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पंजाब: विधानसभा में कांग्रेस नेताओं के करीबियों को भर्ती करने का आरोप, स्पीकर ने जांच का आदेश दिया

Thu, 28 Apr 2022 09:54 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 28 Apr 2022 09:54 PM IST
सार

पंजाब विधानसभा के स्पीकर को गत मंगलवार भेजे पत्र में कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस ने लिखा कि इस साल जनवरी के दौरान उन्होंने अपने स्तर पर जांच करके पंजाब विधानसभा में हुए भर्ती घोटाले का पर्दाफाश किया था।

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Order for inquiry into recruitment of employees in Punjab Vidhan Sabha
पंजाब विधानसभा सत्र। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवा ने पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान विधानसभा में की गई कर्मचारियों की भर्ती की गहन जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस ‘घोटाले’ में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस ने शिकायत दर्ज कराई थी।

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जनवरी में बैंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि पंजाब विधानसभा में साल 2017-2022 तक हुई भर्तियों में अधिकतर लोग कांग्रेस विधायक व मंत्रियों के रिश्तेदार हैं। उन्होंने ‘भर्ती घोटाले’ की जांच की मांग की थी लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उनके आरोपों का खंडन करते हुए जांच कराने से इनकार कर दिया था। 
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दूसरी ओर, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष राणा केपी सिंह इस मामले पर ज्यादा टिप्पणी करने से बचते रहे। हालांकि इस भर्ती घोटाले के आरोपों के बाद से उन्होंने हमेशा यह चुनौती भी दी कि यह साबित करें कि उन्होंने एक भी रिश्तेदार को विधानसभा में भर्ती किया है। राणा केपी ने यहां तक कहा कि यदि उनका कोई रिश्तेदार विधानसभा में भर्ती पाया गया तो वे राजनीति छोड़ देंगे।
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राणा केपी, मनप्रीत व राजा वडि़ंग ने अपने चहेतों को लगवाया: बैंस
पंजाब विधानसभा के स्पीकर को गत मंगलवार भेजे पत्र में कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस ने लिखा कि इस साल जनवरी के दौरान उन्होंने अपने स्तर पर जांच करके पंजाब विधानसभा में हुए भर्ती घोटाले का पर्दाफाश किया था। विधानसभा के पिछले कार्यकाल (2017-2022) जब राणा केपी स्पीकर थे, तब करीब 170 भर्तियां की गईं। 

बैंस ने पत्र में लिखा कि इनमें भाई-भतीजावाद का बोलबाला रहा, जिसमें पूर्व स्पीकर राणा केपी के अलावा पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, पूर्व डिप्टी स्पीकर अजायब सिंह भट्टी और राजा वड़िंग ने अपने चहेतों को विधानसभा में भर्ती कराया। इस घोटाले से सूबे के होनहार और योग्य नौजवानों से रोजगार का अवसर छिन गया। 

उन्होंने यह भी लिखा कि विधानसभा में चहेतों की भर्ती करते हुए आरक्षण के नियम का भी पालन नहीं किया गया। राणा केपी द्वारा बनाई गई भर्ती कमेटी के सदस्यों ने भी अपने रिश्तेदारों को गलत तरीके से भर्ती कराया। इस तरह भर्ती घोटाले में यह सभी माननीय बराबर के भागीदार हैं। बैंस ने विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवा से अपील की है कि इस पूरे घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

कांग्रेस नेताओं के करीबी और रिश्तेदारों को किया गया भर्ती
कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस ने जनवरी में विधानसभा में भर्ती सियासी नेताओं के करीबियों और रिश्तेदारों की जो सूची मीडिया में जारी की थी, वही सूची उन्होंने अपनी शिकायत के साथ विधानसभा स्पीकर को भेजी है। इसके अनुसार सहायक सूचना अधिकारी सिद्धार्थ ठाकुर पूर्व ब्यूरोक्रेट और राणा केपी सिंह के करीबी मित्र बीसी ठाकुर के बेटे हैं। 

सहायक लाइब्रेरियन मनजिंदर सिंह कांग्रेस विधायक सुरजीत सिंह धीमान के भतीजे हैं। सहायक प्रोग्रामर गौरव ठाकुर जिन्हें पहले कॉपी होल्डर और फिर सहायक प्रोग्रामर लगाया गया है राणा केपी के करीबी रिश्तेदार के बेटे हैं। चौकीदार प्रवीण कुमार पूर्व विधायक जोगिंदर सिंह के भतीजे हैं। चौकीदार गौरव राणा भी राणा केपी सिंह के रिश्तेदार हैं और इनके भाई सौरव राणा को भी विधानसभा में क्लर्क लगाया गया है। 

श्री आनंदपुर साहिब के गांव खटाना के दविंदर सिंह को राणा केपी की सिफारिश पर चौकीदार लगाया गया। हरमनदीप जोकि राणा केपी सिंह की पत्नी के गनमैन का बेटा है को भी राणा केपी ने चौकीदार लगवाया। राणा केपी सिंह की रिश्तेदार कामना को क्लर्क नियुक्त किया गया और उनकी भाभी रुचि राणा जोकि राणा केपी की भतीजी हैं को भी विधानसभा में क्लर्क लगाया गया। श्री आनंदपुर साहिब के गांव मेहंदाली खुर्द के राकेश कुमार को राणा केपी की सिफारिश पर पहले तो विधानसभा में क्लर्क लगाया गया और फिर उन्हें बदलकर रोपड़ डीसी आफिस में तैनात कर दिया गया, मनप्रीत बादल से अनाधिकारिक तौर पर कार्यरत अजय कुमार को विधानसभा में क्लर्क लगाया गया है लेकिन वह कभी विधानसभा नहीं आए। क्लर्क मलकीत सिंह स्पीकर के सचिव राम लोक के रिश्तेदार हैं। रोपड़ निवासी पुनीत वालिया को राणा केपी की सिफारिश पर क्लर्क लगाया गया। 

चंडीगढ़ के पूर्व कांग्रेस सांसद पवन बंसल के ड्राइवर के बेटे अवतार सिंह को क्लर्क लगाया गया। मनप्रीत सिंह के स्टाफ के सदस्य के बेटे कुलदीप सिंह मान को क्लर्क लगाया गया, पीआरटीसी के निदेशक के बेटे प्रमोद कुमार को राणा केपी की सिफारिश पर क्लर्क लगाया गया, स्पीकर के सचिव रामलोक की साली अंजू बाला को क्लर्क लगाया, रोपड़ निवासी नवीन चंद्र को खरड़ निवासी दिखाकर राणा केपी की सिफारिश पर क्लर्क लगाया, मनप्रीत बादल की सिफारिश पर हरसिमरनजोत सिंह को क्लर्क लगाया, राणा केपी की करीबी रिश्तेदार सौरव राणा को क्लर्क लगाया और उनके भाई गौरव राणा को भी विधानसभा में नियुक्ति दी।

इनके अलावा, डिप्टी स्पीकर अजायब सिंह भट्टी की भतीजी सुमनप्रीत कौर को क्लर्क लगाया गया। इसमें खास बात यह रही कि सुमनप्रीत कौर को पहले कुक के रूप में डिप्टी स्पीकर के साथ एडजस्ट करते हुए प्रति माह 50 हजार रुपये से ज्यादा वेतन दिया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री के ओएसडी एचएस बाठ की बहू हरिंदर कौर को क्लर्क लगाया गया। 

विधानसभा सचिव शशि लखनपाल मिश्रा की बहू तरुणा शर्मा को क्लर्क और शशि लखनपाल मिश्रा की भतीजी अनुराधा को क्लर्क लगाया गया। इसी तरह राणा केपी सिंह की भतीजी रूचि राणा को भी क्लर्क लगाया गया जबकि राजा वड़िंग की सिफारिश पर हरियाणा के कैथल निवासी जसबीर सिंह को भी क्लर्क लगाया गया। 

रजत शर्मा को राणा केपी की सिफारिश पर क्लर्क लगाया गया। सांसद मनीष तिवारी के ड्राइवर की बेटी गुरनीत कौर और अजायब सिंह भट्टी की रिश्तेदार राजिंदर कौर को क्लर्क लगाया गया। राणा केपी की सिफारिश पर नंगल निवासी मनजिंदरजीत सिंह को क्लर्क लगाया, मनप्रीत बादल के स्टाफ के सदस्य के बेटे जगमीत सिंह को क्लर्क लगाया, अजायब सिंह भट्टी की रिश्तेदार हरिंदर कौर, राणा केपी की सिफारिश पर मलोया निवासी अनुज कुमारी, पंजाब विधानसभा में कांग्रेस पार्टी कार्यालय में कार्यरत एसी कौशिक की रिश्तेदार पूजा रानी, ब्रह्म मोहिंदरा की सिफारिश पर राजपुरा के तेपला निवासी मनीश कुमार, राणा केपी की सिफारिश पर संजीव कुमार, मनप्रीत बादल के पीए की पत्नी सुखनसीब को क्लर्क लगाया गया। शशि लखनपाल मिश्रा के जीजा के बेटे राघव मिश्रा को कापी होल्डर, पूर्व कांग्रेस विधायक गुरचरण सिंह बोपाराय के बेटे साहिल गुरचरण सिंह को कापी होल्डर लगाया गया। इसी तरह अधिकांश पदों पर केवल सिफारिश और करीबी रिश्तेदारों को ही नौकरी दी गई।

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