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Hindi News ›   Chandigarh ›   Panch Line of BJP for Haryana Assembly Elections 2014

नई पंचलाइन के साथ चुनाव में कूदेगी भाजपा

Sun, 21 Sep 2014 11:20 AM IST
राकेश भट्ट/अमर उजाला, नई दिल्ली/चंडीगढ़
राकेश भट्ट/अमर उजाला, नई दिल्ली/चंडीगढ़ Updated Sun, 21 Sep 2014 11:20 AM IST
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Panch Line of BJP for Haryana Assembly Elections 2014

हरियाणा के विधानसभा चुनाव में दिल्ली भाजपा के नेताओं के कंधे पर बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। योजना है कि हरियाणा में अभी तक गठबंधन की राजनीति से सरकार में भागेदारी करने वाली भाजपा को इस बार नमो-नमो के जाप के साथ अकेले ही सत्ता पर आसीन किया जाए।

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लोकसभा चुनाव में ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ की तर्ज पर हरियाणा चुनाव में भाजपा के प्रचार की पंच लाइन होगी ‘चलो चलें मोदी के साथ’।

शनिवार से इस स्लोगन के साथ धुआंधार प्रचार शुरू करने की तैयारी है। भाजपा हरियाणा में इस बार कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती।

एनसीआर में आने वाली हरियाणा की दो दर्जन से अधिक सीटों पर कब्जा जमाने के लिए दिल्ली भाजपा के बड़े जाट, गुर्जर व पंजाबी नेताओं की ड्यूटी लगाई गई है।

हरियाणा भाजपा के प्रभारी दिल्ली के विधायक व वरिष्ठ नेता जगदीश मुखी थे तो अब सांसद प्रवेश वर्मा को 19 सीटों का प्रभारी बनाने के अलावा रमेश विधूड़ी सहित दिल्ली के सातों सांसदों व अन्य नेताओं की ड्यूटी मिशन हरियाणा में लगाई गई है।

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अमित शाह खुद ले रहे नेताओं से फीडबैक

Panch Line of BJP for Haryana Assembly Elections 2014

बताया जाता है कि राष्ट्रीय प्रभारी अमित शाह खुद भी हरियाणा के चुनाव पर नेताओं से लगातार फीड बैक लेकर दिशा निर्देश दे रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, 20 सितंबर से धुआंधार प्रचार के लिए ‘चलो चलें मोदी के साथ’ पंच लाइन के साथ मोदी के नाम को भुनाने का टारगेट पार्टी ने बनाया है।

हरियाणा की तरक्की के लिए चलो चलें मोदी के साथ..., प्यासी है धरती चलो चलें मोदी के साथ...., भ्रष्टाचार पर करेंगे वार चलों चलें मोदी के साथ... जैसे स्लोगनों के साथ प्रचार के गीत तैयार किए गए हैं।

दहाई के आंकड़े को अकेले नहीं छू सकी भाजपा

Panch Line of BJP for Haryana Assembly Elections 2014

हरियाणा में अब तक के चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि अकेले हरियाणा के मैदान में उतरने पर भाजपा दहाई के आंकड़े तक को नहीं छू सकी। वर्ष 1982 में भाजपा के अस्तित्व में आने के बाद कुल सात में चार चुनाव गठबंधन कर ही उसने चुनाव लड़े हैं। गठबंधन के अलावा वह अकेले सभी सीटों पर लड़ी तो हाशिए पर आ गई।

भारतीय जनसंघ के समय में उसने 1967 में 48 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे। जिनमें से 12 जीते। वर्ष 1977 में जनता पार्टी के नाम से अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर उसे इमरजेंसी का फायदा मिला। उस दौरान भारतीय लोकदल का जनता पार्टी में विलय हुआ और देवीलाल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे।

इसके बाद पार्टी गठबंधन की बैसाखी के बिना ज्यादा कुछ नहीं कर सकी। वर्ष 1982 में उसने लोकदल के साथ गठबंधन कर 24 सीटों पर चुनाव लड़ा और 7 सीटों पर जीत दर्ज की। इसी तरह वर्ष 1987 में उसने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा और 16 सीटों पर जीत दर्ज की।

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1991 में अकेले लड़ा चुनाव तो मात्र 2 सीट

Panch Line of BJP for Haryana Assembly Elections 2014

वर्ष 1991 में भाजपा ने गठबंधन के बिना अपना वजूद हरियाणा में तलाशने की कोशिश की तो 89 सीटों पर लड़कर उसे मात्र दो सीट मिलीं। वर्ष 1996 में उसने फिर इनेलो के साथ गठबंधन किया तो 25 में से 11 सीटें उसकी झोली में आई।

वर्ष 2000 में भी उसने गठबंधन में 25 सीटों पर चुनाव लड़ा और 6 सीटों पर जीत दर्ज की। वर्ष 2005 व वर्ष 2009 में उसने फिर से एकला चलो का अनुसरण करते हुए चुनाव लड़ा और क्रमश: दो व चार सीटों के साथ हाशिए पर आ गई।

इस वर्ष लोकसभा चुनावों में मोदी के नाम पर मिले 34 फीसदी मतों को लेकर भाजपा उत्साहित है और उसने निर्णय लिया है कि वे बिना गठबंधन सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

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