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कोटकपूरा गोलीकांडः 4 दिन के रिमांड पर भेजे गए आईजी परमराज उमरानंगल, पत्नी बोली- बेकसूर हैं
Wed, 20 Feb 2019 09:07 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदकोट(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदकोट(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 20 Feb 2019 09:07 AM IST
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परमराज सिंह उमरानंगल
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कोटकपूरा गोलीकांड मामले में आईजी परमराज सिंह उमरानंगल को मंगलवार को अदालत ने चार के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। कोटकपूरा और बहिबल कलां गोलीकांड मामलों की जांच कर रही पंजाब पुलिस की एसआईटी ने जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सोमवार को आईजी उमरानंगल को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया था।
उन्हें मंगलवार दोपहर को फरीदकोट में ड्यूटी मजिस्ट्रेट एकता उप्पल की अदालत में पेश किया गया। इस दौरान एसआईटी ने आईजी से पूछताछ के लिए उनके 10 दिन के पुलिस रिमांड की मांग रखी। सरकारी पक्ष के वकील ने दावा किया कि कोटकपूरा गोलीकांड की घटना के संबंध में एसआईटी के पास आईजी उमरानंगल के खिलाफ काफी पुख्ता सबूत हैं।
घटना वाले दिन 14 अक्तूबर को कोटकपूरा पहुंचने के बारे में वह एसआईटी को गुमराह करते रहे कि वे उस दिन धरना दे रहे लोगों से बातचीत करने आए थे। लेकिन जस्टिस रणजीत सिंह की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वह तो धरना दे रहे लोगों को हटाने वाले टीम की अगुवाई कर रहे थे।
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इसके अलावा धरनास्थल पर तैनात एसडीएम ने पुलिस को सिर्फ हवाई फायरिंग करने की इजाजत दी थी। लेकिन पुलिस द्वारा लोगों पर सीधी फायरिंग की गई। एसआईटी ने दलील दी कि वह आईजी उमरानंगल से जानकारी लेना चाहते हैं कि आखिरकार कोटकपूरा में किसके कहने पर सीधी फायरिंग हुई। फायरिंग में उपयोग एसएलआर और अन्य हथियारों को भी बरामद किया जाना है।
बचाव पक्ष का आरोप, पूर्व डीजीपी व पूर्व सीएम तक पहुंचने की साजिश
इस दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि इस घटना में पुलिस ने तीन साल बाद अज्ञात पर केस दर्ज किया था और राजनीति से प्रेरित होकर एसआईटी द्वारा आईजी उमरानंगल के माध्यम से पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी व पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। इस पर सरकारी पक्ष ने कहा कि यह सब जांच का एक हिस्सा है।
फरीदकोट के एसएसपी रहे हैं उमरानंगल
कोटकपूरा गोलीकांड मामले में गिरफ्तार आईजी परमराज सिंह उमरानंगल, फरीदकोट के एसएसपी भी रहे हैं। तैनाती के समय फरीदकोट में भी वह काफी विवादों के घिरे रहे।
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उन्हें मंगलवार दोपहर को फरीदकोट में ड्यूटी मजिस्ट्रेट एकता उप्पल की अदालत में पेश किया गया। इस दौरान एसआईटी ने आईजी से पूछताछ के लिए उनके 10 दिन के पुलिस रिमांड की मांग रखी। सरकारी पक्ष के वकील ने दावा किया कि कोटकपूरा गोलीकांड की घटना के संबंध में एसआईटी के पास आईजी उमरानंगल के खिलाफ काफी पुख्ता सबूत हैं।
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घटना वाले दिन 14 अक्तूबर को कोटकपूरा पहुंचने के बारे में वह एसआईटी को गुमराह करते रहे कि वे उस दिन धरना दे रहे लोगों से बातचीत करने आए थे। लेकिन जस्टिस रणजीत सिंह की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वह तो धरना दे रहे लोगों को हटाने वाले टीम की अगुवाई कर रहे थे।
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इसके अलावा धरनास्थल पर तैनात एसडीएम ने पुलिस को सिर्फ हवाई फायरिंग करने की इजाजत दी थी। लेकिन पुलिस द्वारा लोगों पर सीधी फायरिंग की गई। एसआईटी ने दलील दी कि वह आईजी उमरानंगल से जानकारी लेना चाहते हैं कि आखिरकार कोटकपूरा में किसके कहने पर सीधी फायरिंग हुई। फायरिंग में उपयोग एसएलआर और अन्य हथियारों को भी बरामद किया जाना है।
बचाव पक्ष का आरोप, पूर्व डीजीपी व पूर्व सीएम तक पहुंचने की साजिश
इस दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि इस घटना में पुलिस ने तीन साल बाद अज्ञात पर केस दर्ज किया था और राजनीति से प्रेरित होकर एसआईटी द्वारा आईजी उमरानंगल के माध्यम से पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी व पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। इस पर सरकारी पक्ष ने कहा कि यह सब जांच का एक हिस्सा है।
फरीदकोट के एसएसपी रहे हैं उमरानंगल
कोटकपूरा गोलीकांड मामले में गिरफ्तार आईजी परमराज सिंह उमरानंगल, फरीदकोट के एसएसपी भी रहे हैं। तैनाती के समय फरीदकोट में भी वह काफी विवादों के घिरे रहे।
ये है मामला
जानकारी के अनुसार, बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड की घटनाएं 14 अक्तूबर 2015 को हुई थीं। इससे दो दिन पहले 12 अक्तूबर 2015 को बरगाड़ी में पावन ग्रंथ की बेअदबी का मामला सामने आया था, जिसके विरोध में सिख संगत द्वारा जगह- जगह रोष धरने दिए जा रहे थे। 14 अक्तूबर को कोटकपूरा के मुख्य चौक पर चल रहे सिख जत्थेबंदियों के रोष धरने को बल प्रयोग करके खत्म करवाया गया।
इस दौरान पुलिस के लाठीचार्ज और फायरिंग के कारण सिख जत्थेबंदियों के कई कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस मामले में पुलिस की तरफ से घटना वाले दिन प्रदर्शनकारियों पर इरादा-ए-कत्ल का केस दर्ज किया था, जबकि पुलिस के बल उपयोग से घायलों की कोई सुध नहीं ली गई।
कांग्रेस सरकार द्वारा गठित जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस ने कोटकपूरा गोलीकांड में घायल एक नौजवान अजीत सिंह के बयान पर सात अगस्त 2018 को थाना सिटी कोटकपूरा में अज्ञात पुलिस पार्टी पर धारा 307, 148, 149 का मामला दर्ज किया था।
इसमें पिछले माह एसआईटी ने धारा 148, 149 हटा दी है और धारा 201, 218, 120 बी व 34 को जोड़ दिया था। इसी मामले में सोमवार को आईजी परमराज सिंह उमरानंगल की पहली गिरफ्तारी की गई है। एसआईटी के सदस्य और आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने बताया कि आईजी उमरानंगल को कोटकपूरा गोलीकांड मामले में गिरफ्तार किया गया है और उन्हें फरीदकोट अदालत में पेश करके पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया जाएगा।
इस दौरान पुलिस के लाठीचार्ज और फायरिंग के कारण सिख जत्थेबंदियों के कई कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस मामले में पुलिस की तरफ से घटना वाले दिन प्रदर्शनकारियों पर इरादा-ए-कत्ल का केस दर्ज किया था, जबकि पुलिस के बल उपयोग से घायलों की कोई सुध नहीं ली गई।
कांग्रेस सरकार द्वारा गठित जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस ने कोटकपूरा गोलीकांड में घायल एक नौजवान अजीत सिंह के बयान पर सात अगस्त 2018 को थाना सिटी कोटकपूरा में अज्ञात पुलिस पार्टी पर धारा 307, 148, 149 का मामला दर्ज किया था।
इसमें पिछले माह एसआईटी ने धारा 148, 149 हटा दी है और धारा 201, 218, 120 बी व 34 को जोड़ दिया था। इसी मामले में सोमवार को आईजी परमराज सिंह उमरानंगल की पहली गिरफ्तारी की गई है। एसआईटी के सदस्य और आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने बताया कि आईजी उमरानंगल को कोटकपूरा गोलीकांड मामले में गिरफ्तार किया गया है और उन्हें फरीदकोट अदालत में पेश करके पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया जाएगा।
रणजीत सिंह आयोग में सामने आया था नाम
सूत्रों के मुताबिक, जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट में कोटकपूरा और बहिबल कलां गोलीकांड की घटनाओं में आईजी परमराज सिंह उमरानंगल की भूमिका संदिग्ध थी। आयोग के पास पीड़ित व्यक्तियों और गवाहों ने आईजी उमरानंगल की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे।
आयोग में नाम सामने आने पर उनकी भूमिका को लेकर एसआईटी द्वारा उन्हें पड़ताल के लिए कई बार बुलाया गया लेकिन वह एसआईटी को इस बात के लिए ही संतुष्ट नहीं कर पाए कि आखिरकार वह किसके कहने पर घटना वाले दिन कोटकपूरा पहुंचे थे।
उन्होंने एसआईटी के पास दावा किया था कि वह उस दिन धरनाकारियों से बातचीत के लिए कोटकपूरा गए थे, लेकिन जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट में सामने आया था कि वह कोटकपूरा व बहिबल कलां में धरनाकारियों को उठाने के लिए कार्रवाई करवाने वाली पुलिस अधिकारियों की टीम में प्रमुख रूप से शामिल थे।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि घटना वाले दिन उनकी उस समय के डीजीपी पंजाब सुमेध सिंह सैनी के साथ भी बातचीत हुई थी।
आयोग में नाम सामने आने पर उनकी भूमिका को लेकर एसआईटी द्वारा उन्हें पड़ताल के लिए कई बार बुलाया गया लेकिन वह एसआईटी को इस बात के लिए ही संतुष्ट नहीं कर पाए कि आखिरकार वह किसके कहने पर घटना वाले दिन कोटकपूरा पहुंचे थे।
उन्होंने एसआईटी के पास दावा किया था कि वह उस दिन धरनाकारियों से बातचीत के लिए कोटकपूरा गए थे, लेकिन जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट में सामने आया था कि वह कोटकपूरा व बहिबल कलां में धरनाकारियों को उठाने के लिए कार्रवाई करवाने वाली पुलिस अधिकारियों की टीम में प्रमुख रूप से शामिल थे।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि घटना वाले दिन उनकी उस समय के डीजीपी पंजाब सुमेध सिंह सैनी के साथ भी बातचीत हुई थी।