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पंचकूलाः 15 साल से HMT के हाल खस्ता, बंद हो चुकी 25 यूनिटें
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Mon, 23 Nov 2015 02:45 PM IST
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डेढ़ दशक पहले देशभर में बेस्ट एचएमटी एनसीलियरी स्टेट का खिताब हासिल कर चुकी एचएमटी का अब समय खराब चल रहा है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि 15 साल में 40 में से करीब 25 एनसीलियरी बंद हो चुकी हैं और इन्हें दोबारा खड़ा करने के लिए एचएमटी जैसी किसी दूसरी मदर यूनिट की दरकार है।
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1977-1978 में जो यूनिट्स शुरू हुईं थीं वे 2000 तक बेहतर ढंग से काम करती नजर आ रही थी, लेकिन पिछले एक दशक में लगातार ऐसे हालात पैदा हुए कि न सिर्फ खुद एचएमटी पिंजौर की हालत कमजोर होती चली गई, बल्कि इसका सबसे बुरा असर मजबूती से खड़ी पंचकूला की करीब 40 एनसीलियरी पर भी पड़ा।
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नतीजतन 15 वर्ष में करीब 25 इनसीलियरी बंद हो चुकी हैं और शेष 15 से 20 भी इधर-उधर के काम के दम पर ही चल रही हैं। उद्योगपतियों के अनुसार क्षमता और बेहतर इंजीनियरों के बावजूद पंचकूला के इन इंडस्ट्रियल यूनिट का इस हालात में पहुंचना चिंताजनक है।
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एचएमटी की मैनेजमेंट बदली जानी चाहिए
एचएमटी एनसीलियरी इंटरप्रेन्योर एसोसिएशन के अध्यक्ष डीसी जैन के अनुसार आज भी एचएमटी को वैसे ही खड़ा किया जा सकता है, जिसके लिए वह डेढ़ दशक पहले जानी जाती थी, लेकिन इससे पहले एचएमटी की मैनजमेंट को बदलने की आवश्यकता है और इसी के साथ सरकार को एचएमटी के लिए फंड रिलीज करना चाहिए।
प्राइवेट से नहीं ले पाए टक्कर
एचएमटी एनसीलियरी इंटरप्रेन्योर एसोसिएशन के ज्वाइंट सेक्रेटरी भूषण ने कहा कि एचएमटी वही है, जिसके ट्रैक्टर की डिलीवरी के लिए लंबी कतारें लगती थीं। इसके बुरे दिन इस कारण आए क्योंकि यह प्राइवेट सेक्टर से टक्कर नहीं ले सकी। सोनालिका, पंजाब ट्रैक्टर और हिमाचल में ट्रैक्टर ब्रांड आ गए। एचएमटी में उस समय की परिस्थितियों के मुताबिक मार्केटिंग नहीं की गई।
खर्चों पर नहीं लगा अंकुश
एचएमटी एनसीलियरी इंटरप्रेन्योर एसोसिएशन के महासचिव अशोक सिंघल ने कहा कि एचएमटी पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग है, जिसकी वजह से खर्च ही ज्यादा हो चुके थे कि उन पर अंकुश लगाना नामुमकिन हो गया है। मार्केट में कंपटीशन होने के कारण प्रोडक्शन कम होता चला गया, जिसकी वजह से यह यूनिट खत्म हो गई।
एचएमटी जैसी नई मदर यूनिट खड़ी हो
उद्योगपति सीबी गोयल के अनुसार अगर सरकार की मदद मिले तो इनसीलियरी की छोड़ी बड़ी यूनिटों को खड़ा करने में मदद मिल सकती है। उनके मुताबिक वर्तमान में जो हालात है, उनमें सुधार तभी हो सकता है, जब पंचकूला में एचएमटी जैसी कोई मदर यूनिट खड़ी की जाए। ऐसी यूनिट के आने के बाद ही पंचकूला के ठप हो रही छोटी बड़ी यूनिटों के लिए बिजनेस का स्कोप तैयार होगा।