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नौ माह बाद टूटने के कगार पर पहुंचा इनेलो-बसपा गठबंधन, मायावती ने दिए संकेत

Tue, 05 Feb 2019 09:55 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 05 Feb 2019 09:55 AM IST
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on the verge of breaking the alliance of inld bsp mayawati gave indication
बसपा-इनेलो गठबंधन

हरियाणा में बीते वर्ष इनेलो और बसपा के बीच हुआ चुनावी गठबंधन टूटने की कगार पर है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर हरियाणा में गठबंधन की समीक्षा करने के बाद ये संकेत दिए हैं। मायावती ने साफ कर दिया है कि चौटाला परिवार के एक होने पर ही बसपा, इनेलो के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ेगी। 

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ऐसा न होने की स्थिति में पार्टी गठबंधन पर पुनर्विचार करेगी। बसपा, इनेलो के साथ गठबंधन को तोड़ने का आधार इनेलो में टूट, चौटाला परिवार में फूट और जींद उपचुनाव में मिली करारी हार को बनाने जा रही है। हरियाणा में इनेलो और बहुजन समाज पार्टी के बीच एब बार फिर करीब 20 साल बाद 18 अप्रैल 2018 को चंडीगढ़ के एक पांच सितारा होटल में गठबंधन हुआ था।
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दोनों दलों ने मिलकर लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने का एलान किया था। इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय सिंह चौटाला और बसपा के उत्तर भारत के प्रभारी डा. मेघराज ने गठबंधन की घोषणा की थी। इससे पहले दोनों ने 1998 में मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें बसपा को एक और इनेलो को चार सीटों पर जीत हासिल हुई थी। लेकिन, विधानसभा चुनाव में दोनों दल अलग हो गए थे। 

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हरियाणा में बीते वर्ष जब इनेलो और बसपा का गठबंधन हुआ था, उसम समय भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने इसे बेमेल शादी का गठबंधन बताया था तो कांग्रेस के पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने कहा था कि ये गठबंधन चुनाव से पहले टूट जाएगा। मायावती की ओर से दिए गए संकेतों से साफ है कि इनेलो के साथ मिलकर बसपा लोकसभा और विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी। इनेलो प्रवक्ता प्रवीण अत्रे ने कहा कि इस संबंध में पार्टी के पास कोई अधिकारिक सूचना अभी तक नहीं आई है।

मायावती बोलीं, नकारात्मकता में उलझा गठबंधन
बसपा सुप्रीमो मायावती ने दिल्ली में पार्टी के सेंट्रल कार्यालय में लोकसभा चुनावों को लेकर समीक्षा बैठक की। इसमें प्रदेश बसपा के जिम्मेदार पदाधिकारियों से जींद उपचुनाव परिणाम के साथ इनेलो में खींचतान व टकराव से हरियाणा की राजनीति में हुए बदलाव पर चर्चा की गई। जिसमें सामने आया कि चौटाला परिवार में घमासान के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदली हैं। 

इससे बसपा का इनेलो के साथ गठबंधन भी अछूता नहीं रहा है। ये गठबंधन की जन आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं है। इससे बसपा को लोकसभा व विधानसभा चुनाव में नुकसान हो सकता है। बैठक में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को आगामी निर्णय के लिए अधिकृत कर दिया गया। आमराय को ध्यान में रखते हुए मायावती ने फैसला लिया कि इनेलो के दो हिस्सों में बंटने का जींद उपचुनाव पर भी असर पड़ा और सीट गंवानी पड़ी। 

वैसे भी इनकी तकरार बढ़ती जा रही है। जिससे बसपा-इनेलो का गठबंधन आगे बढ़ने के बजाए अब नकारात्मकता में उलझ गया है। अब पार्टी तभी इनके साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेगी अगर पार्टी एकजुट होती है। वैसे भी बसपा का हरियाणा में जनाधार पहले से बढ़ा है और पार्टी अपने बूते आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करेगी। 

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