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टिफिन बम में था डेढ़ किलो आरडीएक्स : एसएसपी चहल
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चंडीगढ़। हाई सिक्योरिटी बुड़ैल जेल के पीछे दीवार के पास मिले टिफिन बम में डेढ़ किलो आरडीएक्स था। एसएसपी कुलदीप सिंह चहल ने कहा कि अभी प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल के आसपास का डंप डाटा उठाया गया है। संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच की जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि जेल के पीछे दीवार के पास लगी आग दो मिनट देरी से बुझती तो टिफिन बम मौके पर फट सकता था। इससे दीवार उड़ सकती थी। गनीमत रही कि ऑपरेशन सेल के डीएसपी जसबीर सिंह और निरीक्षक अमनजोत सिंह सुरक्षा के मद्देनजर जेल का जायजा लेने के दौरान जेल के पीछे पहुंच गए और बड़ी घटना होने से बच गई। पुलिस के अनुसार शनिवार रात करीब 7 बजकर 40 मिनट पर टिफिन बम मिला था। उधर, अधिकारियों का कहना है कि एनएसजी की ओर से लिए गए सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इसकी पुष्टि होगी कि बम में क्या था। इस मामले में निरीक्षक अमनजोत सिंह की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया था।
आईजी जेल दीपक पुरोहित के निर्देश पर जेल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। जेल के बाहर 42 एचडी कैमरे लगाए जाएंगे। हालांकि इससे पहले जेल के अंदर 201 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। 20 दिन पहले बुड़ैल जेल और आसपास संदिग्ध गतिविधियां होने का इनपुट मिलने के बाद आईजी जेल ने एसएसपी कुलदीप सिंह चहल, एसपी ऑपरेशन केतन बंसल और डीएसपी पीसीआर को इनपुट के बाद सुरक्षा बढ़ाने के लिए निर्देश दिए थे। जेल के बाहर क्यूआरटी वैन लगाने के साथ पीसीआर पेट्रोलिंग भी बढ़ा दी गई थी। इसके बावजूद कोई बम रख गया। बम मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
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चंडीगढ़ मामले में रोपड़ के आरोपियों का हाथ नहीं
ऑपरेशन सेल और अपराध शाखा ने नवांशहर जाकर कुलदीप सन्नी सहित पांच आरोपियों से पूछताछ की है। इन आरोपियों ने नवांशहर में अपराध जांच एजेंसी (सीआईए) के दफ्तर पर बम फेंका था और रोपड़ की पुलिस चौकी कलवां में भी धमाका किया था। धमाके के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ में आरोपियों की चंडीगढ़ में मिले टिफिन बम के मामले में कोई भूमिका नहीं मिली है। नवांशहर के एसएसपी संदीप शर्मा ने बताया कि आरोपियों ने पंजाब के गैंगस्टर हरविंदर सिंह रिंदा के निर्देश पर रोपड़ के थाना नूरपूरबेदी की कलवां पुलिस चौकी पर बम फेंका था, लेकिन चंडीगढ़ के मामले में अभी कोई भूमिका नहीं दिखी है।
रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा बम में क्या था
एनएसजी की टीम टिफिन बम से धमाका कराने के बाद उसके सैंपल अपने साथ ले गई। 72 घंटे बाद लैब से इसकी रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कि बम में क्या प्रयोग किया गया था। पुलिस के अनुसार सुरक्षा के लिहाज से आर्मी और एनएसजी को बुलाया गया था। सुरक्षा व्यवस्था को अब और चौकस कर दिया गया है।
बम बनाने वाला ही बता सकता है अंदर क्या है
छत्तीसगढ़ बम डिस्पोजल टीम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टिफिन बम को आईईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) कहते हैं। इस बम में सेंसर होता है। बम बनाने वाले शख्स को ही पता होता है कि उसने बम को किस तरीके से विस्फोट करवाना है। विस्फोट के लिए बम में कौन सा मैकेनिज्म सेट किया है। बम में प्रेशर सेंसर, हीट सेंसर, वॉयस सेंसर और रिमोट से भी विस्फोट किया जा सकता है। हीट सेंसर धूप या आग लगने से, प्रेशर सेंसर बम पर वजन पढ़ने से, जैसे बम पर पैर रखते या कोई वाहन गुजरने से और वॉयस सेंसर बम के पास आवाज होने से फट हो सकता है। इसके अलावा रिमोट से कंट्रोल कर बम विस्फोट किया जा सकता है। हालांकि रिमोट को ज्यादा दूर से नहीं कंट्रोल किया जा सकता। बम बनाने वाले शख्स के अलावा कोई भी यह नहीं बता सकता कि उस बम में कौन सा सेंसर लगाया गया है।
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जांच में यह भी सामने आया है कि जेल के पीछे दीवार के पास लगी आग दो मिनट देरी से बुझती तो टिफिन बम मौके पर फट सकता था। इससे दीवार उड़ सकती थी। गनीमत रही कि ऑपरेशन सेल के डीएसपी जसबीर सिंह और निरीक्षक अमनजोत सिंह सुरक्षा के मद्देनजर जेल का जायजा लेने के दौरान जेल के पीछे पहुंच गए और बड़ी घटना होने से बच गई। पुलिस के अनुसार शनिवार रात करीब 7 बजकर 40 मिनट पर टिफिन बम मिला था। उधर, अधिकारियों का कहना है कि एनएसजी की ओर से लिए गए सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इसकी पुष्टि होगी कि बम में क्या था। इस मामले में निरीक्षक अमनजोत सिंह की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया था।
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आईजी जेल दीपक पुरोहित के निर्देश पर जेल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। जेल के बाहर 42 एचडी कैमरे लगाए जाएंगे। हालांकि इससे पहले जेल के अंदर 201 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। 20 दिन पहले बुड़ैल जेल और आसपास संदिग्ध गतिविधियां होने का इनपुट मिलने के बाद आईजी जेल ने एसएसपी कुलदीप सिंह चहल, एसपी ऑपरेशन केतन बंसल और डीएसपी पीसीआर को इनपुट के बाद सुरक्षा बढ़ाने के लिए निर्देश दिए थे। जेल के बाहर क्यूआरटी वैन लगाने के साथ पीसीआर पेट्रोलिंग भी बढ़ा दी गई थी। इसके बावजूद कोई बम रख गया। बम मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
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चंडीगढ़ मामले में रोपड़ के आरोपियों का हाथ नहीं
ऑपरेशन सेल और अपराध शाखा ने नवांशहर जाकर कुलदीप सन्नी सहित पांच आरोपियों से पूछताछ की है। इन आरोपियों ने नवांशहर में अपराध जांच एजेंसी (सीआईए) के दफ्तर पर बम फेंका था और रोपड़ की पुलिस चौकी कलवां में भी धमाका किया था। धमाके के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ में आरोपियों की चंडीगढ़ में मिले टिफिन बम के मामले में कोई भूमिका नहीं मिली है। नवांशहर के एसएसपी संदीप शर्मा ने बताया कि आरोपियों ने पंजाब के गैंगस्टर हरविंदर सिंह रिंदा के निर्देश पर रोपड़ के थाना नूरपूरबेदी की कलवां पुलिस चौकी पर बम फेंका था, लेकिन चंडीगढ़ के मामले में अभी कोई भूमिका नहीं दिखी है।
रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा बम में क्या था
एनएसजी की टीम टिफिन बम से धमाका कराने के बाद उसके सैंपल अपने साथ ले गई। 72 घंटे बाद लैब से इसकी रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कि बम में क्या प्रयोग किया गया था। पुलिस के अनुसार सुरक्षा के लिहाज से आर्मी और एनएसजी को बुलाया गया था। सुरक्षा व्यवस्था को अब और चौकस कर दिया गया है।
बम बनाने वाला ही बता सकता है अंदर क्या है
छत्तीसगढ़ बम डिस्पोजल टीम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टिफिन बम को आईईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) कहते हैं। इस बम में सेंसर होता है। बम बनाने वाले शख्स को ही पता होता है कि उसने बम को किस तरीके से विस्फोट करवाना है। विस्फोट के लिए बम में कौन सा मैकेनिज्म सेट किया है। बम में प्रेशर सेंसर, हीट सेंसर, वॉयस सेंसर और रिमोट से भी विस्फोट किया जा सकता है। हीट सेंसर धूप या आग लगने से, प्रेशर सेंसर बम पर वजन पढ़ने से, जैसे बम पर पैर रखते या कोई वाहन गुजरने से और वॉयस सेंसर बम के पास आवाज होने से फट हो सकता है। इसके अलावा रिमोट से कंट्रोल कर बम विस्फोट किया जा सकता है। हालांकि रिमोट को ज्यादा दूर से नहीं कंट्रोल किया जा सकता। बम बनाने वाले शख्स के अलावा कोई भी यह नहीं बता सकता कि उस बम में कौन सा सेंसर लगाया गया है।