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कोरोना का ऐसा डर: सरकारी अस्पताल में एक घंटे में देखे जा रहे महज छह मरीज, नॉन कोविड मरीजों के लिए लंबा हुआ इंतजार
Wed, 04 Aug 2021 02:38 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 04 Aug 2021 02:38 PM IST
सार
संक्रमण से बचाव का हवाला देकर अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी शुरू होने पर एक घंटे में महज चार मरीज देखने का निर्देश दिया था। पंजीकरण की संख्या बढ़ने पर इस संख्या को चार से बढ़ाकर छह कर दिया गया है।
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जीएमसीएच 32
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना संक्रमण की दर शून्य पर आने के बावजूद नॉन कोविड मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल सेक्टर 32 की जिस ओपीडी में एक दिन में डेढ़ से दो हजार मरीज देखे जाते थे वहां प्रत्येक ओपीडी में अभी प्रति घंटे महज छह मरीज देखे जा रहे हैं यानी एक डॉक्टर सिर्फ 36 मरीज को ही एक दिन में परामर्श दे रहा है। ऐसे में महीनों से इलाज का इंतजार कर रहे हजारों मरीज अपने नंबर के इंतजार में छटपटा रहे हैं।
पहले एक घंटे में देखे जा रहे थे चार मरीज, अब छह
संक्रमण से बचाव का हवाला देकर अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी शुरू होने पर एक घंटे में महज चार मरीज देखने का निर्देश दिया था। पंजीकरण की संख्या बढ़ने पर इस संख्या को चार से बढ़ाकर छह कर दिया गया है। जीएमसीएच- 32 की वेबसाइट पर पंजीकरण के बाद ओपीडी में आने पर मरीजों को पहले कोरोना जांच और फिर तय संख्या के मानक के अनुसार ही इलाज मिल पा रहा है।
मरीजों को पहले की तरह ओपीडी खुलने का इंतजार
कोविड के कारण महीनों से पीजीआई और जीएमसीएच- 32 की ओपीडी खुलने का इंतजार कर रहे मरीजों में निराशा है। उनका कहना है कि संक्रमण दर कम हो या ज्यादा उन्हें इलाज नहीं ही मिलेगा। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि सरकारी अस्पताल की व्यवस्था से विश्वास उठने लगा है। मरीज और उनके परिजनों का कहना है कि महामारी से बचाव के मानक के नाम पर सिर्फ गरीब और जरूरतमंद मरीज को परेशान किया जा रहा है। गरीब अपना घर और जमीन बेचकर निजी अस्पताल में इलाज कराने को मजबूर हो रहा है, लेकिन व्यवस्था बदलने की कोई सुध नहीं ले रहा है।
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पहले एक घंटे में देखे जा रहे थे चार मरीज, अब छह
संक्रमण से बचाव का हवाला देकर अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी शुरू होने पर एक घंटे में महज चार मरीज देखने का निर्देश दिया था। पंजीकरण की संख्या बढ़ने पर इस संख्या को चार से बढ़ाकर छह कर दिया गया है। जीएमसीएच- 32 की वेबसाइट पर पंजीकरण के बाद ओपीडी में आने पर मरीजों को पहले कोरोना जांच और फिर तय संख्या के मानक के अनुसार ही इलाज मिल पा रहा है।
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मरीजों को पहले की तरह ओपीडी खुलने का इंतजार
कोविड के कारण महीनों से पीजीआई और जीएमसीएच- 32 की ओपीडी खुलने का इंतजार कर रहे मरीजों में निराशा है। उनका कहना है कि संक्रमण दर कम हो या ज्यादा उन्हें इलाज नहीं ही मिलेगा। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि सरकारी अस्पताल की व्यवस्था से विश्वास उठने लगा है। मरीज और उनके परिजनों का कहना है कि महामारी से बचाव के मानक के नाम पर सिर्फ गरीब और जरूरतमंद मरीज को परेशान किया जा रहा है। गरीब अपना घर और जमीन बेचकर निजी अस्पताल में इलाज कराने को मजबूर हो रहा है, लेकिन व्यवस्था बदलने की कोई सुध नहीं ले रहा है।
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संक्रमण से बचाव के मानकों का पालन करते हुए यह व्यवस्था की गई है। अगर अचानक मरीजों की संख्या बढ़ाई गई तो स्क्रीनिंग और सामाजिक दूरी के मानकों का पालन करने में परेशानी होगी। धीरे-धीरे मरीजों की संख्या बढ़ाई जा रही है। -डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमसीएच- 32