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फ्लाइट्स रद्द, डोंट वरी! ये लिजिए गुड न्यूज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 16 Apr 2014 12:04 PM IST
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अगर आपकी फ्लाइट्स बिना पूर्व सूचना के देरी से आती है या फिर रद्द होती है तो विमानन कंपनी को हर्जाना देना होगा। यह हर्जाना दो हजार रुपये से लेकर चार हजार रुपये तक हो सकता है। फ्लाइट लेट होने की सूरत पर आपका ख्याल रखना भी विमानन कंपनी की ही जिम्मेदारी होगी।
हां, ऐसी स्थिति में आपकी बात कोई भी विमान कंपनी नहीं सुनती तो आप संबंधित एयरपोर्ट के डायरेक्टर या फिर डीजीसीए को अपनी स्थिति बता सकते हैं। यह काम आप अपने मोबाइल से भी कर सकेंगे।
ऐसी स्थिति अक्सर आती है जब बिना पूर्व सूचना के विमान कैंसल कर दिए जाते हैं। ऐसी ही स्थिति के लिए एयरलाइंस को स्पष्ट निर्देश हैं कि यात्रियों को यात्रा की अपडेट अवश्य दें।
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कोई फ्लाइट रदद की जाती है और इसकी पूर्व सूचना यात्री को दें। यदि यात्री चेकइन कर लेता है और उसके बाद विमान कैंसल या देरी से आने की सूचना हो तो दो घंटे की ज्यादा देरी होने पर यात्रियों की सुविधा का ध्यान भी विमान कंपनी के प्रतिनिधियों को रखना होगा।
डीजीसीए के नियमों के अनुसार, यदि पैसेंजर को यात्रा के दौरान कोई परेशानी है तो विमानन कंपनी उत्तरदायी होगी। डीजीसीए के हाल के आदेश के अनुसार यदि फ्लाइट्स की देरी हो रही है तो दो से लेकर चार हजार रुपये तक का हर्जाना विमानन कंपनी को भुगतना होगा।
इसमें स्थिति यह भी है कि फ्लाइट रद्द होने पर यात्री के लिए वैकल्पिक इंतजाम विमानन कंपनी को करना होगा। यदि यात्री सुविधा नहीं लेना चाहता है तो फिर विमान कंपनी की ड्यूटी खत्म हो जाती है।
डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन के अनुसार एयर ट्रैफिक और यात्रियों की संख्या से ऐसा हुआ है। डीजीसीए ने पाया है कि बिना सूचना फ्लाइट्स रद होने के मामले बढ़े हैं। इसी को देखते हुए नियम बनाए हैं।
इस स्थिति में राहत नहीं
प्राकृतिक आपदा, सिविल राइट्स, फ्लड और सरकारी नियमों के कारण यदि कोई फ्लाइट रद्द की जाती है तो विमानन कंपनी उत्तरदायी नहीं होगी। मैट्रोलाजिकल कंडीशन, एटीसी और सिक्योरिटी रिस्क के मामले में भी एयरलाइंस उत्तरदायी नहीं होंगी।
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हां, ऐसी स्थिति में आपकी बात कोई भी विमान कंपनी नहीं सुनती तो आप संबंधित एयरपोर्ट के डायरेक्टर या फिर डीजीसीए को अपनी स्थिति बता सकते हैं। यह काम आप अपने मोबाइल से भी कर सकेंगे।
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ऐसी स्थिति अक्सर आती है जब बिना पूर्व सूचना के विमान कैंसल कर दिए जाते हैं। ऐसी ही स्थिति के लिए एयरलाइंस को स्पष्ट निर्देश हैं कि यात्रियों को यात्रा की अपडेट अवश्य दें।
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कोई फ्लाइट रदद की जाती है और इसकी पूर्व सूचना यात्री को दें। यदि यात्री चेकइन कर लेता है और उसके बाद विमान कैंसल या देरी से आने की सूचना हो तो दो घंटे की ज्यादा देरी होने पर यात्रियों की सुविधा का ध्यान भी विमान कंपनी के प्रतिनिधियों को रखना होगा।
डीजीसीए के नियमों के अनुसार, यदि पैसेंजर को यात्रा के दौरान कोई परेशानी है तो विमानन कंपनी उत्तरदायी होगी। डीजीसीए के हाल के आदेश के अनुसार यदि फ्लाइट्स की देरी हो रही है तो दो से लेकर चार हजार रुपये तक का हर्जाना विमानन कंपनी को भुगतना होगा।
इसमें स्थिति यह भी है कि फ्लाइट रद्द होने पर यात्री के लिए वैकल्पिक इंतजाम विमानन कंपनी को करना होगा। यदि यात्री सुविधा नहीं लेना चाहता है तो फिर विमान कंपनी की ड्यूटी खत्म हो जाती है।
डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन के अनुसार एयर ट्रैफिक और यात्रियों की संख्या से ऐसा हुआ है। डीजीसीए ने पाया है कि बिना सूचना फ्लाइट्स रद होने के मामले बढ़े हैं। इसी को देखते हुए नियम बनाए हैं।
इस स्थिति में राहत नहीं
प्राकृतिक आपदा, सिविल राइट्स, फ्लड और सरकारी नियमों के कारण यदि कोई फ्लाइट रद्द की जाती है तो विमानन कंपनी उत्तरदायी नहीं होगी। मैट्रोलाजिकल कंडीशन, एटीसी और सिक्योरिटी रिस्क के मामले में भी एयरलाइंस उत्तरदायी नहीं होंगी।