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सॉरी पंचकूला, ये सड़कें अब ऐसी ही रहेंगी
अनिल त्रिवेदी /अमर उजाला, पंचकूला
Updated Wed, 04 Mar 2015 04:06 PM IST
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दाएं-बाएं करके चलने के बावजूद आप गड्ढों से बच नहीं सकते। हां, इस चक्कर में किसी हादसे से बच जाएं तो सौभाग्य समझिए दरअसल अब इन सड़कों पर वोट नहीं बिखरे हैं। निगम चुनाव लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव में ये बटोर लिए गए हैं।
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चंडीगढ़ से पंचकूला में प्रवेश करते ही सड़क आपको आगाह कर देती है कि अब जरा संभलकर चलें। यह पंचकूला है जनाब। हाउसिंग बोर्ड चौक से शहर में घुसते ही नाले के किनारे बाईं ओर लगा बोर्ड ‘वेलकम टु पंचकूला’ दरअसल आपको मुंह चिढ़ाता है।
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सड़क की हालत अचानक आपके वाहन की स्पीड थाम देती है। और आप ब्रेक पर जोर देते हुए लड़खड़ाते, दूसरों से बचते-बचाते वाहन आगे बढ़ाते हैं। आप नाक-भौं सिकोड़ते हैं तो सिकोड़ें, सड़क की बला से? पंचकूला की सड़कें इन दिनों कराह रही हैं। सड़कों की ऊपरी परत उधड़ चुकी है।
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सीने पर गड्ढों के रूप में मौजूद जख्म लगातार गहरे होते जा रहे हैं। हाल की बेमौसमी बारिश ने सड़कों को और जख्मी किया है। किसी भी सड़क पर निकल जाइए एक सा नजारा है। वाहन को खूब दाएं-बाएं करके चलने के बावजूद आप गड्ढों से बच नहीं सकते। हां, अगर बचने-बचाने के चक्कर में किसी हादसे से बच जाएं तो सौभाग्य समझिए।
सड़कों की बदहाली से नगर निगम बेखबर है। हुडा प्रशासन आंख मूंदे हुए है। सरकार खामोश बैठी है। सड़कों से गुजरने वाले दिक्कतें झेल रहे हैं। मन ही मन बड़बड़ाते हैं, सरकार को कोसते हैं। सुरक्षित घर पहुंचकर खैर मनाते हैं। सेक्टरों की अंदरूनी सड़कें कुछ हद तक ठीक हैं लेकिन बाहर की सड़कों का बुरा हाल है।
अमरटेक्स चौराहा, सेक्टर 11-15 का गोल चौक, लेबर चौक, सेक्टर 14-15 का रोड, सेक्टर 9-5 की सड़क के गड्ढे प्रशासन को नहीं दिखते हैं। नगर निगम और विधानसभा चुनाव के पहले सड़कों को चमकाया जा रहा था। चुनाव के बाद सन्नाटा छा गया है। सड़कों की ओर देखने की किसे फुरसत है।
विडंबना है कि जिस पार्टी का विधायक है, उसी का सांसद। प्रदेश में उसी की सरकार है और केंद्र में भी सत्ता उसी की है। इसके बावजूद सड़कें बनाना तो दूर अब उन पर पैबंद भी नहीं लगते। गड्ढे चौड़े हो रहे हैं। नुमाइंदे सो रहे हैं।
दरअसल अब इन सड़कों पर वोट नहीं बिखरे हैं। निगम चुनाव, लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव में ये बटोर लिए गए हैं। अब जब वोट बिखरेंगे तो देखा जाएगा। लेकिन जनता समझती है। ताज्जुब नहीं कि बदहाल सड़कों के मुद्दे पर जनता इन्हीं सड़कों पर उतर आए।
आखिर पानी सिर से ऊपर जा रहा है। क्या प्रशासन, मेयर, विधायक, सांसद और प्रदेश सरकार जनता की अकुलाहट देख-सुन पा रहे हैं? अगर नहीं तो पंचकूला की सड़कों को कभी गौर से देखिए और सोचिए कि क्या ये चलने लायक हैं?