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डॉ. नीरा ग्रोवर मामले में याचिकाकर्ता पर जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 17 Feb 2014 07:07 PM IST
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पीयू के संगीत विभाग में डॉ. नीरा ग्रोवर की नियुक्ति के खिलाफ दाखिल याचिका को रद कर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरुण पल्ली ने याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस याचिका में साफ झलक रहा है कि याची पक्ष इससे पब्लिसिटी बटोरना चाहता है।
हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पंजाब ऐंड हरियाणा बार काउंसिल से ऐसी याचिकाओं पर रोक लगाने के लिए मंथन करने का सुझाव दिया। इसके साथ ही, खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता जेएस भट्टी वकील पर दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
अधिवक्ता जेएस भट्टी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चंडीगढ़ स्थित पंजाब युनिवर्सिटी के कुलपति की पत्नि डॉ. नीरा ग्रोवर की संगीत विभाग में पुर्न नियुक्ति को चुनौती दी थी।
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याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट में चल रहे एक अन्य मामले में पीयू की सिंडिकेट ने उनकी एक्सटेंशन न देने की बात की थी। लेकिन बीती जनवरी में सिंडिकेट ने उनकी नियुक्ति को फिर से हरी झंडी दे दी।
दाखिल याचिका में कहा गया कि यह युनिवर्सिटी नियमों का उल्लंघन है और अपनों को फायदा पहुंचाने के लिए सिंडिकेट द्वारा निर्णय लिए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से सिंडिकेट के इन आदेशों को रद करने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया था।
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान याचिका के औचित्य पर सवाल उठाते हुए याची पक्ष से इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश जारी किए थे। सोमवार को सुनवाई के दौरान याची पक्ष अपनी दलीलाें से खंडपीठ को संतुष्ट नहीं कर सके।
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मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरुण पल्ली ने याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस याचिका में साफ झलक रहा है कि याची पक्ष इससे पब्लिसिटी बटोरना चाहता है।
हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पंजाब ऐंड हरियाणा बार काउंसिल से ऐसी याचिकाओं पर रोक लगाने के लिए मंथन करने का सुझाव दिया। इसके साथ ही, खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता जेएस भट्टी वकील पर दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
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अधिवक्ता जेएस भट्टी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चंडीगढ़ स्थित पंजाब युनिवर्सिटी के कुलपति की पत्नि डॉ. नीरा ग्रोवर की संगीत विभाग में पुर्न नियुक्ति को चुनौती दी थी।
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याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट में चल रहे एक अन्य मामले में पीयू की सिंडिकेट ने उनकी एक्सटेंशन न देने की बात की थी। लेकिन बीती जनवरी में सिंडिकेट ने उनकी नियुक्ति को फिर से हरी झंडी दे दी।
दाखिल याचिका में कहा गया कि यह युनिवर्सिटी नियमों का उल्लंघन है और अपनों को फायदा पहुंचाने के लिए सिंडिकेट द्वारा निर्णय लिए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से सिंडिकेट के इन आदेशों को रद करने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया था।
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान याचिका के औचित्य पर सवाल उठाते हुए याची पक्ष से इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश जारी किए थे। सोमवार को सुनवाई के दौरान याची पक्ष अपनी दलीलाें से खंडपीठ को संतुष्ट नहीं कर सके।