फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panjab University Scientist search new species of Beetle in Caves of Chhattisgarh

चंडीगढ़ : छत्तीसगढ़ की गुफाओं में मिला बिना कान वाला झींगुर, पीयू के वैज्ञानिकों ने ढूंढी 12वीं प्रजाति 

Fri, 21 May 2021 02:11 PM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 21 May 2021 02:11 PM IST
सार

अभी तक विश्व में इस प्रकार के झींगुर की 11 प्रजातियां है। कोरोना काल में पीयू की डॉ. रंजना जैसवारा, प्रोजेक्ट असिस्टेंट मोनाल ने छत्तीसगढ़ के वैज्ञानिक डॉ. जयंत विश्वास के साथ नई प्रजाति को ढूंढ निकाला है। 

विज्ञापन
Panjab University Scientist search new species of Beetle in Caves of Chhattisgarh
पीयू के वैज्ञानिकों ने ढूंढी झींगुर की नई प्रजाति - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना काल में पढ़ाई से लेकर शोध तक प्रभावित हैं, लेकिन चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इसी काल को अवसर में बदला और शोध के जरिए बड़ी सफलता पाई। पीयू के वैज्ञानिकों ने छत्तीसगढ़ की गुफाओं में झींगुर की 12वीं दुर्लभ प्रजाति ढूंढ निकाली है। इस प्रजाति के झींगुर के कान नहीं हैं। इसका नाम जयंती रखा गया है। यह नाम छत्तीसगढ़ के ही वैज्ञानिक डॉ. जयंत विश्वास के नाम पर रखा गया है। वह भी इस पर कार्य कर रहे हैं। यह शोध न्यूजीलैंड के प्रसिद्ध जर्नल जूटाक्षा में प्रकाशित हुआ है, जो टक्सोनॉमी क्षेत्र का प्रसिद्ध जर्नल है।

विज्ञापन


पीयू के जंतु विज्ञान विभाग में तैनात डीएसटी इंस्पायर फैकल्टी डॉ. रंजना जैसवारा, प्रोजेक्ट असिस्टेंट मोनाल इस पर वर्ष 2019 से शोध कर रहे हैं। उसी के क्रम में ये वैज्ञानिक जनवरी में छत्तीसगढ़ के कुर्रा क्षेत्र की गुफाओं में पहुंचे। छत्तीसगढ़ के वैज्ञानिक डॉ. जयंत विश्वास को भी इन्होंने साथ लिया। यहां इन्हें एक दुर्लभ झींगुर मिला। इसकी पीठ पर दो सफेद बैंड हैं, जो अन्य झींगुर में नहीं पाए जाते। 
विज्ञापन



इस पर और शोध किया गया। इनका रिप्रोडक्शन स्ट्रक्चर भी अलग है। न ही इनके कान मिले हैं और यह सुन भी नहीं सकते लेकिन यह अपनी बिरादरी के झींगुर से संचार भी करते हैं। माना जा रहा है कि यह संचार कम्पन्न के जरिए करते हैं। अब वैज्ञानिकों की टीम इसी कंपन पर शोध करके मनुष्यों के लिए हियरिंग एड तैयार करने का रास्ता निकालेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

छह माह तक रहते हैं जिंदा

वैज्ञानिकों के मुताबिक जयंती की आयु छह माह है। यह मई व जून में व्यस्क होते हैं। यह गुफाओं में ही पाए जाते हैं, बाहर नहीं निकलते। गुफाओं में तापमान 23 से 27 डिग्री के मध्य रहता है, यह उस तापमान को बनाए रखने में भी मदद करते हैं। ईको सिस्टम बनाए रखने में इनका बड़ा हाथ है। टीम का कहना है कि इस तरह के झींगुर की 11 प्रजातियां विश्वभर में हैं। इनमें से भारत में दो हैं। यह तीसरी प्रजाति अलग है और इसी के साथ विश्व में इस प्रकार के झींगुर की यह 12वीं प्रजाति बन गई। मालूम हो कि डॉ. रंजना जैसवारा ने इससे पहले बांसुरी की आवाज निकालने वाले झींगुरों को ढूंढा था।
 

झींगुर की 12वीं दुर्लभ प्रजाति छत्तीसगढ़ की गुफाओं में पाई गई है। इसका नाम जयंती रखा गया है। इसके संचार करने के तरीके पर शोध चल रहा है, जिसके जरिए हियरिंग एड आदि बनाए जा सकेंगे। - डॉ. रंजना जैसवारा, डीएसटी इंस्पायर फैकल्टी, जंतु विज्ञान विभाग

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed