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हरियाणा: प्रदेश में पंचायत चुनाव जल्द होने के आसार नहीं, चुनाव याचिकाओं पर सुनवाई टली

Tue, 18 Jan 2022 10:47 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 18 Jan 2022 10:47 PM IST
सार

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने याची पक्ष को मोहलत देते हुए याचिकाओं पर सुनवाई आठ फरवरी तक स्थगित कर दिया है।

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Panchayat elections are not likely to happen soon in Haryana hearing on election petitions postponed
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा पंचायत चुनाव में आरक्षण के प्रावधान में विसंगतियों को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर एक बार फिर से सुनवाई टल गई है। ऐसे में अब हाल फिलहाल में पंचायत चुनाव की संभावना नहीं रह गई, क्योंकि हाईकोर्ट में सरकार पहले कह चुकी थी कि निकट भविष्य में चुनाव नहीं होंगे। इसके बाद सरकार ने जल्द चुनाव की अनुमति मांगी थी जिस पर हाईकोर्ट ने सरकार को राहत नहीं दी थी। ऐसे में बिना हाईकोर्ट की अनुमति के चुनाव संभव नहीं है।

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हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल करते हुए हरियाणा सरकार ने कहा था कि प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 23 फरवरी को समाप्त हो चुका है। पंचायती राज एक्ट के दूसरे संशोधन के कुछ प्रावधान को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है। सरकार ने कहा कि बीते दिनों कोरोना के प्रकोप के चलते चुनाव न करवाने का सरकार ने निर्णय लिया था। अब स्थिति बेहतर हो गई है इसलिए चुनाव करवाए जा सकते हैं। 
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सरकार दो फेज में चुनाव करवाना चाहती है, पहले फेज में ग्राम पंचायत और दूसरे फेज में पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव का प्रस्ताव है। सरकार ने कहा कि पहले उनकी ओर से कोर्ट में कहा गया था कि निकट भविष्य में सरकार चुनाव नहीं करवाएगी। ऐसे में अब चुनाव करवाने के लिए न्यायालय की अनुमति आवश्यक है। चुनाव करवाने के लिए हाईकोर्ट में हरियाणा सरकार द्वारा दी गई अर्जी पर जवाब के लिए याची पक्ष की ओर से समय देने की मांग की गई। हाईकोर्ट ने याची पक्ष को मोहलत देते हुए याचिकाओं पर सुनवाई आठ फरवरी तक स्थगित कर दिया है।
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यह है मामला
गुरुग्राम के प्रवीण चौहान व अन्य ने 15 अप्रैल 2021 को हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 2020 में किए गए संशोधन को भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी थी। कोर्ट को बताया गया कि अधिनियम में संशोधन कर अब सीटों का 8 प्रतिशत बीसी-ए श्रेणी के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है और न्यूनतम 2 सीटों का आरक्षण अनिवार्य है। 


हरियाणा में 8 प्रतिशत के अनुसार केवल छह जिले हैं जहां 2 सीटें आरक्षण के लिए बचती हैं। 18 जिलों में केवल 1 सीट आरक्षित की जानी है जबकि सरकार नए प्रावधानों के अनुसार न्यूनतम 2 सीटे अनिवार्य हैं। हाईकोर्ट ने कहा था कि सरकार को कहा कि वह चाहे तो आरक्षण के नए प्राविधान को निलंबित कर पुराने नियमों के तहत चुनाव करवा सकती है। खंडपीठ ने कहा कि सरकार ने अंडरटेकिंग दी है कि जब तक याचिका पर फैसला नहीं होता तब तक सरकार निकट भविष्य में चुनाव नहीं करवा रही है। कोर्ट ने सरकार को अंडरटेकिंग पर रुख स्पष्ट करने या पुराने नियमों के तहत चुनाव करवाने का आदेश दिया था।

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