सर्वे : चंडीगढ़ के 47 प्रतिशत इलाकों में नहीं जाती सीटीयू बसें, एक करोड़ के सर्वे में खुलासा
- चंडीगढ़ के सार्वजनिक परिवहन पर गुजरात के पर्यावरण नियोजन और प्रौद्योगिकी केंद्र (सेप्ट यूनिवर्सिटी) ने किया सर्वे
- एक साल में तैयार हुई 120 पेजों की रिपोर्ट
- रिपोर्ट में खुलासा, चंडीगढ़ के 47 प्रतिशत इलाकों में नहीं जाती सीटीयू की बसें
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चंडीगढ़ के सार्वजनिक परिवहन पर गुजरात के पर्यावरण नियोजन और प्रौद्योगिकी केंद्र (सेप्ट यूनिवर्सिटी) ने सर्वे किया है। एक साल में तैयार 120 पेजों की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चंडीगढ़ के 47 प्रतिशत इलाकों में सीटीयू की बसें नहीं जातीं। ऐसे में यहां के लोगों को ऑटो का ही सहारा है। इस सर्वे के लिए वर्ल्ड बैंक ने एक करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वर्ल्ड बैंक चंडीगढ़ परिवहन विभाग के साथ मिलकर कई योजनाओं पर काम कर रहा है।
रिपोर्ट में परिवहन विभाग को आइना दिखाते हुए बताया गया है कि चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) बसों के संचालन की योजना ठीक नहीं है। कुछ सेक्टरों में जाने के लिए जरूरत से ज्यादा बसें हैं तो कुछ सेक्टर व इलाकों के लिए बस ही नहीं है। एक बस के जाने के बाद दूसरी बस के आने तक लोगों को 20 मिनट से 40 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है।
वहीं, कुछ मार्गों पर सवारियां बहुत हैं, लेकिन उन मार्गों पर सीटीयू की ओर से बस का संचालन ही नहीं किया जाता। सेप्ट यूनिवर्सिटी ने उदाहरण देते हुए बताया है कि विकास नगर, मलोया, मोहाली के सेक्टर-78, पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया और शिक्षा सदन समेत कई ऐसे मार्ग हैं, जहां के लिए सवारियां तो बहुत हैं लेकिन सीटीयू की बसें पर्याप्त नहीं हैं। इसके अलावा कैंबवाला, सिविल सचिवालय और माता मनसा देवी वाले मार्ग पर सवारी कम हैं लेकिन बसें ज्यादा हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, शहर में सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग तो लोग करते हैं, लेकिन मात्र 11 प्रतिशत लोग ही सीटीयू बसों में सफर करते हैं। अगर कुल सार्वजनिक परिवहन की बात करें तो 43 फीसदी लोग सीटीयू को और 57 प्रतिशत लोग ऑटो-टैक्सी व अन्य साधनों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ऑटो-टैक्सी में सफर करने वाले 40 प्रतिशत लोग पांच किमी से कम की दूरी का सफर करते हैं। कम दूरी के लिए लोग सीटीयू की बसों में नहीं जाते, क्योंकि सीटीयू के बस स्टॉप सही जगह नहीं हैं और किराये में भी अंतर नहीं है। ऐसे में कम दूरी के लिए बसों में किराया पांच रुपये कर देना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक बस के जाने के बाद दूसरी बस के आने के समय (फ्रीक्वेंसी) को कम करना चाहिए। अगर परिवहन विभाग फ्रीक्वेंसी को 10 मिनट करना चाहता है तो इसके लिए 700 बसों की जरूरत होगी। अभी सीटीयू की 358 बसें ही शहर में चल रही हैं। हालांकि अगले कुछ महीनों में 40 ई-बसें और आ जाएंगी।
अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार, बसों में एक तिहाई सवारियों की कमी है। शहर की सड़कों पर दौड़ रहीं बसों में औसतन 22 फीसदी सीटें ही भर पा रहीं हैं, जबकि मानक के अनुसार 60 से 70 प्रतिशत होनी चाहिए। रिपोर्ट में परिवहन विभाग के इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएम) का भी जिक्र किया गया है। कहा है कि इससे लोगों को सहूलियत हो रही है, लेकिन बसों की संख्या बढ़ेगी तभी लोग इसका लाभ ले पाएंगे।
सेप्ट यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट मिल गई है। रिपोर्ट काफी विस्तृत है, जिसे विभाग के विभिन्न अधिकारियों द्वारा पढ़ा जा रहा है। रिपोर्ट में समस्या के साथ समाधान भी दिया गया है। सार्वजनिक परिवहन को लोगों के लिए और अधिक सुगम बनाने के लिए ही यह सर्वे कराया गया था। अब वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा के बाद रिपोर्ट के सुझावों पर काम किया जाएगा। - उमाशंकर गुप्ता, निदेशक, परिवहन विभाग