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'राम रहीम के समर्थकों ने दिए ऐसे जख्म, भुलाए से नही भूलता तबाही का वो मंजर'
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Mon, 25 Sep 2017 10:45 AM IST
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Ram Rahim Verdict
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राम रहीम के समर्थकों ने पंचकूला को जला दिया था। 35 लोग मारे गए, लेकिन जख्म इतने गहरे हैं कि एक महीने बाद भी तबाही का वो मंजर नहीं भूलता। ये कहना है पंचकूलावासियों का। 25 अगस्त को पंचकूला में जब डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को विशेष सीबीआई ने दोषी करार दिया तो उपद्रवियों ने इस कदर कहर बरपाया कि हिंसा के वो जख्म अब भी शहरवासियों के जेहन में कैद हैं।
हिंसा और आगजनी की साजिश के मामले में 170 एफआईआर दर्ज कर, 1016 आरोपियों की गिरफ्तारियां हुईं। लेकिन डेरा प्रकरण में जिन बेगुनाहों की संपत्ति और वाहनों का नुकसान हुआ, उन्हें अब भी मुआवजे का इंतजार है। प्रशासन ने मुआवजे के लिए आवेदन भी मांगे, लेकिन इस दिशा में धीमी पहल से मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। धारा-144 के बावजूद देश के अलग अलग हिस्सों से डेरा समर्थकों की शक्ल में हजारों दंगाई भी पहुंचे, जिनकी वजह से पंचकूला की सड़कों पर इंसानी खून के धब्बे छोड़ दिए।
शहर के कुछ सेक्टरों में दहशत के कारण लोग अपने घरों को छोड़ दूसरे शहरों में भी चले गए थे। दंगाइयों ने न सरकारी दफ्तरों, निजी परिसरों और संस्थानों के अलावा सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया। शहर के महत्वपूर्ण ट्रैफिक लाइट प्वाइंट्स पर लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए गए तो अग्रसेन चौराहा, अग्रवाल भवन, बैंक, होटलों के अलावा सेक्टर-दो और चार के सरकारी दफ्तरों को भी दंगाइयों ने निशाना बनाया। इसमें पंचकूला वासियों को करोड़ों का नुकसान हुआ तो हिंसा में 35 मौतें भी हुईं।
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हिंसा और आगजनी की साजिश के मामले में 170 एफआईआर दर्ज कर, 1016 आरोपियों की गिरफ्तारियां हुईं। लेकिन डेरा प्रकरण में जिन बेगुनाहों की संपत्ति और वाहनों का नुकसान हुआ, उन्हें अब भी मुआवजे का इंतजार है। प्रशासन ने मुआवजे के लिए आवेदन भी मांगे, लेकिन इस दिशा में धीमी पहल से मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। धारा-144 के बावजूद देश के अलग अलग हिस्सों से डेरा समर्थकों की शक्ल में हजारों दंगाई भी पहुंचे, जिनकी वजह से पंचकूला की सड़कों पर इंसानी खून के धब्बे छोड़ दिए।
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शहर के कुछ सेक्टरों में दहशत के कारण लोग अपने घरों को छोड़ दूसरे शहरों में भी चले गए थे। दंगाइयों ने न सरकारी दफ्तरों, निजी परिसरों और संस्थानों के अलावा सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया। शहर के महत्वपूर्ण ट्रैफिक लाइट प्वाइंट्स पर लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए गए तो अग्रसेन चौराहा, अग्रवाल भवन, बैंक, होटलों के अलावा सेक्टर-दो और चार के सरकारी दफ्तरों को भी दंगाइयों ने निशाना बनाया। इसमें पंचकूला वासियों को करोड़ों का नुकसान हुआ तो हिंसा में 35 मौतें भी हुईं।
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तीन अब भी फरार
Ram Rahim Verdict
पंचकूला में हुई हिंसा के बाद पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तेजी से गिरफ्तारियां कीं। लेकिन डेरा प्रमुख को फरार कराने की साजिश में शामिल आरोपियों ने कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए पंचकूला में हिंसा का तांडव किया। मामले में अब तक हनीप्रीत इंसा, आदित्य इंसा और पवन इंसा सहित कुछ अन्य आरोपियों की हिंसा भड़काने में भूमिका होने के बावजूद उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।
जेड प्लस सिक्योरिटी पर सवालिया निशान
डेरा प्रमुख को फरार कराने की साजिश में शामिल जेड प्लस सिक्योरिटी में तैनात सुरक्षा कर्मियों की भूमिका ने देश की सुरक्षा प्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। सवाल है कि सरकार की तनख्वाह पर सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने ही इस योजना को अंजाम तक पहुंचाने की साजिश में शामिल थे।
देश की अग्रणी सुरक्षा पर उठे इस तरह के सवालों ने सुरक्षा व्यवस्था को भी घेरे में खड़ा कर दिया है। हालांकि, इस प्रकरण में शामिल तमाम आरोपियों की गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है, लेकिन काफिले में तैनात सुरक्षा कर्मियों की पहले क्यों नहीं जांच की गई, यह अभी भी एक सवाल है।
जेड प्लस सिक्योरिटी पर सवालिया निशान
डेरा प्रमुख को फरार कराने की साजिश में शामिल जेड प्लस सिक्योरिटी में तैनात सुरक्षा कर्मियों की भूमिका ने देश की सुरक्षा प्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। सवाल है कि सरकार की तनख्वाह पर सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने ही इस योजना को अंजाम तक पहुंचाने की साजिश में शामिल थे।
देश की अग्रणी सुरक्षा पर उठे इस तरह के सवालों ने सुरक्षा व्यवस्था को भी घेरे में खड़ा कर दिया है। हालांकि, इस प्रकरण में शामिल तमाम आरोपियों की गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है, लेकिन काफिले में तैनात सुरक्षा कर्मियों की पहले क्यों नहीं जांच की गई, यह अभी भी एक सवाल है।