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सजा काट चुके पाकिस्तानियों अभी भी कैद में, इतने गंभीर मुद्दा, कदम क्यों खींच रही केंद्र सरकार: हाईकोर्ट
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-30 कैदियों में से 6 की 26 जुलाई को अटारी बॉर्डर से होगी वतन वापसी, केंद्र ने दी जानकारी
-बाकी बचे 24 कैदियों की वापसी के प्रयास का केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में किया दावा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सजा काट चुके 30 पाकिस्तानी जो अब भी कैद में हैं, उनकी वापसी के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए पंजाब सरकार ने कहा कि इतना गंभीर मुद्दा होने के बावजूद सरकार न जाने क्यों कदम खींच रही है। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि अगली सुनवाई तक ठोस कदम नहीं उठाए गए तो केंद्र सरकार भारी जुर्माने के लिए तैयार रहे।
30 पाकिस्तानी कैदियों की वतन वापसी के मामले में दखल देने का केंद्र सरकार को आदेश जारी किया है। जस्टिस एनएस शेखावत फरीदकोट के दौरे पर थे और इस दौरान उन्हें बताया गया कि दो पाकिस्तानी किशोर बरी होने के बाद भी कैदी हैं। अप्रैल 2023 में दोनों को अदालत ने बरी कर दिया था लेकिन पाकिस्तानी नागरिक होने के चलते उन्हें रिहा नहीं किया गया था। 2022 में ये दोनों पाकिस्तानी किशोर भारतीय सीमा में पाए गए थे और बिना दस्तावेजों के सीमा पार करने पर तरनतारन में उनके खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम 1920 की धारा 3 सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। किशोर न्याय बोर्ड ने उनके मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि सीमा स्तंभों के बीच कोई बाड़ नहीं थी। कोहरे के दिनों में गलती से भारत के क्षेत्र में प्रवेश करने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। जस्टिस शेखावत फरीदकोट के प्रशासनिक जज हैं और ऐसे में उन्होंने मामले को गंभीर मानते हुए इस पर संज्ञान लेकर उचित आदेश के लिण कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया था। मुख्य न्यायाधीश ने इसे जनहित याचिका के तौर पर सुनने का निर्णय लिया था।
हाईकोर्ट को बताया गया था कि दोनों नाबालिगों को पाकिस्तान भेजा जा चुका है। इस दौरान हाईकोर्ट ने पंजाब की जेलों में सजा पूरी होने के बावजूद मौजूद पाकिस्तानी कैदियों की संख्या के बारे में पंजाब व केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। हाईकोर्ट को बताया गया कि 30 पाकिस्तानी कैदी सजा पूरी होने के बावजूद जेल में हैं। हाईकोर्ट ने उनकी वतन वापसी के लिए ठोस कदम उठाने का आदेश दिया था। मामला अब सुनवाई के लिए पहुंचा तो केंद्र ने बताया कि 6 कैदियों की 26 जुलाई को अटारी बॉर्डर से वतन वापसी होगी। बाकी के 24 कैदियों के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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-बाकी बचे 24 कैदियों की वापसी के प्रयास का केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में किया दावा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सजा काट चुके 30 पाकिस्तानी जो अब भी कैद में हैं, उनकी वापसी के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए पंजाब सरकार ने कहा कि इतना गंभीर मुद्दा होने के बावजूद सरकार न जाने क्यों कदम खींच रही है। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि अगली सुनवाई तक ठोस कदम नहीं उठाए गए तो केंद्र सरकार भारी जुर्माने के लिए तैयार रहे।
30 पाकिस्तानी कैदियों की वतन वापसी के मामले में दखल देने का केंद्र सरकार को आदेश जारी किया है। जस्टिस एनएस शेखावत फरीदकोट के दौरे पर थे और इस दौरान उन्हें बताया गया कि दो पाकिस्तानी किशोर बरी होने के बाद भी कैदी हैं। अप्रैल 2023 में दोनों को अदालत ने बरी कर दिया था लेकिन पाकिस्तानी नागरिक होने के चलते उन्हें रिहा नहीं किया गया था। 2022 में ये दोनों पाकिस्तानी किशोर भारतीय सीमा में पाए गए थे और बिना दस्तावेजों के सीमा पार करने पर तरनतारन में उनके खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम 1920 की धारा 3 सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। किशोर न्याय बोर्ड ने उनके मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि सीमा स्तंभों के बीच कोई बाड़ नहीं थी। कोहरे के दिनों में गलती से भारत के क्षेत्र में प्रवेश करने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। जस्टिस शेखावत फरीदकोट के प्रशासनिक जज हैं और ऐसे में उन्होंने मामले को गंभीर मानते हुए इस पर संज्ञान लेकर उचित आदेश के लिण कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया था। मुख्य न्यायाधीश ने इसे जनहित याचिका के तौर पर सुनने का निर्णय लिया था।
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हाईकोर्ट को बताया गया था कि दोनों नाबालिगों को पाकिस्तान भेजा जा चुका है। इस दौरान हाईकोर्ट ने पंजाब की जेलों में सजा पूरी होने के बावजूद मौजूद पाकिस्तानी कैदियों की संख्या के बारे में पंजाब व केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। हाईकोर्ट को बताया गया कि 30 पाकिस्तानी कैदी सजा पूरी होने के बावजूद जेल में हैं। हाईकोर्ट ने उनकी वतन वापसी के लिए ठोस कदम उठाने का आदेश दिया था। मामला अब सुनवाई के लिए पहुंचा तो केंद्र ने बताया कि 6 कैदियों की 26 जुलाई को अटारी बॉर्डर से वतन वापसी होगी। बाकी के 24 कैदियों के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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