Punjab: शामलात जमीन से निर्माण न हटाया तो भवन भी हो जाएंगे पंचायत की संपत्ति, कब्जाधारकों को नोटिस जल्द
राज्य सरकार ने सभी जिला उपायुक्तों को पत्र लिखकर कहा है कि वह तुरंत प्रभाव से अपने क्षेत्र में शामलात और जुमला मुश्तरका मालिकान जमीनों का इंतकाल संबंधित ग्राम पंचायतों के नाम दर्ज कराएं।
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पंजाब सरकार द्वारा जुमला मुश्तरका मालिकान जमीनों को शामलात जमीन के रूप में पंचायतों की संपत्ति बना दिए जाने के साथ ही उन पर बने भवन, बड़ी इमारतें, आवास, फार्म हाउस, व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी पंचायत की संपत्ति का हिस्सा हो जाएंगे। पंचायतों और नगर काउंसिल नाम दर्ज होने के बाद इन जमीनों के कब्जाधारकों को उनके भवनों आदि का मलबा हटाने के नोटिस जारी करेंगी। अगर कब्जाधारकों ने जमीन से कब्जा नहीं छोड़ा तो यह सारे निर्माण स्वत: ही पंचायत की संपत्ति हो जाएंगे।
राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का कहना है कि पंचायत की मिलकियत वाली जमीनों का कब्जे छुड़ाकर पंचायतों को सुपुर्द किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने पंचायती जमीन से कब्जे छुड़ाने के लिए अब विशेष एक्ट बना दिया है और राज्य सरकार अब तक ऐसी जमीनों से कब्जे हटाने में सफल रही है। पंचायती जमीनों पर लोगों द्वारा खड़ी की गई इमारतों को कानून के अनुसार संबंधित पंचायतों के कब्जे में दिया जाएगा। पंचायतें और नगर काउंसिल ऐसे निर्माण वाले मालिकों को नोटिस जारी करेंगे। अगर उन्होंने कब्जे नहीं हटाए तो इन इमारतों का स्वामित्व पंचायतों को दे दिया जाएगा।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश पर अमल करते हुए विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान पंजाब विलेज कॉमन लैंड (रेगुलेशन) संशोधन बिल-2022 को सर्वसम्मति से पास कर दिया था। अब राज्य सरकार ने सभी जिला उपायुक्तों को पत्र लिखकर कहा है कि वह तुरंत प्रभाव से अपने क्षेत्र में शामलात और जुमला मुश्तरका मालिकान जमीनों का इंतकाल संबंधित ग्राम पंचायतों के नाम दर्ज कराएं।
पत्र में खासतौर पर उन शामलात और जुमला मुश्तरका मालिकान जमीनों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें गैरकानूनी तरीके से हिस्सेदारी में बांटकर उनकी मिलकियत बदल दी गई है या चकबंदी विभाग द्वारा हेराफेरी से जमीनों के मालिक बदलकर प्राइवेट लोगों को मालिक बना दिया गया। सरकार ने अपने आदेश में शामलात और जुमला मुश्तरका मालिकान जमीनों का इंतकाल ग्राम पंचायत के नाम लिखने के बाद इन जमीनों का कब्जा छुड़ाने की बात भी कही है। इस आदेश से पंजाब भर में ऐसे हजारों लोग प्रभावित होंगे जिन्होंने इस प्रकार की जमीन की मिलकियत अपने नाम करवा रखी है और इस सुप्रीम कोर्ट ने अवैध ठहरा दिया है।
चंडीगढ़ और बड़े शहर में रसूखदारों ने बना लिए फार्म हाउस
ग्राम विकास एवं पंचायत विभाग के अनुसार, इस मामले में दो साल पहले कराए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई थी कि प्रदेश के सभी बड़े शहरों और राजधानी चंडीगढ़ के आसपास पंजाब के गांवों की जमीनों पर आम लोगों के अलावा रसूखदारों ने भी आलीशान कोठियां और फार्म हाउस बना लिए हैं। इन सभी कब्जाधारियों पर अब अनिश्चितता की तलवार लटक गई है क्योंकि यह जमीनें उन्हे खाली करनी होंगी।