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पीजीआई में ऑनलाइन व्यवस्था ध्वस्त: एडवांस आई सेंटर की ओपीडी में अव्यवस्था, मरीजों को 7 घंटे बाद मिला इलाज

Sat, 27 Dec 2025 09:39 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 27 Dec 2025 09:39 AM IST
सार

ऑनलाइन अपॉइंटमेंट में मिले समय के अनुसार पीजीआई पहुंचने के बाद भी उन्हें 5 से 7 घंटे इंतजार करना पड़ा। मरीज भूखे-प्यासे डॉक्टर के कमरे के बाहर बारी आने का इंतजार करते रहे। ऑनलाइन सिस्टम के दावों की व्यवस्था ध्वस्त रही।

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Online system collapses at PGI Advanced Eye Centre patients received treatment after 7 hours
पीजीआई में लगी मरीजों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ पीजीआई के एडवांस आई सेंटर में भीड़ और अव्यवस्था से बचने के लिए लागू की गई ऑनलाइन ओपीडी पंजीकरण व्यवस्था शुक्रवार को पूरी तरह फेल नजर आई। 
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हालात ऐसे बने कि ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेकर पहुंचे मरीजों को भी सामान्य मरीजों की तरह लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट में मिले समय के अनुसार पीजीआई पहुंचने के बाद भी उन्हें 5 से 7 घंटे इंतजार करना पड़ा। मरीज भूखे-प्यासे डॉक्टर के कमरे के बाहर बारी आने का इंतजार करते रहे। ऑनलाइन सिस्टम के दावों की व्यवस्था ध्वस्त रही।

विंटर वेकेशन के कारण डॉक्टरों की कमी  

विंटर वेकेशन के कारण डॉक्टरों की कमी भी साफ नजर आई। महज एक सीनियर रेजिडेंट के हवाले सैकड़ों मरीज थे। डॉक्टर ने चेकअप करने के साथ ही कम्प्यूटर में एंट्री और इमरजेंसी भी संभाल रही थी। इससे मरीजों को ज्यादा दिक्कत हुई। एकमात्र डॉक्टर ने देर शाम (6 बजे तक) तक मरीजों को परामर्श दिया।
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केस 1 : बुजुर्ग मरीज को घंटों लाइन में रहना पड़ा

पंचकूला निवासी 70 वर्षीय ओमप्रकाश को मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद फॉलोअप के लिए आए थे। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन पंजीकरण करवाया हुआ था। सुबह करीब साढ़े छह बजे अस्पताल पहुंचने के बावजूद उन्हें पर्ची के लिए लंबी लाइन में लगा दिया गया। उन्होंने कहा कि सोचा था ऑनलाइन नंबर से जल्दी काम हो जाएगा लेकिन यहां तो कोई अलग लाइन ही नहीं थी। धक्का लगने से पैर में दर्द बढ़ गया।
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केस 2 : महिला मरीज की तबीयत बिगड़ी

लुधियाना से आई डायबिटिक रेटिनोपैथी की मरीज सुनीता (45) भी अव्यवस्था का शिकार हुईं। परिजनों के अनुसार सुबह से अस्पताल आकर डॉक्टर को दिखाने के लिए भूखे रहने के कारण उन्हें चक्कर आ गए और कुछ देर के लिए बैठाना पड़ा। सुनीता का कहना था कि ऑनलाइन पंजीकरण के बावजूद स्टाफ ने उन्हें सामान्य कतार में खड़ा कर दिया जहां न बैठने की व्यवस्था थी और न ही बुजुर्ग व बीमार मरीजों के लिए कोई प्राथमिकता।

सीमित काउंटरों पर एक साथ सभी मरीजों की एंट्री

मरीजों का आरोप है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण के लिए अलग-अलग काउंटर या कतारें स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं की गईं। सीमित काउंटरों पर एक साथ सभी मरीजों की एंट्री की जा रही थी। कई मरीजों को यह भी जानकारी नहीं मिल सकी कि ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद उन्हें कहां रिपोर्ट करना है। स्टाफ ने बताया कि अब ऑनलाइन व्यवस्था बंद कर दी गई है।

ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया और जमीनी हकीकत

पीजीआई में मरीजों को राहत देने के लिए फिलहाल 52 में से 27 विभागों में ऑनलाइन प्री-रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध है। संस्थान में 24 से अधिक विशेष क्लीनिक भी संचालित किए जा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि इससे ओपीडी पंजीकरण की भीड़ कम हो रही है लेकिन आई सेंटर की ओपीडी मेंतस्वीर अलग दिखी। ओपीडी पंजीकरण के लिए पीजीआई की वेबसाइट के पेशेंट केयर विकल्प के जरिए ऑनलाइन पंजीकरण किया जा सकता है। नए मरीजों को पूरी जानकारी भरनी होती है जबकि पुराने मरीज सीआर नंबर के जरिए ओटीपी जनरेट कर पंजीकरण कर सकते हैं। प्री-रजिस्ट्रेशन कराने वाले मरीजों को निर्धारित दिन पर अलग ऑनलाइन पंजीकरण काउंटर पर सुबह आठ से 11 बजे (सोमवार से शुक्रवार) और शनिवार व राजपत्रित अवकाश पर सुबह आठ से साढ़े 10 बजे तक अपना सीआर नंबर दिखाना होता है। 


मरीजों को लंबी कतार से बचाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण सिस्टम लागू किया गया है। 25 से ज्यादा विभागों में सुविधा दी जा रही है। मरीजों की सहूलियत के लिए अलग काउंटर बनाए गए हैं। जिससे मरीजों को इंतजार न करना पड़े। -पीजीआई प्रवक्ता
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