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बेशक रिश्ते बदल गए, पर नहीं बदला 'स्वाद', आज भी दो भारतीय व्यंजनों के दीवाने हैं पाकिस्तानी
Mon, 13 Jan 2020 03:26 PM IST
खुशबू गोयल
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 13 Jan 2020 03:26 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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देश विभाजन के बाद भारत-पाकिस्तान के कूटनीतिक व सामाजिक रिश्तों में कई बड़े बदलाव हुए, लेकिन एक चीज जो नहीं बदली, वह है अखंड भारत का स्वाद। लाहौर की पुरानी गलियों और बाजारों में आज भी वह दुकानें मौजूद हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी भारतीय व्यंजन जालंधरी मोतीचूर के लड्डू, बॉम्बे बिरयानी और अमृतसरी हरिसा बेचते हैं।
दोनों देशों के बीच कई बार संबंध खराब हुए, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तानियों की तरफ से इन प्राचीन दुकानों पर भारतीय नाम वाले व्यंजन बेचने पर कभी कोई आपत्ति नहीं की गई। लाहौर के प्रसिद्ध अनारकली बाजार में जालंधरी मोतीचूर के लड्डू बेचने वाली दुकानों में से एक दुकान को सौ साल होने वाले हैं। यह दुकान मोतीपाक बर्फी और देसी घी से बने मोतीचूर के लड्डू के लिए प्रसिद्ध है।
दुकान पर काम करने वाले कारीगर लियाकत अली खान ने बताया कि वह पिछले 50 साल से इस दुकान पर काम कर रहे हैं। दुकान हाजी अब्दुल करीम की थी, जो जालंधर के रहने वाले थे। वे 1922 से मिठाइयों का कारोबार करते आ रहे है। उनके निधन के बाद उनके बेटे हाजी नजीरन और बाद में उनके पोते हाजी रशीद ने दुकान संभाली।
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दोनों देशों के बीच कई बार संबंध खराब हुए, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तानियों की तरफ से इन प्राचीन दुकानों पर भारतीय नाम वाले व्यंजन बेचने पर कभी कोई आपत्ति नहीं की गई। लाहौर के प्रसिद्ध अनारकली बाजार में जालंधरी मोतीचूर के लड्डू बेचने वाली दुकानों में से एक दुकान को सौ साल होने वाले हैं। यह दुकान मोतीपाक बर्फी और देसी घी से बने मोतीचूर के लड्डू के लिए प्रसिद्ध है।
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दुकान पर काम करने वाले कारीगर लियाकत अली खान ने बताया कि वह पिछले 50 साल से इस दुकान पर काम कर रहे हैं। दुकान हाजी अब्दुल करीम की थी, जो जालंधर के रहने वाले थे। वे 1922 से मिठाइयों का कारोबार करते आ रहे है। उनके निधन के बाद उनके बेटे हाजी नजीरन और बाद में उनके पोते हाजी रशीद ने दुकान संभाली।
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किसी ने भी नाम बदलने की बात नहीं कही
वर्तमान में परिवार की चौथी पीढ़ी के अब्दुल रहमान दुकान चला रहे हैं। खान ने कहा कि भारत-पाक संबंधों के फिर से खराब होने के बावजूद उन्हें दुकान के नाम के कारण कभी कोई समस्या नहीं आई। किसी भी पाकिस्तानी ने उन्हें दुकान का नाम बदलने का सुझाव तक नहीं दिया है।
पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा साहिब के दर्शन के लिए लाहौर आने वाले सिख तीर्थ यात्री भी उनकी दुकान से लड्डू खरीदने आते हैं। यहां की मिठाइयां पाकिस्तान के नेताओं के बीच भी बड़ी लोकप्रिय हैं। पाकिस्तान पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ और कई अन्य राजनीतिक व सामाजिक हस्तियां यहां से मोतीचूर के लड्डू खरीद चुके हैं। मिठाइयां शुद्ध देसी घी में बनाई जाती हैं, इसलिए लाहौर के प्रसिद्ध पहलवानों की भी पहली पसंद हैं।
पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा साहिब के दर्शन के लिए लाहौर आने वाले सिख तीर्थ यात्री भी उनकी दुकान से लड्डू खरीदने आते हैं। यहां की मिठाइयां पाकिस्तान के नेताओं के बीच भी बड़ी लोकप्रिय हैं। पाकिस्तान पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ और कई अन्य राजनीतिक व सामाजिक हस्तियां यहां से मोतीचूर के लड्डू खरीद चुके हैं। मिठाइयां शुद्ध देसी घी में बनाई जाती हैं, इसलिए लाहौर के प्रसिद्ध पहलवानों की भी पहली पसंद हैं।
अमृतसरी हरिसा की दुकान भी सालों पुरानी
निस्बत रोड स्थित अमृतसरी हरिसा की दुकान लगभग 70 साल पुरानी है। दुकान के मालिक मोहम्मद अली अत्तारी बताते हैं कि उनके दादा मोहम्मद सिराज 1947 में अमृतसर से लाहौर आ गए थे। यहां आकर उन्होंने अमृतसरी हरिसा का व्यवसाय शुरू किया। इतने साल बीत जाने के बावजूद उनकी दुकान में तैयार होने वाले हरिसा का स्वाद और गुणवत्ता नहीं बदली।
देसी मुर्गी, मटन और बीफ हरिसा दुकान पर उपलब्ध हैं। अमृसरी व्यंजनों के इस स्वाद को लाहौरी व दूसरे देशों से आने वाले लोग खूब पसंद करते हैं। मुहम्मद अली अत्तारी कहते हैं कि भारत-पाक तनाव ने कभी उनके व्यवसाय को प्रभावित नहीं किया और किसी ने कभी दुकान के नाम पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसी तरह लोअर माल रोड के पास बॉम्बे बिरयानी की दुकान है।
दुकान के मालिक मोहम्मद अनीस ने कहा कि चूंकि वह बिरयानी के साथ-साथ प्रामाणिक भारतीय खाना पकाने की विधि तैयार करने के लिए मुंबई से एक विशेष मसाला मंगवाकर उसका उपयोग करते हैं, इसलिए दुकान का नाम बॉम्बे बिरयानी है। दुकान का नाम ब्रांड की पहचान है। लोग दुकान के नाम की परवाह नहीं करते।
उन्होंने बताया कि भारत की राजधानी दिल्ली में कई फूड आउटलेट हैं, जो लाहौर और कराची के नाम पर हैं। अमृतसर में दुकानें लाहौर और लायलपुर (फैसलाबाद) के नाम पर हैं और भारतीयों को भी इन नामों की परवाह नहीं है।
देसी मुर्गी, मटन और बीफ हरिसा दुकान पर उपलब्ध हैं। अमृसरी व्यंजनों के इस स्वाद को लाहौरी व दूसरे देशों से आने वाले लोग खूब पसंद करते हैं। मुहम्मद अली अत्तारी कहते हैं कि भारत-पाक तनाव ने कभी उनके व्यवसाय को प्रभावित नहीं किया और किसी ने कभी दुकान के नाम पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसी तरह लोअर माल रोड के पास बॉम्बे बिरयानी की दुकान है।
दुकान के मालिक मोहम्मद अनीस ने कहा कि चूंकि वह बिरयानी के साथ-साथ प्रामाणिक भारतीय खाना पकाने की विधि तैयार करने के लिए मुंबई से एक विशेष मसाला मंगवाकर उसका उपयोग करते हैं, इसलिए दुकान का नाम बॉम्बे बिरयानी है। दुकान का नाम ब्रांड की पहचान है। लोग दुकान के नाम की परवाह नहीं करते।
उन्होंने बताया कि भारत की राजधानी दिल्ली में कई फूड आउटलेट हैं, जो लाहौर और कराची के नाम पर हैं। अमृतसर में दुकानें लाहौर और लायलपुर (फैसलाबाद) के नाम पर हैं और भारतीयों को भी इन नामों की परवाह नहीं है।