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कोरोना को हरा फिर मैदान में डटे ओमप्रकाश
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चंडीगढ़। पीजीआई के नर्सिंग ऑफिसर ओमप्रकाश कोरोना महामारी के दौरान अपनी शारीरिक अक्षमता को खुद की कमजोरी ना बनाते हुए मरीजों की सेवा करने में जुटे हुए हैं। इस दौरान वे संक्रमण की चपेट में भी आ चुके हैं। इसके बावजूद उनका मनोबल कम नहीं हुआ है। संक्रमण को मात देकर उन्होंने दोबारा ड्यूटी ज्वाइन कर ली है। ओम प्रकाश दिव्यांग हैं। उनके एक पैर में परेशानी है, लेकिन वह इस कमजोरी को अपने कर्तव्य की राह में रोड़ा नहीं बनने देते।
ओमप्रकाश का कहना है कि हम मानव ईश्वर की सबसे नायाब कृति हैं। ऐसे में छोटी-मोटी परेशानियों के लिए खुद को दुखी करना या दूसरों से कमतर आंकना गलत होगा। इसलिए उन्होंने अपनी शारीरिक परेशानी को दरकिनार कर मानवता की सेवा से जुड़े पेशे को अपनाया और उसमें सफल भी सिद्ध हो रहे हैं।
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कुछ दिनों बाद पत्नी हो गई संक्रमित
पीजीआई एडवांस कार्डियक सेंटर में ड्यूटी के दौरान ओमप्रकाश 18 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हो गए। उसके बाद उन्हें घर पर ही 17 दिनों तक क्वारंटाइन में रहना पड़ा। उन्होंने 5 मई को फिर से पीजीआई कार्डियक सेंटर में ही ड्यूटी ज्वाइन कर ली। कुछ दिनों तक स्थिति सामान्य रही, लेकिन फिर अचानक 22 मई को उनकी पत्नी सीमा की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। ओमप्रकाश का कहना है कि दो कमरों के घर में अगर एक सदस्य एक कमरे में क्वारंटाइन हो जाए तो फिर काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। ओमप्रकाश ने अपने साथ अपनी पत्नी व दोनों बेटियों प्रतिभा व प्रगति का भी पूरा ख्याल रखा।
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मकान मालिक और दोस्त बने मददगार
संक्रमण के बाद आमतौर पर देखा जा रहा है कि लोग उस परिवार से दूरी कर लेते हैं, लेकिन ओमप्रकाश के पड़ोसियों, दोस्तों और खास तौर पर उनके मकान मालिक गुरविंदर सिंह ने उनका हरसंभव साथ दिया। ओमप्रकाश ने बताया कि उनके पड़ोसी सुभाष यादव के साथ ही उनके दोस्त सुरेंद्र शर्मा व गजानंद ने भी उनका मनोबल बढ़ाया और हर परेशानी में सामने ना होकर भी साथ दिया। ओमप्रकाश का कहना है कि उनके लिए उनके दोस्त और पड़ोसी मददगार बन कर सामने आए थे। अन्य लोगों को भी अपने आस-पड़ोस में संक्रमित हुए परिवार के साथ प्यार, स्नेह और मददगार की भूमिका निभानी होगी ताकि वे खुद को अकेला और कमजोर ना महसूस करें।
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शौक को बनाया तनाव दूर करने का माध्यम
ओमप्रकाश ने बताया कि संक्रमित होने के दौरान उन्होंने अपने शौक को तनाव दूर करने का माध्यम बनाया। म्यूजिक थैरेपी से जहां उन्होंने खुद को मानसिक शांति प्रदान की, वहीं सूर्य नमस्कार, अनुलोम-विलोम और मेडिटेशन के जरिए आंतरिक मजबूती बढ़ाई। ओमप्रकाश का कहना है कि संकट की घड़ी में तनाव को खुद पर हावी न होने दें, क्योंकि संक्रमण से ज्यादा तनाव घातक सिद्ध हो रहा है।
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ओमप्रकाश का कहना है कि हम मानव ईश्वर की सबसे नायाब कृति हैं। ऐसे में छोटी-मोटी परेशानियों के लिए खुद को दुखी करना या दूसरों से कमतर आंकना गलत होगा। इसलिए उन्होंने अपनी शारीरिक परेशानी को दरकिनार कर मानवता की सेवा से जुड़े पेशे को अपनाया और उसमें सफल भी सिद्ध हो रहे हैं।
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कुछ दिनों बाद पत्नी हो गई संक्रमित
पीजीआई एडवांस कार्डियक सेंटर में ड्यूटी के दौरान ओमप्रकाश 18 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हो गए। उसके बाद उन्हें घर पर ही 17 दिनों तक क्वारंटाइन में रहना पड़ा। उन्होंने 5 मई को फिर से पीजीआई कार्डियक सेंटर में ही ड्यूटी ज्वाइन कर ली। कुछ दिनों तक स्थिति सामान्य रही, लेकिन फिर अचानक 22 मई को उनकी पत्नी सीमा की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। ओमप्रकाश का कहना है कि दो कमरों के घर में अगर एक सदस्य एक कमरे में क्वारंटाइन हो जाए तो फिर काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। ओमप्रकाश ने अपने साथ अपनी पत्नी व दोनों बेटियों प्रतिभा व प्रगति का भी पूरा ख्याल रखा।
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मकान मालिक और दोस्त बने मददगार
संक्रमण के बाद आमतौर पर देखा जा रहा है कि लोग उस परिवार से दूरी कर लेते हैं, लेकिन ओमप्रकाश के पड़ोसियों, दोस्तों और खास तौर पर उनके मकान मालिक गुरविंदर सिंह ने उनका हरसंभव साथ दिया। ओमप्रकाश ने बताया कि उनके पड़ोसी सुभाष यादव के साथ ही उनके दोस्त सुरेंद्र शर्मा व गजानंद ने भी उनका मनोबल बढ़ाया और हर परेशानी में सामने ना होकर भी साथ दिया। ओमप्रकाश का कहना है कि उनके लिए उनके दोस्त और पड़ोसी मददगार बन कर सामने आए थे। अन्य लोगों को भी अपने आस-पड़ोस में संक्रमित हुए परिवार के साथ प्यार, स्नेह और मददगार की भूमिका निभानी होगी ताकि वे खुद को अकेला और कमजोर ना महसूस करें।
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शौक को बनाया तनाव दूर करने का माध्यम
ओमप्रकाश ने बताया कि संक्रमित होने के दौरान उन्होंने अपने शौक को तनाव दूर करने का माध्यम बनाया। म्यूजिक थैरेपी से जहां उन्होंने खुद को मानसिक शांति प्रदान की, वहीं सूर्य नमस्कार, अनुलोम-विलोम और मेडिटेशन के जरिए आंतरिक मजबूती बढ़ाई। ओमप्रकाश का कहना है कि संकट की घड़ी में तनाव को खुद पर हावी न होने दें, क्योंकि संक्रमण से ज्यादा तनाव घातक सिद्ध हो रहा है।