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आर्गन ट्रांसप्लांट पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस

Tue, 24 May 2016 01:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 24 May 2016 01:53 AM IST
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organ transplant issue: high court notice to central government
कोर्ट - फोटो : file photo

आर्गन ट्रांसप्लांट पर दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। दरअसल देश में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण को लेकर बनाए गए कानून इतने पेचीदा हैं कि पीड़ित व्यक्ति कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के इंतजार में ही दम तोड़ जाते हैं। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बनाए गए मानव अंग एवं उत्तक (टिशू) अधिनियम, 1994 और मानव अंग एवं उत्तक नियम, 2014 के प्रावधानों को चुनौती देते हुए दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका पर अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी।

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पिछले साल अपनी बहन के लिए किडनी ट्रांसप्लांट में भारी अड़चनों का सामना करने वाले चंडीगढ़ निवासी मोनिषा गांधी ने जनहित में यह मामला उठाया है। हाईकोर्ट से अपील की है कि अंगदान और अंग प्रत्यारोपण के नियम ऐसे होने चाहिए, जिनका कोई गलत इस्तेमाल भी नहीं कर सके और पीड़ितों को सुलभता से अंग प्रत्यारोपण की सुविधा मिल सके। याचिका में कहा गया है कि मौजूदा कानूनों में भारी कमियां और बच निकलने के कई रास्ते हैं।
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जस्टिस अजय कुमार मित्तल और राज राहुल गर्ग की डिविजन बेंच के समक्ष दायर याचिका में कहा गया है कि दोनों तरह के अंग प्रत्यारोपण के लिए निर्धारित प्रावधान होने के बावजूद ट्रांसप्लांट एक्ट देश की अंग प्रत्यारोपण की जरूरतों को पूरा करने में भी असमर्थ है। याचिका में कहा गया है कि भारत में अंग प्रत्यारोपण की चिकित्सीय और व्यवहारिक प्रक्रिया में बड़ा अंतर है। हर तरह के ट्रांसप्लांट, खास तौर पर किडनी या एंड स्टेज रेनल डिजीस (ईएसआरडी) में भारी खामियों के कारण पीड़ितों को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ती है।

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याची ने अपनी याचिका में कई अन्य सुझाव भी अदालत के सामने रखे

organ transplant issue: high court notice to central government
कोर्ट - फोटो : file photo

याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने एक जनवरी, 2016 को मृतक गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए आवंटन मानदंड का ड्राफ्ट तो जारी कर दिया है, लेकिन उसे अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है। याचिका के अनुसार, ड्राफ्ट जारी करते हुए कहा गया है कि डायलिसिस सस्ती सुविधा है और किडनी ट्रांसप्लांट के लिए स्वीकार्य वैकल्पिक नुस्खा भी है। हालांकि व्यवहारिक तौर पर यह स्थायी हल नहीं है, क्योंकि डायलिसिस का खर्च 12 से 20 रुपये मासिक बैठता है। याची ने अपनी याचिका में किडनी की मांग को देखते हुए इसके दान का नियमितीकरण करने के अलावा कई अन्य सुझाव भी अदालत के सामने रखे हैं।

दो तरह के अंग प्रत्यारोपण की है अनुमति ट्रांसप्लांट एक्ट के तहत दो तरह के अंग- मृत और जीवित, के प्रत्यारोपण की अनुमति है। मृत अंग प्रत्यारोपण किसी भी व्यक्ति के परिजनों द्वारा उसकी मृत्यु के बाद या स्वयं किसी व्यक्ति द्वारा अपनी मृत्यु से पहले की गई अंग दान की घोषणा के तहत हो सकता है। आमतौर पर मृत व्यक्ति के परिजनों द्वारा ऐसे अंग दान का फैसला लिया जाता है। इसमें खास बात यह है कि केवल उसी मृत व्यक्ति के अंग प्रत्यारोपण के लिए उपयोग में लाए जाते हैं, जिसे ब्रेन-डैड घोषित किया गया है।

ऐसे मृत व्यक्ति के 9 अंग/उत्तक (टिशू) - दोनों आंखें, दोनों किडनियां, दोनों फेफड़े, दिल, लीवर और चमड़ी का प्रत्यारोपण हो सकता है। जीवित अंग प्रत्यारोपण के तहत अंगों का ट्रांसप्लांट चिकित्सीय उद्देश्य से किया जाता है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति द्वारा अपनी मृत्यु से पहले या तो किसी करीबी के लिए या आम लोगों के लिए सेवाभाव से, अंग दान की घोषणा कर दी जाती है। आमतौर में ऐसे मामलों में अपने करीबी व्यक्ति से प्रति प्रेमभाव या किसी कोई खास कारण प्रमुख होता है। इस तरह के अंग प्रत्यारोपण को मंजूरी संबंधित कानून के अधीन बनी आथोराइजेशन कमेटी द्वारा ही दी जाती है।

अंग प्रत्यारोपण की मौजूदा स्थिति जनहित याचिका में नेफ्रोलॉजी की अंतरराष्ट्रीय संस्था की पुस्तक किडनी इंटरनेशनल द्वारा कराए गए सर्वे का हवाला देते हुए बताया गया है कि प्रत्येक 30 व्यक्ति जिन्हें अंग प्रत्यारोपण की जरुरत है, में से केवल एक व्यक्ति को ही अंग मिल पाते हैं। 90 फीसदी लोगों की मौत अंग प्राप्त करने वालों की लंबी सूची में नाम आने से पहले ही हो जाती है। प्रति दस लाख लोगों में अंग ट्रांसप्लांट के नजरिए से 69 देशों में भारत का स्थान 40वां है, जहां अंग ट्रांसप्लांट की उपलब्धता 0.16 प्रति दस लाख व्यक्ति है।

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