चंडीगढ़ः आदेश का पालन नहीं करने पर पंचकूला निगमायुक्त को कोर्ट में छह घंटे बैठाया
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आदेश का पालन करने में देरी करने वाले पंचकूला नगर निगम आयुक्त को सोमवार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। हाईकोर्ट ने जहां उन्हें सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक कोर्ट में बैठाए रखा। वहीं देरी के लिए कड़ी फटकार भी लगाई।
इस दौरान उन्होंने कहा कि वह मुआवजे का भुगतान करने के पक्ष में थे और उन्होंने वकील को बहस के लिए नहीं कहा था। हाईकोर्ट ने इस पर उन्हें अगली सुनवाई पर हलफनामा सौंपने के आदेश दिए हैं।
सकेतड़ी के एक निवासी प्रदीप सिंह ने वर्ष 2017 में अपने घर में सीवर के पानी के भरे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के बार-बार दिए आदेश पर भी कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त पर 5 लाख रुपये जुर्माना लगा इस राशि का याची को भुगतान करने के आदेश दिए थे। मई 2017 के आदेश के बावजूद राशि अदा नहीं की गई।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने निगम आयुक्त के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना को लेकर याचिका दायर कर दी थी। 09 अप्रैल को हाईकोर्ट ने इस अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए निगम आयुक्त को अप्रैल के अंत तक हर हाल में 5 लाख रुपये की जुर्माना राशि जमा करवाने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि राशि नहीं जमा करवाई गई तो जुर्माना और बढ़ा दिया जाएगा।
पिछली सुनवाई पर बताया गया था कि अभी तक जुर्माने की राशि अदा नहीं की गई है। हाईकोर्ट में केवल 5 लाख के ड्राफ्ट की कॉपी पेश की गई जिस पर हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर सोमवार को उन्हें हाईकोर्ट में पेश करने के आदेश जारी कर दिए थे। बाद में सरकारी वकील ने आयुक्त को पेश होने के लिए समय दिए जाने की अपील की।
जब तक निगम आयुक्त पहुंचे तब तक अदालत का समय समाप्त हो गया था। लिहाजा हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त को हर हाल में सोमवार को हाईकोर्ट में पेश होकर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए थे। सोमवार को वह सुबह ही कोर्ट में पहुंच गए और हाईकोर्ट में उन्हें पूरा दिन बैठाए रखा गया, जिसके बाद शाम 4 बजे उन्हें सुना गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह राशि के भुगतान के पक्ष में थे और उन्होंने अपने वकील को बहस के लिए नहीं कहा था। हाईकोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए इस बारे में हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं।