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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्टः हलफनामे से खत्म नहीं होता मालिकाना हक
Wed, 26 Feb 2020 04:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 26 Feb 2020 04:53 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि हलफनामे से बिके वाहन के साथ यदि कोई दुर्घटना होती है तो मुआवजे के लिए खरीददार नहीं बल्कि पंजीकृत मालिक जिम्मेदार होंगे। कोर्ट ने कहा कि जब तक वाहन का पंजीकरण खरीददार नहीं करवाता तब तक पंजीकृत मालिक ही इसके लिए जवाबदेह है।
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मामला जालंधर से जुड़ा है जहां के कुलदीप ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि 2017 में हुए एक एक्सीडेंट के मामले में मुआवजे के लिए याची को जिम्मेदार बताया गया है। याची ने बताया कि उसने हलफनामे के माध्यम से अपना वाहन मई 2010 में सुरेंद्र सिंह को बेच दिया था। दुर्घटना के समय वाहन का बीमा मौजूद नहीं था और मुआवजे की राशि मालिक और ड्राइवर से वसूल करने के आदेश जारी किए गए।
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याची ने कहा कि जब वह वाहन बेच चुका है तो उसे कैसे मुआवजे के लिए जिम्मेदार बताया जा सकता है। याची ने सबूत के तौर पर वह हलफनामा पेश किया जिसके आधार पर उसने वाहन बेचा है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि सात साल तक याची सोया हुआ था जो उसे यह तक याद नहीं रहा कि वाहन का पंजीकरण खरीददार के नाम करवाना है। मोटर व्हीकल एक्ट में मालिकाना हक को लेकर स्पष्ट है कि मालिक वही होगा जिसके नाम वाहन पंजीकृत है।
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इस मामले में मालिक ने वाहन तो बेच दिया लेकिन मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं किया। ऐसे में अब मुआवजे की राशि को भरने की अपनी जिम्मेदारी से याची नहीं भाग सकता। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याची को मुआवजा राशि भरने के आदेश दिए हैं।