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बदहालः दो दशक पुरानी सर्जरी मशीनें, छह माह की वेटिंग के बाद मिल रहा दिल का उपचार
संजय कुमार, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
Updated Thu, 26 Jul 2018 09:45 AM IST
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प्रदेश का एकमात्र सरकारी हृदय शल्य चिकित्सा विभाग आधुनिकता के युग में भी दो दशक पुराने सर्जरी उपकरणों के भरोसे चल रहा है। सुविधाओं के अभाव में यहां मरीजों को बड़ी सर्जरी के लिए छह माह का इंतजार भी करना पड़ रहा है। ऐस में दिल के मरीजों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि उनके जीवन का रखवाला कौन होगा।
पीजीआई में वर्ष 1997 में हृदय शल्य चिकित्सा विभाग बनाया गया था। समय के साथ प्रदेश में सरकारें बदलीं और यह विभाग राजनीति का शिकार होता चला गया। चिकित्सा संस्थान का सबसे महत्वपूर्ण विभाग होने के बावजूद यहां के उपकरणों की किसी ने सुध नहीं ली। दो हार्ट लंग मशीन के स्थान पर यहां आज भी एक ही मशीन है। यही नहीं सर्जरी का अधिकांश सामान 20 साल पुराना है, जबकि मेडिकल साइंस में इनकी उम्र दस साल ही बेहतर मानी जाती है। प्रशासन की मानें तो इस संबंध में वह चंडीगढ़ पर बात डाल कर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेता है।
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पीजीआई में वर्ष 1997 में हृदय शल्य चिकित्सा विभाग बनाया गया था। समय के साथ प्रदेश में सरकारें बदलीं और यह विभाग राजनीति का शिकार होता चला गया। चिकित्सा संस्थान का सबसे महत्वपूर्ण विभाग होने के बावजूद यहां के उपकरणों की किसी ने सुध नहीं ली। दो हार्ट लंग मशीन के स्थान पर यहां आज भी एक ही मशीन है। यही नहीं सर्जरी का अधिकांश सामान 20 साल पुराना है, जबकि मेडिकल साइंस में इनकी उम्र दस साल ही बेहतर मानी जाती है। प्रशासन की मानें तो इस संबंध में वह चंडीगढ़ पर बात डाल कर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेता है।
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उधार पर मिलते हैं कार्डिक एनेस्थिसिया के डॉक्टर
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हृदय शल्य चिकित्सा विभाग की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां उधार पर कार्डिक एनेस्थिसिया के डॉक्टर एनेस्थिसिया विभाग से मिलते हैं। जबकि यहां एक सीनियर प्रोफेसर व दो असिस्टेंट प्रोफेसर की सीट रिक्त है। यहां विभाग को रोटेशन के हिसाब से इन डॉक्टरों की उपलब्धता होती है। यहां आठ हाउस सर्जन की सीट पर चार हाउस सर्जन तैनात हैं और एक एमसीएच डॉक्टर के भरोसे हृदय शल्य विशेषज्ञ डॉ. एसएस लोहचब कार्य कर रहे हैं।
विभाग की व्यवस्था
प्रतिदिन ओपीडी में मरीज : 100
ऑपरेशन की जरूरत वाले प्रतिदिन : 5
आईसीयू बेड : 8
वार्ड में बेड : 15
बेडोंकी जरूरत : 50
ऑपरेशन के दिन : 4
विकल्प : संस्थान के लाला श्याम लाल अति विशिष्ट चिकित्सा केंद्र में संचालित हो रहे हृदय शल्य चिकित्सा विभाग को जगह की कमी पड़ रही है। जबकि भवन में तीसरा और चौथा तल लगभग खाली है। इसके बावजूद प्रशासन हृदय शल्य चिकित्सा विभाग को अतिरिक्त स्थान देने के मूड में नहीं है।
विभाग की व्यवस्था
प्रतिदिन ओपीडी में मरीज : 100
ऑपरेशन की जरूरत वाले प्रतिदिन : 5
आईसीयू बेड : 8
वार्ड में बेड : 15
बेडोंकी जरूरत : 50
ऑपरेशन के दिन : 4
विकल्प : संस्थान के लाला श्याम लाल अति विशिष्ट चिकित्सा केंद्र में संचालित हो रहे हृदय शल्य चिकित्सा विभाग को जगह की कमी पड़ रही है। जबकि भवन में तीसरा और चौथा तल लगभग खाली है। इसके बावजूद प्रशासन हृदय शल्य चिकित्सा विभाग को अतिरिक्त स्थान देने के मूड में नहीं है।
चंडीगढ़ की ऑडिट टीम भी उठा चुकी है सवाल
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चंडीगढ़ से आई ऑडिट टीम ने 2011-16 की ऑडिट में विभाग में एनेस्थिसिया मशीन की कमी, विभाग के अनुसार जरूरत की 29 से अधिक कई मशीनों पर सवाल उठाया था। इसके अलावा ऑडिट टीम ने कहा कि 16 साल पुराने सामान से काम कैसे चल रहा है। ब्लड गैस एनालाइजर रिजेंट की खरीदारी न होने के कारण जांच तक नहीं हो रही है। इस पर विभाग ने जवाब दिया था कि उनकी ओर से डिमांड भेजी गई, लेकिन निदेशक कार्यालय की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बोले अधिकारी
ऑडिट टीम की ओर से उठाए गए सवालों के बाद कुछ सामान तो आ गया है, लेकिन अभी कुछ जरूरी सामान और आना बाकी है। इसके लिए निदेशक कार्यालय से विभाग लगातार संपर्क में है। विभाग अपनी क्षमता के अनुसार बेहतर कार्य कर रहा है, वेटिंग लिस्ट कम करने के लिए हम अधिकारियों के साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं, ताकि मरीजों को अधिक इंतजार न करना पडे़। जिन मरीजों को अधिक जरूरत होती है, उन्हें प्राथमिकता दी जाती है। -डॉ. शमशेर सिंह लोहचब, विभागाध्यक्ष, हृदय शल्य चिकित्सा विभाग, पीजीआईएमएस
बोले अधिकारी
ऑडिट टीम की ओर से उठाए गए सवालों के बाद कुछ सामान तो आ गया है, लेकिन अभी कुछ जरूरी सामान और आना बाकी है। इसके लिए निदेशक कार्यालय से विभाग लगातार संपर्क में है। विभाग अपनी क्षमता के अनुसार बेहतर कार्य कर रहा है, वेटिंग लिस्ट कम करने के लिए हम अधिकारियों के साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं, ताकि मरीजों को अधिक इंतजार न करना पडे़। जिन मरीजों को अधिक जरूरत होती है, उन्हें प्राथमिकता दी जाती है। -डॉ. शमशेर सिंह लोहचब, विभागाध्यक्ष, हृदय शल्य चिकित्सा विभाग, पीजीआईएमएस