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लापरवाही: पंचकूला के सरकारी अस्पताल ने डेंगू मरीज के बताए आठ हजार प्लेटलेट्स, निजी लैब में जांच करवाने पर निकले 38 हजार

Fri, 22 Oct 2021 01:48 PM IST
प्रमोद कुमार वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: प्रमोद कुमार Updated Fri, 22 Oct 2021 01:48 PM IST
सार

डेंगू मरीजों के इलाज में लापरवाही बरती जा रही है। ताजा मामला पंचकूला के सरकारी अस्पताल में सामने आया है। जहां एक डेंगू मरीज के पहले आठ हजार प्लेटलेट्स बताए गए। परिजनों को शक हुआ तो उन्होंने निजी लैब में जांच करवाई, जिसमें 38 हजार निकले। यह सब मरीजों की जान पर भारी पड़ सकता है।

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Panchkulas government hospital was negligent in the treatment of dengue patient
पंचकूला सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्लेटलेट्स काउंट को लेकर की जा रही जांच में अलग-अलग आ रही रिपोर्ट डेंगू के मरीजों के लिए घातक सिद्ध हो रही हैं। विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग के साथ प्रशासन को भी सचेत होना होगा अन्यथा जिसे जरूरत नहीं है, उसे भी प्लेटलेट्स चढ़ाया जाना जारी रहेगा, वहीं, जरूरत वाला मरीज इसकी कमी से मरता रहेगा। इसका ताजा उदाहरण सामने आया है। पंचकूला निवासी 28 साल की सुनीता को डेंगू के कारण सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल में 18 अक्तूबर को भर्ती किया गया। 19 अक्तूबर को उनकी प्लेटलेट्स काउंट जांच की गई, जिसमें उनका प्लेटलेट्स काउंट आठ हजार आया। रिपोर्ट देखते ही डॉक्टर ने तत्काल प्लेटलेट्स का इंतजाम करने का निर्देश दिया।
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पंचकूला की निजी लैब की रिपोर्ट।
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परिजनों को रिपोर्ट पर हुई शंका
मरीज के परिजनों को उस रिपोर्ट पर कुछ शंका हुई, क्योंकि सुनीता को बस बुखार था। उन्होंने 20 अक्तूबर को एक निजी लैब में दोबारा उनकी प्लेटलेट्स काउंट कराई। रिपोर्ट में प्लेटलेट्स काउंट 38,000 आया। परिजनों ने सिविल अस्पताल में रिपोर्ट दिखाई। उसके बाद सुनीता का सामान्य इलाज किया गया। सुनीता की 21 अक्तूबर शाम को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। यह महज एक उदाहरण है।

डॉक्टर की सलाह लेकर करवाएं इलाज
विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज कराएं, नहीं तो जान आफत में पड़ सकती है। पीजीआई ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. रतिराम शर्मा का कहना है कि प्लेटलेट्स काउंट कम या ज्यादा होने के बजाय मरीज की मौजूदा स्थिति के आकलन के आधार पर इलाज किया जाना चाहिए, क्योंकि कई बार 10 हजार काउंट पर भी मरीज सामान्य रहता है और 80 हजार काउंट पर भी हेमरेजिंग या शॉक सिंड्रोम का शिकार हो जाता है।

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डेंगू के प्रकार जानना जरूरी
1. क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार : यह बुखार 5 से 7 दिन तक रहता है। इसके बाद मरीज ठीक हो जाता है। इसके प्रमुख लक्षणों में ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार होना, सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है, बहुत कमजोरी लगना, भूख न लगना, जी मिचलना और मुंह का स्वाद खराब होना, गले में हल्का दर्द होना, शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज होना शामिल है।

2. डेंगू शॉक सिंड्रोम : डेंगू बुखार के लक्षणों के साथ-साथ नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उल्टी में खून आना, स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे या बड़े निशान पड़ जाना, डेंगू शॉक सिंड्रोम के मुख्य लक्षण हैं।

3. डेंगू हेमरेजिंग : सामान्य डेंगू बुखार के लक्षणों के साथ-साथ शॉक की अवस्था के भी कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। इसमें मरीज को बेचैनी होना, तेज बुखार के बावजूद उसकी त्वचा का ठंडा होना, मरीज का धीरे-धीरे बेहोश होना, मरीज की नाड़ी कभी तेज और कभी धीरे चलने लगती है। उसका ब्लड प्रेशर एकदम लो हो जाना।

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इलाज में न बरतें देरी
डॉ. बेदी का कहना है कि इन तीनों में से डेंगू हेमरेजिंग बुखार और डेंगू शॉक सिंड्रोम का डेंगू सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। साधारण डेंगू बुखार अपने आप ठीक हो जाता है और इससे जान को खतरा नहीं होता। लेकिन अगर किसी को अन्य दो प्रकार का डेंगू है, तो उसे इलाज में एक पल के लिए भी देरी नहीं करनी चाहिए।

कब दिखती है बीमारी
मादा एडीज मच्छर के काटने के 3-5 दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण दिखने लगते हैं। शरीर में बीमारी पनपने की मियाद 3 से 10 दिनों की भी हो सकती है।

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ये टेस्ट जरूर करवाएं
अगर तेज बुखार हो, जोड़ों में तेज दर्द हो या शरीर पर रैशेज हों, तो पहले दिन ही डेंगू का टेस्ट करा लेना चाहिए। डेंगू की जांच के लिए शुरुआत में एंटीजन ब्लड टेस्ट (एनएस 1) किया जाता है, जिसमें डेंगू किस प्रकार का है यह पता चल जाता है।

गंभीर मर्ज वाले रहे सचेत
प्रो. रतिराम शर्मा का कहना है कि पहले से किसी गंभीर बीमारी जैसे मधुमेह, बीपी से ग्रस्त लोगों के लिए डेंगू कोरोना की ही तरह घातक है। इस स्थिति में उन्हें ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है, क्योंकि प्लेटलेट्स काउंट का कम होना या हेमरेजिंग या शॉक सिंड्रोम में जाना काफी हद तक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है।

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डेढ़ से चार लाख तक का काउंट बेहतर
प्रो. शर्मा के अनुसार जिनके भी शरीर में डेढ़ लाख से चार लाख तक प्लेटलेट्स काउंट हो, वह अपना प्लेटलेट्स दान कर सकता है। जहां तक डेंगू के मरीजों की बात है, तो उनमें 20 हजार से कम प्लेटलेट्स काउंट की स्थिति में गहन देखरेख की जरूरत होती है, ताकि ये स्तर और नीचे न जा सके।

हाईड्रेशन को रखें मजबूत
डेंगू के सामान्य बुखार के दौरान भी अपने शरीर में हाईड्रेशन सिस्टम को मजबूत रखें, क्योंकि प्लेटलेट्स कम होने में इसका अहम रोल है। इसे मजबूत करने के लिए ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लें। जैसे नारियल पानी, जूस, सूप, नींबू पानी।

प्लेटलेट्स काउंट की अलग-अलग रीडिंग आने की समस्या पर रोक के लिए सरकारी और निजी लैब में भी गुणवत्ता युक्त सुविधा देने पर जोर देना चाहिए। कई बार मशीन के पैरामीटर सेटिंग में हो रही चूक के कारण भी रीडिंग गड़बड़ आती है।
-प्रो. रतिराम शर्मा, प्रभारी, पीजीआई ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग

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डेंगू की ये चरम की स्थिति है। इस बार डेंगू ज्यादा घातक नजर आ रहा है। लेकिन अपने पास इसकी पुष्टि का कोई माध्यम नहीं है। क्योंकि देश में प्रिवेंटिव के बजाय क्यूरेटिव हेल्थ रिसर्च पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। पब्लिक हेल्थ और ऐपेडोमोलॉजी विभाग को मिलकर काम करने की जरूरत है, ताकि मच्छर या किसी भी ऐसे माध्यम को ताकतवर होने का अवसर न मिले।
-डॉ. आरएस बेदी, सलाहकार, वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन
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