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हिंदू मंदिर गए जत्थे को पाकिस्तान ने वक्त से पहले लौटाया, सोनिया ने भेजी थी सामग्री
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Updated Mon, 27 Feb 2017 09:25 AM IST
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पाक गए जत्थे को समय से पहले लौटाया
- फोटो : File Photo
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पाकिस्तान का चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया है, उसने महाशिवरात्रि पर पाकिस्तान में स्थित हिंदुओं के ऐतिहासिक मंदिर कटासराज के दर्शनों के लिए गए 200 श्रद्धालुओं के जत्थे को तय समय से दो दिन पहले ही लौटा दिया है। जत्थे में शामिल लोगों ने बताया कि पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें भारत लौटा दिया है।
जानकारी के मुताबिक लाहौर के कृष्णा मंदिर व अन्य मंदिरों के दर्शन करने के बाद 28 फरवरी को इस जत्थे वापस भारत आना था लेकिन दो दिन पहले रविवार को ही उन्हे वापस भेज दिया गया है। पाक गए श्रद्धालुओं ने कहा कि वहां सुरक्षा इतनी ज्यादा थी कि वह कहीं आ जा भी नहीं सके। पाकिस्तान सरकार ने उन्हें डेरा साहिब गुरुद्वारे में ठहराया था और सुरक्षा कारणों के चलते बाहर भी नहीं निकलने दिया गया।
शनिवार की रात उन्हें वहां से निकाला गया और सुबह लाहौर भेजा। इसके बाद अटारी सीमा के रास्ते भारत पहुंचा दिया गया। बता दें, यह जत्था 22 फरवरी को यहां से रवाना हुआ था। 24 फरवरी को श्रद्धालुओं ने महाशिवरात्रि के पर्व पर कटासराज धाम में पूजा-अर्चना की।
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जानकारी के मुताबिक लाहौर के कृष्णा मंदिर व अन्य मंदिरों के दर्शन करने के बाद 28 फरवरी को इस जत्थे वापस भारत आना था लेकिन दो दिन पहले रविवार को ही उन्हे वापस भेज दिया गया है। पाक गए श्रद्धालुओं ने कहा कि वहां सुरक्षा इतनी ज्यादा थी कि वह कहीं आ जा भी नहीं सके। पाकिस्तान सरकार ने उन्हें डेरा साहिब गुरुद्वारे में ठहराया था और सुरक्षा कारणों के चलते बाहर भी नहीं निकलने दिया गया।
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शनिवार की रात उन्हें वहां से निकाला गया और सुबह लाहौर भेजा। इसके बाद अटारी सीमा के रास्ते भारत पहुंचा दिया गया। बता दें, यह जत्था 22 फरवरी को यहां से रवाना हुआ था। 24 फरवरी को श्रद्धालुओं ने महाशिवरात्रि के पर्व पर कटासराज धाम में पूजा-अर्चना की।
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सोनिया गांधी ने भेजी थी पूजन सामग्री
पाक गए जत्थे को समय से पहले लौटाया
कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने भी श्रद्धालुओं के हाथों पूजन सामग्री भिजवाई थी। उल्लेखनीय है कि 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के कटासराज पाकिस्तान में रह गया था।
माना जाता है कि पांडव अज्ञातवास के दौरान यहां ठहरे थे। यहां एक पवित्र अमरकुंड है, जहां स्नान करने से पापों का अंत होता है। हमेशा ही भारत से शिवरात्रि और अन्य मौकों पर श्री कटाराज धाम के लिए जत्थे जाते रहे हैं। 24 फरवरी की रात को यहां वैदिक विधि-विधान से मंत्रोच्चारण के साथ पूजा और रुद्राभिषेक होता है।
माना जाता है कि पांडव अज्ञातवास के दौरान यहां ठहरे थे। यहां एक पवित्र अमरकुंड है, जहां स्नान करने से पापों का अंत होता है। हमेशा ही भारत से शिवरात्रि और अन्य मौकों पर श्री कटाराज धाम के लिए जत्थे जाते रहे हैं। 24 फरवरी की रात को यहां वैदिक विधि-विधान से मंत्रोच्चारण के साथ पूजा और रुद्राभिषेक होता है।