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अमज्योत के मां-बाप बोले- एक साल का प्रतिबंध गलत, जरूरत पड़ी तो कोर्ट जाएंगे
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 09 Jun 2018 03:11 PM IST
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अमज्योत के मां-बाप
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जिसने विदेशों में देश का नाम रोशन किया, आज उस पर बॉस्केटबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया ने आरोप लगाते हुए एक साल का प्रतिबंध लगा दिया। यह सरासर एक तरफा फैसला है। हम इसके बारे में अपील करेंगे, अगर हमारी बात नहीं मानी गई तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से परहेज नहीं करेंगे। यह कहना है बास्केटबॉल के खिलाड़ी अमज्योत के पिता मोहिंदर गिल और मां निर्मल जीत कौर। इन दोनों ने शुक्रवार को प्रेस क्लब में एक प्रेस वार्ता कर अपने बेटे का पक्ष लिया। इन दानों ने बॉस्केटबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने भेदभाव कर हमारे बेटे पर प्रतिबंध लगवाया। उन्होंने कहा कि खेल में कहासुनी और तू-तू, मैं-मैं होती रहती है। इस बात के लिए किसी भी खिलाड़ी को इतनी कठोर सजा नहीं दी जाती।
यह था मामला
आरोप है कि कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान अमज्योत का बर्ताव खेल कोर्ट और उसके बाहर ठीक नहीं था। एक मैच के दौरान वह अपने साथी अर्शप्रीत भुल्लर से भिड़ गए और उन्हें थप्पड़ भी जड़ दिया। जिसकी शिकायत अर्शप्रीत ने की। उन्होंने कहा कि अमज्योत ने नेशनल कोच के साथ भी गलत व्यवहार किया। इसी कारण बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) ने एक साल के लिए बैन लगा दिया। इसके चलते अब वह वह भारतीय बास्केटबॉल टीम की ओर से नहीं खेल सेकेंगे।
प्रतिबंध को गलत बताया
बेटे पर लगाए बैन को अभिभावकों ने गतल बताया और कहा कि कि फेडरेशन ने केवल एक ही पक्ष की सुन कर उनके बेटे पर बैन लगा दिया है। जबकि अमज्योत को सफाई देने का मौका तक नहीं दिया गया। यह बात बिलकुल गलत है। फेडरेशन को दोनों पक्षों की सुनने के बाद कोई फैसला लेना चाहिए था। अमज्योत सिंह के अभिभावकों ने बीएफआई पर भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बॉस्केटबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव चंद्रमुखी शर्मा ने अमज्योत को मिलने के लिए घर बुलाया था।
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हमारा बेटा सुबह से लेकर शाम तक उनके घर के बाहर खड़ा रहा मगर चंद्रमुखी उससे नहीं मिले। मां निर्मल ने कहा कि खेलते वक्त को हर स्पोर्ट्स पर्सन अग्रेसिव हो जाता है। उन्होंने गौतम गंभरी, विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण दिया जो बहुत अग्रेसिव हैं। उन्होंने कहा कि उनका बेटा बॉस्केटबाल का शानदार खिलाड़ी है जिसका बस एक ही उद्देश्य है देश का नाम रोशन करना। ऐसे खिलाड़ी के साथ इस प्रकार का व्यवहार सही नहीं है।
अमज्योत ने मैच के बीच में साथी खिलाड़ी के मारपीट की। यही नहीं उसने कोच और कप्तान को भी गलत बोला। इस बारे में हाई कमान ने एक साल प्रतिबंध का आदेश दिया था। उसी का पालन किया गया।
- चंद्रमुखी, सचिव बॉस्केटबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया
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यह था मामला
आरोप है कि कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान अमज्योत का बर्ताव खेल कोर्ट और उसके बाहर ठीक नहीं था। एक मैच के दौरान वह अपने साथी अर्शप्रीत भुल्लर से भिड़ गए और उन्हें थप्पड़ भी जड़ दिया। जिसकी शिकायत अर्शप्रीत ने की। उन्होंने कहा कि अमज्योत ने नेशनल कोच के साथ भी गलत व्यवहार किया। इसी कारण बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) ने एक साल के लिए बैन लगा दिया। इसके चलते अब वह वह भारतीय बास्केटबॉल टीम की ओर से नहीं खेल सेकेंगे।
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प्रतिबंध को गलत बताया
बेटे पर लगाए बैन को अभिभावकों ने गतल बताया और कहा कि कि फेडरेशन ने केवल एक ही पक्ष की सुन कर उनके बेटे पर बैन लगा दिया है। जबकि अमज्योत को सफाई देने का मौका तक नहीं दिया गया। यह बात बिलकुल गलत है। फेडरेशन को दोनों पक्षों की सुनने के बाद कोई फैसला लेना चाहिए था। अमज्योत सिंह के अभिभावकों ने बीएफआई पर भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बॉस्केटबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव चंद्रमुखी शर्मा ने अमज्योत को मिलने के लिए घर बुलाया था।
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हमारा बेटा सुबह से लेकर शाम तक उनके घर के बाहर खड़ा रहा मगर चंद्रमुखी उससे नहीं मिले। मां निर्मल ने कहा कि खेलते वक्त को हर स्पोर्ट्स पर्सन अग्रेसिव हो जाता है। उन्होंने गौतम गंभरी, विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण दिया जो बहुत अग्रेसिव हैं। उन्होंने कहा कि उनका बेटा बॉस्केटबाल का शानदार खिलाड़ी है जिसका बस एक ही उद्देश्य है देश का नाम रोशन करना। ऐसे खिलाड़ी के साथ इस प्रकार का व्यवहार सही नहीं है।
अमज्योत ने मैच के बीच में साथी खिलाड़ी के मारपीट की। यही नहीं उसने कोच और कप्तान को भी गलत बोला। इस बारे में हाई कमान ने एक साल प्रतिबंध का आदेश दिया था। उसी का पालन किया गया।
- चंद्रमुखी, सचिव बॉस्केटबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया