधिक संख्या में ऐसे बच्चों का सीटी स्कैन किया जाता है, क्योंकि उस दिन हमें ज्यादा एनेस्थीसिया सहायक उपलब्ध होते हैं। ओपीडी के मरीजों के सीटी स्कैन की प्रतीक्षा सूची सात से आठ दिन की है, जबकि वार्ड के मरीजों की सूची एक दिन की है। कुमार गौरव, डीडीए, प्रवक्ता पीजीआई, चंडीगढ़।