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एशिया की सबसे बड़ी मंडी का हाल: बारिश में भीगा धान, नहीं कोई इंतजाम, अन्नदाता बेहाल

Tue, 11 Oct 2022 05:54 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, खन्ना (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, खन्ना (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 11 Oct 2022 05:54 PM IST
सार

पनग्रेन एजेंसी के इंस्पेक्टर हरभजन सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि यह कोई खास बात नहीं है। अगर सड़क पर रखी 40-50 बोरियां गीली भी हो गई हैं तो फसल को सुखा लिया जाएगा। जब पूछा गया कि आप ने क्रेट के ऊपर बोरियों को क्यों नहीं रखा तो उन्होंने सारी जिम्मेदारी आढ़ती पर डाल दी।

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Paddy crop get wet in rain in Khanna grain market of Punjab
खन्ना मंडी में भीगी धान की बोरियां। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मंगलवार सुबह आंधी और तेज बारिश से एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी खन्ना में पड़ा धान भीग गया। यह सब मार्केट कमेटी खन्ना व खरीद एजेंसियों की लापरवाही के कारण हुआ। दरअसल, खरीद एजेंसियों ने मंडी में जिन फड़ों पर फसल रखी थी, उनके नीचे लकड़ी के क्रेट नहीं लगा रखे थे। इस वजह से बारिश का पानी अनाज के अंदर चला गया। 

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वहीं फड़ पर लगे धान के ढेर भी भीग चुके हैं। इन्हें भी समय पर तिरपाल से ढका नहीं गया। बताया जा रहा है कि खरीद एजेंसियों की किरकिरी के बाद एफसीआई के चेयरमैन अशोक केके मीना खन्ना मंडी में बारिश से हो चुके नुकसान का जायजा लेने बुधवार को आएंगे। खन्ना अनाज मंडी में यह पहली बार हुआ कि मंडी में जितनी भी फड़ हैं, उनके ऊपर पानी से बचाव का कोई इंतजाम नहीं है। अगर सही समय पर इंतजाम किया गया होता तो किसानों को यह नुकसान न उठाना पड़ता।
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किसान चरणजीत सिंह, जसविंदर सिंह, मनवीर सिंह, बलजीत सिंह व अमरजीत सिंह ने बताया कि मंडी में आए किसी को तीन तो किसी को पांच दिन हो चुके हैं। मगर प्रशासन ने इतने दिन बाद भी धान की बोली नहीं लगाई। देर रात बारिश के कारण धान की फसल खराब हो गई। उन्होंने कहा कि प्रशासन की लापरवाही के कारण फसल खराब हुई और दोबारा मेहनत और मजूदर लगाकर फसल सुखानी पड़ेगी। इससे हमारा खर्च दोगुना हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि खरीद एजेंसियां मंडी में मनमर्जी से काम कर रही हैं, जिसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

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खरीद के बाद फसल की जिम्मेदारी एजेंसियों की
इस संबंध में जब मार्केट कमेटी के सचिव सुरजीत सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि अगर मंडी में फड़ पर क्रेट नहीं है तो इसकी जिम्मेदारी खरीद एजेंसियों की होती है, क्योंकि जब एजेंसी फसल को खरीदकर बोरियों में भर देती है तो उसके बाद सारी जिम्मेदारी खरीद एजेंसी की होती है कि उसकी देखभाल करे। एजेंसी का काम है कि उन बोरियों को क्रेट पर रखकर ऊपर से तिरपाल से ढके। एजेंसियों ने यह सब नहीं किया तो उनकी लापरवाही के कारण फसल खराब हुई है। उन्होंने कहा कि मार्केट कमेटी का काम तो सिर्फ किसान की फसल की बोली लगाने तक का है।

एजेंसी के इंस्पेक्टर बोले- आढ़ती की जिम्मेदारी
इस संबंध में पनग्रेन एजेंसी के इंस्पेक्टर हरभजन सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि यह कोई खास बात नहीं है। अगर सड़क पर रखी 40-50 बोरियां गीली भी हो गई हैं तो फसल को सुखा लिया जाएगा। जब पूछा गया कि आप ने क्रेट के ऊपर बोरियों को क्यों नहीं रखा तो उन्होंने सारी जिम्मेदारी आढ़ती पर डाल दी। उन्होंने कहा यह काम आढ़ती का होता है। क्रेट पर रखना हमारा काम नहीं है। अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो नोटिस निकालकर जवाब मांगा जाएगा।

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