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ओआरएस पैकेट बंटे नहीं और पूरा हो गया अभियान
हेमंत ज्योतिसर/ अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
Updated Wed, 01 Oct 2014 12:41 AM IST
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डायरिया की रोकथाम के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया गया सघन अभियान बिना ओआरएस पैकेट बांटे ही सफल हो गया।
भले ही अभियान समाप्त हो चुका है, लेकिन निर्धारित किया टारगेट हासिल करने की वास्तविकता सिविल अस्पताल में पडे़ ओआरएस पैकेट के बॉक्स बयां कर रहे हैं।
सिविल अस्पताल के स्टोर से बाहर पडे़ ओआरएस पैकेट सघन डायरिया निवारण पखवाडे़ की सफलता पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।
ओआरएस पैकेट और जिंक टैबलेट एक लाख छह हजार बच्चों तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्पेशल अभियान चलाया था।
लेकिन निर्धारित संख्या में मंगाए ओआरएस पैकेट में से शेष बचना, अभियान की सफलता पर सवाल उठा रहा है। विभाग ने अगस्त में इस अभियान को समाप्त तो कर दिया लेकिन पैकेट निर्धारित संख्या में बच्चों तक पहुंचे या नहीं यह जानने की किसी भी अधिकारी ने जहमत तक नहीं उठाई।
बता दें कि एक लाख छह हजार बच्चों में बंटने वाले ओआरएस पैकेट के बॉक्स सिविल अस्पताल के क्षय रोग विभाग भवन में ही पिछले कई दिनों से धूल फांक रहे हैं।
जबकि रोजाना यहां से गुजरने वाले स्टोर प्रभारी और डॉक्टरों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। वहीं इस बाबत अधिकारी सही ढंग से जवाब नहीं दे रहे।
तत्कालीन प्रतिरक्षण अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. अनुपमा ने कहा कि उन्होंने यह चार्ज एक अन्य महिला चिकित्सक को दे दिया था।
अब वे इस बारे में कुछ नहीं बता सकती। महिला चिकित्सक ने गर्भवती महिला के केस में बिजी होने की बात कहकर फोन काट दिया। उल्लेखनीय है योजना के अनुसार सघन दस्त निवारण पखवाड़े में 0 से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को ओआरएस पैकेट, जिंक टैबलेट और पंफलेट बांटा जाना था, जो कि 28 जुलाई से 2 अगस्त तक चला।
7 प्रतिशत बच्चों को निगल लेता है डायरिया
जिले में सात प्रतिशत बच्चों को डायरिया हर साल लील लेता है। यह खुलासा अभियान शुरू होने से पहले प्रेसवार्ता के दौरान जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्वयं किया था।
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इसी के मद्देनजर विभाग ने बरसाती मौसम में फैलने वाले डायरिया पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उपरोक्त अभियान चलाया था। ओआरएस के शेष पैकेट अब बता रहे हैं कि विभाग ने इस काम में किस कदर लापरवाही बरती है।
आशा वर्कर और आंगनबाड़ी केंद्र की थी अहम भूमिका
अभियान सफल बनाने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने आशा वर्कर और आंगनबाड़ी केंद्रों को चुना था, जिसमें 680 आशा वर्कर की ड्यूटी लगाई गई थी। इसके अलावा एक हजार 75 आंगनबाड़ी केंद्रों के कंधों पर भी अभियान की सफलता की जिम्मेदारी डाली गई थी।
शिक्षा विभाग से भी मांगा गया सहयोग
डायरिया से बचाव के लिए चलाए गए अभियान में शिक्षा विभाग से भी सहयोग मांगा गया था। अभियान से पहले इसकी जानकारी सिविल सर्जन डॉ. जेएस ग्रेवाल के साथ मौजूद डॉ. अनुपमा ने पत्रकारों को दी थी।
उन्होंने कहा कि कि डायरिया संक्रमण बीमारी है और खाने से पहले अच्छे ढंग से हाथ न धोने के कारण यह बीमारी चपेट ले सकती है। इसके लिए स्कूलों में बच्चों को भोजन करने से पहले हाथ धोने की प्रक्रिया का डेमो भी दिए जाने की बात कही गई थी।
इस तरह होता है ओआरएस व जिंक टैबलेट का प्रयोग
दस्त लगने पर ओआरएस व जिंक टेबलेट का प्रयोग जरूरी है। इसके लिए एक लीटर पानी को पहले गर्म किया जाता है और फिर पानी को सामान्य तापमान पर आने के बाद उसमें ओआरएस मिलाना होता है।
दस्त आने पर बच्चे को अधिक से अधिक ओआरएस घोल वाला पानी पिलाना जरुरी है, जबकि इस बीमारी लगने के बाद 14 दिन तक हर रोज जिंक टेबलेट बच्चों को देनी होती है।
बचे पैकेट साल भर काम आएंगे : सीएमओ
सीएमओ डॉ. जेएस ग्रेवाल ने कहा कि यह पैकेट स्टोर के भी हो सकते हैं और अगर अभियान के दौरान पैकेट बचे हैं, तो साल भर काम आएंगे।
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भले ही अभियान समाप्त हो चुका है, लेकिन निर्धारित किया टारगेट हासिल करने की वास्तविकता सिविल अस्पताल में पडे़ ओआरएस पैकेट के बॉक्स बयां कर रहे हैं।
सिविल अस्पताल के स्टोर से बाहर पडे़ ओआरएस पैकेट सघन डायरिया निवारण पखवाडे़ की सफलता पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।
ओआरएस पैकेट और जिंक टैबलेट एक लाख छह हजार बच्चों तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्पेशल अभियान चलाया था।
लेकिन निर्धारित संख्या में मंगाए ओआरएस पैकेट में से शेष बचना, अभियान की सफलता पर सवाल उठा रहा है। विभाग ने अगस्त में इस अभियान को समाप्त तो कर दिया लेकिन पैकेट निर्धारित संख्या में बच्चों तक पहुंचे या नहीं यह जानने की किसी भी अधिकारी ने जहमत तक नहीं उठाई।
बता दें कि एक लाख छह हजार बच्चों में बंटने वाले ओआरएस पैकेट के बॉक्स सिविल अस्पताल के क्षय रोग विभाग भवन में ही पिछले कई दिनों से धूल फांक रहे हैं।
जबकि रोजाना यहां से गुजरने वाले स्टोर प्रभारी और डॉक्टरों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। वहीं इस बाबत अधिकारी सही ढंग से जवाब नहीं दे रहे।
तत्कालीन प्रतिरक्षण अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. अनुपमा ने कहा कि उन्होंने यह चार्ज एक अन्य महिला चिकित्सक को दे दिया था।
अब वे इस बारे में कुछ नहीं बता सकती। महिला चिकित्सक ने गर्भवती महिला के केस में बिजी होने की बात कहकर फोन काट दिया। उल्लेखनीय है योजना के अनुसार सघन दस्त निवारण पखवाड़े में 0 से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को ओआरएस पैकेट, जिंक टैबलेट और पंफलेट बांटा जाना था, जो कि 28 जुलाई से 2 अगस्त तक चला।
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7 प्रतिशत बच्चों को निगल लेता है डायरिया
जिले में सात प्रतिशत बच्चों को डायरिया हर साल लील लेता है। यह खुलासा अभियान शुरू होने से पहले प्रेसवार्ता के दौरान जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्वयं किया था।
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इसी के मद्देनजर विभाग ने बरसाती मौसम में फैलने वाले डायरिया पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उपरोक्त अभियान चलाया था। ओआरएस के शेष पैकेट अब बता रहे हैं कि विभाग ने इस काम में किस कदर लापरवाही बरती है।
आशा वर्कर और आंगनबाड़ी केंद्र की थी अहम भूमिका
अभियान सफल बनाने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने आशा वर्कर और आंगनबाड़ी केंद्रों को चुना था, जिसमें 680 आशा वर्कर की ड्यूटी लगाई गई थी। इसके अलावा एक हजार 75 आंगनबाड़ी केंद्रों के कंधों पर भी अभियान की सफलता की जिम्मेदारी डाली गई थी।
शिक्षा विभाग से भी मांगा गया सहयोग
डायरिया से बचाव के लिए चलाए गए अभियान में शिक्षा विभाग से भी सहयोग मांगा गया था। अभियान से पहले इसकी जानकारी सिविल सर्जन डॉ. जेएस ग्रेवाल के साथ मौजूद डॉ. अनुपमा ने पत्रकारों को दी थी।
उन्होंने कहा कि कि डायरिया संक्रमण बीमारी है और खाने से पहले अच्छे ढंग से हाथ न धोने के कारण यह बीमारी चपेट ले सकती है। इसके लिए स्कूलों में बच्चों को भोजन करने से पहले हाथ धोने की प्रक्रिया का डेमो भी दिए जाने की बात कही गई थी।
इस तरह होता है ओआरएस व जिंक टैबलेट का प्रयोग
दस्त लगने पर ओआरएस व जिंक टेबलेट का प्रयोग जरूरी है। इसके लिए एक लीटर पानी को पहले गर्म किया जाता है और फिर पानी को सामान्य तापमान पर आने के बाद उसमें ओआरएस मिलाना होता है।
दस्त आने पर बच्चे को अधिक से अधिक ओआरएस घोल वाला पानी पिलाना जरुरी है, जबकि इस बीमारी लगने के बाद 14 दिन तक हर रोज जिंक टेबलेट बच्चों को देनी होती है।
बचे पैकेट साल भर काम आएंगे : सीएमओ
सीएमओ डॉ. जेएस ग्रेवाल ने कहा कि यह पैकेट स्टोर के भी हो सकते हैं और अगर अभियान के दौरान पैकेट बचे हैं, तो साल भर काम आएंगे।