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हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद हटाए फड़ी वाले, पंचकूला एमसी को नोटिस
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 21 Dec 2016 08:35 PM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंचकूला में विभिन्न स्थानों से रेहड़ी-फड़ी लगाने वाले 106 फुटपाथ वर्करों को हटाने के खिलाफ दाखिल स्वरोजगार बचाओ संघर्ष समिति की याचिका पर हरियाणा सरकार सहित, हुडा के सचिव और नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी किया है। मामले में 28 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा गया है।
पंचकूला के रेहड़ी-फड़ी लगाने वालों की यूनियन रेहड़ी-फड़ी रोजगार बचाओ संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने सदस्यों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की थी। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए गत वर्ष नवंबर माह में हरियाणा सरकार सहित हुडा और नगर निगम को आदेश दिए थे कि जब तक तय प्रावधानों के तहत इन सभी रेहड़ी-फड़ी वालों का सर्वे नहीं हो जाता है, यूनियन के किसी भी सदस्य को उसकी जगह से नहीं हटाया जाए। याची ने आरोप लगाया कि हटाए जाने पर लगी रोक के बावजूद याची यूनियन के सदस्यों का न तो सर्वे किया गया और न ही लाइसेंसिंग के लिए कोई कार्य किया जा रहा है। इसके उलट याची को उनकी जगह से हटाया जा रहा है।
रेहड़ी-फड़ी रोजगार बचाओ संघर्ष समिति ने एडवोकेट राजीव धवन के जरिये हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया है कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2014 में रेहड़ी-फड़ी लगा कर अपनी आजीविका चलाने वाले लोगों के अधिकारों को संरक्षित करने के लिए द स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट-2014 लागू किया था। देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इनके कल्याण के लिए नीति बनाये जाने के आदेश दिए थे। आदेश दिए गए थे कि वे स्ट्रीट वेंडिंग कमेटी का गठन कर सर्वे करवाएं और इनके लिए एक जगह तय करें। सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों के बावजूद हरियाणा में इस एक्ट को लागू ही नहीं किया गया।
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पंचकूला के रेहड़ी-फड़ी लगाने वालों की यूनियन रेहड़ी-फड़ी रोजगार बचाओ संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने सदस्यों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की थी। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए गत वर्ष नवंबर माह में हरियाणा सरकार सहित हुडा और नगर निगम को आदेश दिए थे कि जब तक तय प्रावधानों के तहत इन सभी रेहड़ी-फड़ी वालों का सर्वे नहीं हो जाता है, यूनियन के किसी भी सदस्य को उसकी जगह से नहीं हटाया जाए। याची ने आरोप लगाया कि हटाए जाने पर लगी रोक के बावजूद याची यूनियन के सदस्यों का न तो सर्वे किया गया और न ही लाइसेंसिंग के लिए कोई कार्य किया जा रहा है। इसके उलट याची को उनकी जगह से हटाया जा रहा है।
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रेहड़ी-फड़ी रोजगार बचाओ संघर्ष समिति ने एडवोकेट राजीव धवन के जरिये हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया है कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2014 में रेहड़ी-फड़ी लगा कर अपनी आजीविका चलाने वाले लोगों के अधिकारों को संरक्षित करने के लिए द स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट-2014 लागू किया था। देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इनके कल्याण के लिए नीति बनाये जाने के आदेश दिए थे। आदेश दिए गए थे कि वे स्ट्रीट वेंडिंग कमेटी का गठन कर सर्वे करवाएं और इनके लिए एक जगह तय करें। सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों के बावजूद हरियाणा में इस एक्ट को लागू ही नहीं किया गया।
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