सम्मान: दुनिया के टॉप-20 फोरेंसिक वैज्ञानिकों में शामिल हुए पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रो. केवल कृष्ण, सूची में मिला 17वां स्थान
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी यूएसए की ओर से 2020 के शोध डाटा के आधार पर 76 से अधिक क्षेत्रों के वैज्ञानिकों को विषयवार व ओवरऑल रैंकिंग दी है। प्रो. केवल कृष्ण के नाम वर्ष 2020 तक 196 पब्लिकेशन थे।
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फुटप्रिंट के जरिए अपराधियों की पहचान उजागर करने वाले पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के प्रो. केवल कृष्ण का नाम दुनिया के टॉप-20 फोरेंसिक वैज्ञानिकों में शुमार हो गया है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी यूएसए की ओर से जारी फोरेंसिक वैज्ञानिकों की विश्व रैंकिंग में प्रो. केवल कृष्ण को 17वां स्थान मिला है। वहीं, एम्स जोधपुर (राजस्थान) के प्रो. तनुज कंचन को 47वीं रैंक जबकि कर्नाटक के एसडीएम कॉलेज ऑफ डेंटल साइंस एंड हॉस्पिटल में कार्यरत प्रो. असिथ बी आचार्य की 212वीं रैंक है। यह उपलब्धि हासिल कर डॉ. केवल कृष्ण देश में पहले नंबर के फोरेंसिक वैज्ञानिक बन गए हैं।
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हाल ही में अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों की विश्व रैंकिंग जारी की है। वर्ष 2020 के शोध डाटा के आधार पर 76 से अधिक क्षेत्रों के वैज्ञानिकों को विषयवार व ओवरऑल रैंकिंग दी है। हर क्षेत्र में एक लाख वैज्ञानिकों का चयन किया गया, जो टॉप दो फीसदी वैज्ञानिकों में आए हैं। यूनिवर्सिटी ने पहली सूची में 14163 फोरेंसिक वैज्ञानिकों को शामिल किया है। उसी सूची में पीयू के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के पूर्व चेयरमैन प्रो. केवल कृष्ण चमके हैं। उनकी रैंक पब्लिकेशन व साइटेशन के आधार पर निकाली गई है। वर्ष 2020 तक उनके नाम 196 पब्लिकेशन (अब तक 270) थे, जिनका प्रभाव क्षेत्र काफी ज्यादा रहा। प्रो. तनुज कंचन के नाम 396 व प्रो. असिथ बी आचार्य के नाम 32 पब्लिकेशन हैं।
इस तरह आए चर्चा में
विदेशों में फुटप्रिंट के जरिए अपराधी पकड़े जा रहे हैं। फोरेंसिक वैज्ञानिक उस पर काम करते हैं, लेकिन इस प्रणाली को भारत में अभी पूरी तरह मान्यता नहीं मिली। प्रो. केवल कृष्ण ने फुटप्रिंट के जरिए अपराधी की पहचान करने पर अधिक काम किया। उनके कार्य को काफी सराहा गया। अपराधी की पहचान वजन के आधार पर करना, सिर से लेकर पांव तक की हड्डियों की पहचान करके यह बताना कि उसकी उम्र कितनी होगी, लिंग क्या है और किस क्षेत्र का रहने वाला है। साथ ही कान, नाक समेत पूरे चेहरे की पहचान करना, उनके शोध में शामिल है। फिंगर प्रिंट पर भी उन्होंने शोध किए। उन्होंने कोरोना काल में सर्वाधिक 45 पब्लिकेशन प्रकाशित किए, जिसमें 18 शोधपत्र कोरोना पर थे।