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मजदूरों और डॉक्टरों के बच्चों की पेंटिंग प्रदर्शनी आज
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 16 Apr 2016 10:50 AM IST
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पेटिंग बनाती प्रशिक्षु
- फोटो : file photo
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सेक्टर-दस स्थित गवर्नमेंट म्यूजियम हॉल की जगह उन्हीं लोगों को मिलती है, जिनका कला के क्षेत्र में नाम होता है, लेकिन इस बार कुछ अलग है। म्यूजियम हॉल उन बच्चों की मेजबानी कर रहा है, जिनका न तो कोई नाम है और न कोई मुकाम।
उनकी पहचान सिर्फ इतनी है कि वह दिहाड़ीदार मजदूरों के बच्चे हैं। माता-पिता पीजीआई में निर्माणाधीन हास्पिटल के काम में जुटे हैं। इन बच्चों को पिछले दो वर्षों से आर्ट व कला के लिए तैयार किया जा रहा है।
अब वे इतना समझ चुके हैं कि जो वह सोचते हैं, उसे अपनी कला से कागज पर उकेर सकते हैं। साथ ही यहां अलग से पीजीआई के डॉक्टरों के बच्चों की भी प्रदर्शनी लगाकर जाना जाएगा कि सुविधा संपन्न और सुविधाओं के अभाव में रहने वाले बच्चे क्या सोचते हैं।
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शनिवार व रविवार को गवर्नमेंट म्यूजियम हॉल में इन बच्चों की बनाई गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी लग रही है। प्रदर्शनी पीजीआई के सोशल पीडियाट्रिक्स, एनजीओ बिल्ड हेल्दी इंडिया मूवमेंट व विराज कला केंद्र के सहयोग से लगाई जा रही है।
डिपार्टमेंट की डॉक्टर भवनीत भारती ने बताया कि पीजीआई में बन रहे 250 बेड के हास्पिटल के निर्माण में कई मजदूर काम करते हैं। उनके बच्चों के लिए भवनीत भारती ने एक क्रेच बनाई, जिसमें वह और उनकी साथी बच्चों को पढ़ाते हैं और कला के बारे में सिखाते हैं। बच्चों की संख्या करीब 60 होगी।
इन बच्चों को वह पिछले दो वर्षों से तैयार कर रही हैं। भवनीत भारती व उनके साथियों की मेहनत अब रंग लाने लगी है। इन बच्चों को पढ़ाया भी जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर चंडीगढ़ प्रशासन की सोशल वेलफेयर विंग की सेक्रेटरी भावना गर्ग व पीजीआई के डायरेक्टर योगेश कुमार चावला होंगे।
इनकी प्रदर्शनी अलग होगी
भवनीत भारती ने बताया कि कार्यक्रम में पीजीआई में रहने वाले डॉक्टरों के बच्चों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। उनकी प्रदर्शनी मजदूरों के बच्चों से अलग होगी। इसका मकसद यह देखना होगा कि आखिर वे बच्चे क्या सोचते हैं, जिन्हें पूरी सुविधाएं मिलती हैं और उन बच्चों की सोच क्या है, जिनके पास सुविधाओं का अभाव है। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है कि जब भी इन बच्चों के बीच काम किया जाए तो किस सोच के साथ उनके पास जाया जाए।
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उनकी पहचान सिर्फ इतनी है कि वह दिहाड़ीदार मजदूरों के बच्चे हैं। माता-पिता पीजीआई में निर्माणाधीन हास्पिटल के काम में जुटे हैं। इन बच्चों को पिछले दो वर्षों से आर्ट व कला के लिए तैयार किया जा रहा है।
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अब वे इतना समझ चुके हैं कि जो वह सोचते हैं, उसे अपनी कला से कागज पर उकेर सकते हैं। साथ ही यहां अलग से पीजीआई के डॉक्टरों के बच्चों की भी प्रदर्शनी लगाकर जाना जाएगा कि सुविधा संपन्न और सुविधाओं के अभाव में रहने वाले बच्चे क्या सोचते हैं।
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शनिवार व रविवार को गवर्नमेंट म्यूजियम हॉल में इन बच्चों की बनाई गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी लग रही है। प्रदर्शनी पीजीआई के सोशल पीडियाट्रिक्स, एनजीओ बिल्ड हेल्दी इंडिया मूवमेंट व विराज कला केंद्र के सहयोग से लगाई जा रही है।
डिपार्टमेंट की डॉक्टर भवनीत भारती ने बताया कि पीजीआई में बन रहे 250 बेड के हास्पिटल के निर्माण में कई मजदूर काम करते हैं। उनके बच्चों के लिए भवनीत भारती ने एक क्रेच बनाई, जिसमें वह और उनकी साथी बच्चों को पढ़ाते हैं और कला के बारे में सिखाते हैं। बच्चों की संख्या करीब 60 होगी।
इन बच्चों को वह पिछले दो वर्षों से तैयार कर रही हैं। भवनीत भारती व उनके साथियों की मेहनत अब रंग लाने लगी है। इन बच्चों को पढ़ाया भी जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर चंडीगढ़ प्रशासन की सोशल वेलफेयर विंग की सेक्रेटरी भावना गर्ग व पीजीआई के डायरेक्टर योगेश कुमार चावला होंगे।
इनकी प्रदर्शनी अलग होगी
भवनीत भारती ने बताया कि कार्यक्रम में पीजीआई में रहने वाले डॉक्टरों के बच्चों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। उनकी प्रदर्शनी मजदूरों के बच्चों से अलग होगी। इसका मकसद यह देखना होगा कि आखिर वे बच्चे क्या सोचते हैं, जिन्हें पूरी सुविधाएं मिलती हैं और उन बच्चों की सोच क्या है, जिनके पास सुविधाओं का अभाव है। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है कि जब भी इन बच्चों के बीच काम किया जाए तो किस सोच के साथ उनके पास जाया जाए।