{"_id":"63970acb4ca6d86ed37fdcbe","slug":"panjab-university-discovered-effective-drug-for-treatment-of-skin-cancer","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh: पीयू की वैज्ञानिक ने खोजी त्वचा कैंसर की दवा, वीड लैंटाना कमारा पौधे से तैयार दवा का ट्रायल सफल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh: पीयू की वैज्ञानिक ने खोजी त्वचा कैंसर की दवा, वीड लैंटाना कमारा पौधे से तैयार दवा का ट्रायल सफल
Mon, 12 Dec 2022 05:15 PM IST
निवेदिता वर्मा
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 12 Dec 2022 05:15 PM IST
सार
डॉ. नीलिमा ने बताया कि उन्होंने वीड लैंटाना कमारा से कैंसर को रोकने वाले घटक लैंटाडीन ए और बी को निकाला। इसके बाद लैब में उससे ईथर डेरिवेटर्स बनाए।
विज्ञापन
skin cancer
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ फॉर्मास्युटिकल साइंसेज की डॉ. नीलिमा ने त्वचा के कैंसर के इलाज के लिए प्रभावी दवा की खोज की है। इस दवा के कंप्यूटाइजेशन और जानवरों पर किए गए ट्रायल सफल रहे हैं। डॉ. नीलिमा और उनकी डीएसपी इंस्पायर शोधकर्ता मोनिका ने इस पर काम किया है और इनका सहयोग डिपार्टमेंट ऑफ बायोफिजिक्स के डॉ. अश्विनी कॉल ने किया है।
विज्ञापन
डॉ. नीलिमा ने बताया कि उन्होंने वीड लैंटाना कमारा से कैंसर को रोकने वाले घटक लैंटाडीन ए और बी को निकाला। इसके बाद लैब में उससे ईथर डेरिवेटर्स बनाए। इन ईथर डेरिवटर्स को जब प्राकृतिक लैंटाडीन ए और बी के साथ मिलान करके देखा गया तो ईथर डेरिवटर्स में कैंसर को ठीक करने के प्रभावी परिणाम सामने आए। शोध के दौरान पता चला कि इनमें स्किन कैंसर की रोकथाम के गुण हैं। इसके बाद इससे दवा बनाई गई, जिसके जानवरों पर हुए टेस्ट सफल हो गए हैं। इसके बाद इस शोध को इसे जर्नल साइंस डायरेक्ट में नवंबर के अंतिम सप्ताह में प्रकाशित किया गया।
विज्ञापन
पालमपुर से एकत्र किए पौधे
डॉ. नीलिमा ने बताया कि वीड लैंटाना कमारा के पौधे को पालमपुर (हिमाचल प्रदेश) से शोध के लिए एकत्रित किया गया था। ये पौधा चंडीगढ़ और देश के अन्य क्षेत्रों में भी पाया जाता है लेकिन पौधे के औषधीय गुण पर वहां के पर्यावरण का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है इसलिए स्थान के मुताबिक कई गुण कम या ज्यादा हो सकते हैं।
विज्ञापन