ज्ञानी हरप्रीत सिंह की स्वीकारता पर लगी मुहर, लौंगोवाल बोले- शहीदों की सूची तैयार करेगी एसजीपीसी
ऑपरेशन ब्लू स्टार की 35वीं बरसी पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह की स्वीकारता पर मुहर लग गई। वहीं शहीदों की सूची तैयार करने की बात कही गई है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा सिख कौम के नाम दिए गए संदेश के दौरान वहां मौजूद उग्रपंथियों व अलगाववादियों द्वारा कोई भी हुल्लड़बाजी नहीं की गई।
ऑपरेशन ब्लू स्टार के शहीदों को श्रद्धासुमन भेंट करने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब के प्रांगण में बैठी संगत व उग्रपंथियों ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह के संदेश को ध्यान से सुना। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अपने संदेश में कहा की सिख नौजवान विदेशों में मजदूरी करने के स्थान पर अपने देश में आकर पढ़ाई करें और अफसर बनें। अकाल ताकत साहिब के नीचे सभी पंथक संगठन एकजुट हों।
वर्ष 2015 के बाद यह पहला अवसर था कि जत्थेदार अकाल तख्त साहिब द्वारा कौम के नाम दिए जा रहे संदेश के दौरान कोई भी नारेबाजी नहीं हुई। जत्थेदार हरप्रीत सिंह ने भी परंपरा से हट कर अपने संदेश को मात्र दो मिनट में ही निपटा दिया। वर्ष 1997 के बाद श्री अकाल तख्त साहिब में आयोजित इस कार्यक्रम में जत्थेदार अकाल तख्त साहिब को कौम के नाम संदेश पढ़ने में आधे घंटे से अधिक का समय लग जाता था।
कौम के नाम संदेश के दौरान हुल्लड़बाजी न होने से स्पष्ट हो गया कि पूर्व जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह द्वारा गुरमीत राम रहीम सिंह को दी गई माफी व संगत के विरोध के बाद माफी को वापिस लेने से श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के विरुद्ध उभरा विरोध शांत हो गया है।
वहीं शिरोमणि गुरु द्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष भाई गोविन्द सिंह लोंगोवाल ने कहा है की ऑपरेशन ब्लू स्टार की 36वीं बरसी से पहले छह जून 1984 को भारतीय सेना के हमले में शहीद हुए सिखों की सूची तैयार की जाएगी। यह सूची सिख कौम को समर्पित की जाएगी।
कार्यक्रम से दूरी बनाकर रखता है बादल परिवार
ऑपरेशन ब्लू स्टार पर राजनीति कर पंथक वोट मांगने वाली शिअद का कोई भी बड़ा नेता श्री अकाल तख्त साहिब में आयोजित कार्यक्रम में नहीं पहुंचता है। वर्ष 2003 में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पहली बार बरसी कार्यक्रम में पहुंचे थे। इससे पहले व बाद में बादल परिवार ने इस कार्यक्रम में दूरी बना कर रखी। इस कार्यक्रम में बादल समर्थक एसजीपीसी सदस्य व कुछ विधायक ही इस कार्यक्रम ने शामिल होते आए है।
एकजुटता से पंथक मसलों का हल होगा
हर सिख को कौम की चढ़दी कला के लिए पुरानी पंथक परंपराओं पर मजबूती से पहरा देना चाहिए। युवा सिखों के विदेश पलायन करने पर चिंता जताते हुए जत्थेदार ने कहा कि यदि रुझान इसी तरह रहा तो भविष्य में पंजाब के उच्च पदों पर सिख अधिकारी नहीं मिलेंगे। सिख कौम इस मामले पर गंभीरता से विचार करे। विदेशों में मजदूरी करने के बजाय अपने देश में अधिकारी बने।