{"_id":"31901ff68950e0d554de3fcd2ae83d62","slug":"panchkula-yamunanagar-highway-forlening-not-yet","type":"story","status":"publish","title_hn":"अभी नहीं होगी इस हाईवे की फोरलेनिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अभी नहीं होगी इस हाईवे की फोरलेनिंग
अमर उजाला ब्यूरो, पंचकूला
Updated Wed, 12 Mar 2014 10:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एनएच-73 पर पंचकूला से यमुनानगर करीब 107 किलोमीटर की सड़क को फोरलेन बनाने के प्रोजेक्ट से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने हाथ खींच लिया है।
एनएचएआई ने हरियाणा सरकार को पत्र भेजकर कई कमियों का हवाला देते इस परियोजना के लिए किए गए समझौते को रद कर दिया है।
माना जा रहा है कि दो राजनेताओं के बीच आपसी खींचतान फोर लेन प्रोजेक्ट में बाधा बनी। बहरहाल, अब मंत्रालय के आदेश के बाद ही यह परियोजना दोबारा सिरे चढ़ सकेगी।
पंचकूला से यमुनानगर हाईवे को फोरलेन बनाने के लिए 30 जुलाई 2012 को समझौता हुआ था और इस पर 934.39 करोड़ रुपये खर्च होेने थे।
इस परियोजना को पूरा करने के लिए ढाई साल का वक्त दिया गया था, लेकिन वाइल्ड लाइफ से क्लीयरेंस मिलने में देरी, जमीन का पजेशन में देरी, बिजली ट्रांसमिशन लाइनों की शिफ्टिंग, मुआवजे का अधूरा भुगतान और खनन विभाग द्वारा सड़क निर्माण के लिए जरूरी रोड़ी उपलब्ध नहीं कराने को आधार बनाकर प्राधिकरण ने समझौता रद कर दिया।
विज्ञापन
30 जुलाई, 2012 को हुए समझौते के तहत मेसर्स गैमॉन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के साथ एनएचएआई ने करार किया था। शर्तों के तहत एनएचएआई की ओर से 80 फीसदी भूमि उपलब्ध करवाना था, लेकिन पंचकूला से रामगढ़ के बीच 20 किलोमीटर के दायरे में वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस मिलने में काफी देरी हो गई।
नतीजतन, कंसेसनर ने इस समझौते को रद करने की सिफारिश कर दी। इस दौरान वन क्षेत्र में पेड़ों का वैल्यूएशन भी नहीं कराया गया। साथ ही कई और औपचारिकताओं को पूरी करने में देरी की गई।
दो टोल प्लाजा बनाने का था प्रस्ताव
फोरलेन किए जाने से न केवल रास्ता तीन किलोमीटर कम हो जाता, बल्कि रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले करीब 25 हजार फोर व्हीलर चालकों और बड़े वाहन चालकों को भी काफी राहत मिलती। इस मार्ग पर दो जगहों पर टोल प्लाजा बनाने का प्रस्ताव था।
यह था रूट
पंचकूला से रामगढ़-बरवाला-रायपुररानी होते हुए नारायणगढ़-अंबाला-साहा और जगाधरी होते हुए यमुनानगर तक सड़क को फोरलेन बनाना था।
मंत्रालय के फैसले के बाद ही आगे कोई कदम उठाया जाएगा।
केबी नारंग, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी
विज्ञापन
एनएचएआई ने हरियाणा सरकार को पत्र भेजकर कई कमियों का हवाला देते इस परियोजना के लिए किए गए समझौते को रद कर दिया है।
माना जा रहा है कि दो राजनेताओं के बीच आपसी खींचतान फोर लेन प्रोजेक्ट में बाधा बनी। बहरहाल, अब मंत्रालय के आदेश के बाद ही यह परियोजना दोबारा सिरे चढ़ सकेगी।
विज्ञापन
पंचकूला से यमुनानगर हाईवे को फोरलेन बनाने के लिए 30 जुलाई 2012 को समझौता हुआ था और इस पर 934.39 करोड़ रुपये खर्च होेने थे।
इस परियोजना को पूरा करने के लिए ढाई साल का वक्त दिया गया था, लेकिन वाइल्ड लाइफ से क्लीयरेंस मिलने में देरी, जमीन का पजेशन में देरी, बिजली ट्रांसमिशन लाइनों की शिफ्टिंग, मुआवजे का अधूरा भुगतान और खनन विभाग द्वारा सड़क निर्माण के लिए जरूरी रोड़ी उपलब्ध नहीं कराने को आधार बनाकर प्राधिकरण ने समझौता रद कर दिया।
विज्ञापन
30 जुलाई, 2012 को हुए समझौते के तहत मेसर्स गैमॉन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के साथ एनएचएआई ने करार किया था। शर्तों के तहत एनएचएआई की ओर से 80 फीसदी भूमि उपलब्ध करवाना था, लेकिन पंचकूला से रामगढ़ के बीच 20 किलोमीटर के दायरे में वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस मिलने में काफी देरी हो गई।
नतीजतन, कंसेसनर ने इस समझौते को रद करने की सिफारिश कर दी। इस दौरान वन क्षेत्र में पेड़ों का वैल्यूएशन भी नहीं कराया गया। साथ ही कई और औपचारिकताओं को पूरी करने में देरी की गई।
दो टोल प्लाजा बनाने का था प्रस्ताव
फोरलेन किए जाने से न केवल रास्ता तीन किलोमीटर कम हो जाता, बल्कि रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले करीब 25 हजार फोर व्हीलर चालकों और बड़े वाहन चालकों को भी काफी राहत मिलती। इस मार्ग पर दो जगहों पर टोल प्लाजा बनाने का प्रस्ताव था।
यह था रूट
पंचकूला से रामगढ़-बरवाला-रायपुररानी होते हुए नारायणगढ़-अंबाला-साहा और जगाधरी होते हुए यमुनानगर तक सड़क को फोरलेन बनाना था।
मंत्रालय के फैसले के बाद ही आगे कोई कदम उठाया जाएगा।
केबी नारंग, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी