बड़ा खुलासा: 1857 की क्रांति के सैनिकों के सिर में मारी गई थी गोली, जवानों में था नेपोलियन की सेना जैसा जोश
पंजाब यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के डॉ. जेएस सहरावत ने इस बारे में शोध किया था। उन्होंने 4500 दांतों और हड्डियों की जांच के बाद ये दावा किया है। 1857 के नरसंहार के बारे में ब्रिटिश लाइब्रेरी में रखी किताब ‘द क्राइसिस ऑफ पंजाब’ से खुलासा हुआ था। अमृतसर के अजनाला में कुएं से सैनिकों के अवशेष बरामद होने से पूरे देश में सनसनी मच गई थी।
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विस्तार
1857 की क्रांति में मारे गए सैनिकों के अवशेषों के शोध में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। वैज्ञानिकों ने साबित किया है कि सभी सैनिकों के सिर में गोली मारी गई थी। मारे गए सैनिक जांबाज थे, जिनमें फ्रांस के शासक नेपोलियन बोनापार्ट और हिटलर की सेना के सैनिकों जैसा जोश था। इनकी हड्डियों व दांतों में कैल्शियम व फास्फोरस की मात्रा अधिक मिली है। दांतों में हाइपो प्लेजिया बीमारी मिली है जो तनाव से होती है। तनाव अधिक होता है तो दांतों पर लकीरें बन जाती हैं। यह तनाव इनको किशोरावस्था में रहा है।
4500 दांतों की जांच
इन सभी तथ्यों का पंजाब यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के डॉ. जेएस सहरावत ने अपने शोध में खुलासा किया है। उन्होंने 282 सैनिकों के मिले 9500 दांतों में से 4500 दांतों की जांच की। हड्डियों की भी जांच की गई। इन सैनिकों के दांतों में ऐसे निशान नहीं मिले हैं जिसके जरिए यह कहा जा सकता है कि वे नॉन वेजिटेरियन थे। वेज और नॉनवेज खाने वाले लोगों के दांतों में दबाव का अंतर आ जाता है यानी नॉनवेज खाते समय दबाव अधिक लगता है, जिससे दांत घिसते हैं और नुकीले होते हैं।
उतरी थी सामने के दांतों की परत
यही नहीं इन सैनिकों के सामने के दो से तीन दांतों की परत भी उतरी हुई मिली है, जिससे साबित होता है कि यह बारूद व गोला की तार तोड़ते थे। शोध में इन सैनिकों के जोश की भी तुलना की गई। उसके लिए नेपोलियन बोनापार्ट व हिटलर की नाजी सेना के मारे गए सिपाहियों के मिले अवशेषों पर हुए शोध से मैच किया गया, जिसमें यह साबित हुआ कि इन सैनिकों में ताकत अपार थी। यह शोधपत्र ब्राजीलियन जर्नल ऑफ फॉरेंसिक साइंस, इंडियन जर्नल ऑफ डेंटल रिसर्च व पोलैंड के जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
ये है शोध की कहानी
पंजाब के अमृतसर की एक शोधार्थी वर्ष 2013 में इंग्लैंड पहुंची थीं। वह शोध के जुड़ी पुस्तकों के लिए ब्रिटिश लाइब्रेरी पहुंचीं। वहां उसे एक पुस्तक का शीर्षक ‘द क्राइसिस ऑफ पंजाब’ दिखा। पंजाब से जुड़े होने के कारण उसका आकर्षण किताब की ओर बढ़ा और उसने पूरी किताब पढ़ी। यह पुस्तक ब्रिटिश कमिश्नर हेनरी कूपर की ओर से लिखी गई थी, जो 1857 में अमृतसर का कमिश्नर था। इस पुस्तक में उन्होंने मई 1857 के नरसंहार के बारे में सबकुछ लिखा। उसी में लिखा था कि अमृतसर के अजनाला में उन्होंने 282 सैनिकों को मारा था। उनके शव एक कुएं में डाल दिए। शोधार्थी ने यह सब बातें जानी तो वह यहां अजनाला पहुंचीं। उनकी काफी कोशिशों के बाद कुआं खोदा गया और अप्रैल 2014 में इन सैनिकों के अवशेष मिले जिससे पूरे देश में सनसनी फैल गई। यह अवशेष शोध के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजी विभाग पहुंचे।
शोध के जरिए अब तक ये खुलासे हुए
- मारे गए सैनिक भारत के रहने वाले थे।
- सैनिकों की उम्र 19 साल से 34 वर्ष तक थी।
- महिलाएं व पुरुष इनमें कितने थे, यह पता लग चुका है।
- यह 1947 के दंगों में नहीं मारे गए, यह भी साबित हो चुका।
- इन सैनिकों का खानपान एक तरक से जैविक रहा। दांतों में सबसे कम रोग थे।
- इन सैनिकों के नायक का पता लग चुका है, जिसकी खोपड़ी इंग्लैंड में मिली थी। नायक उत्तर प्रदेश के कानपुर के आलम बेग थे।
- आलम बेग की खोपड़ी गिफ्ट के रूप में इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया को दी गई थी।
- मारे गए सैनिक 26 नेटिव बंगाल इंफ्रेंट्री बटालियन के थे।
- ब्रिटिश कमिश्नर हेनरी कूपर में जो अपनी किताब में लिखा वह शोध में सही साबित हुआ।
इंग्लैंड सरकार से सैनिकों के पते लिए जाएंगे
मारे गए सैनिकों के पते इंग्लैंड के पास हैं। वहां से सूची लेकर वैज्ञानिकों की टीम संबंधित क्षेत्रों में जाएगी। गांव के लोगों के डीएनए नमूने लेगी। साथ ही सैनिकों के अवशेष के आए डीएनए परिणामों से मैच किए जाएंगे और संबंधित सैनिकों के अवशेष उनके परिजनों को सौंपे जाएंगे ताकि उनका अंतिम संस्कार हो सके।
1857 की क्रांति में मारे गए सैनिक ताकतवर थे, जो हिटलर व नेपोलियन की सेना जैसा दमखम रखते थे। इनके दांतों में कुछ निशान मिले हैं जो इनेमल हाइपो प्लेजिया रोग के कारण होते हैं। यह तनाव के कारण होता है। बाकी अभी शोध जारी है। सैनिकों को न्याय दिलाना ही हमारा उद्देश्य है। -डॉ. जेएस सहरावत, प्रधान वैज्ञानिक, एंथ्रोपोलॉजी विभाग, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़