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तौबा, कितने लेटलतीफ हैं ये अफसर

Wed, 30 Oct 2013 10:26 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़।
अमर उजाला, चंडीगढ़। Updated Wed, 30 Oct 2013 10:26 AM IST
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officers fails complete projets in time
केंद्र द्वारा चंडीगढ़ के प्लान और नॉन प्लान बजट में 20 फीसदी तक की वृद्धि के बावजूद प्रशासन के कई विभागों की लेटलतीफी के कारण बजट विकास कार्यों पर खर्च नहीं हो रहा।
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कई प्रोजेक्ट धीमी गति से चल रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) के निर्देश पर चंडीगढ़ प्रशासन ने सभी विभागों को धीमी गति से चल रहे प्रोजेक्टों में तेजी लाने को कहा है।
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इन विभागों में स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, पुलिस और शहरी विकास विभाग शामिल हैं। मौजूदा वित्तीय वर्ष के सात महीने बीत जाने के बाद भी ये विभाग प्लान बजट का सिर्फ 25 फीसदी हिस्सा ही खर्च कर पाए हैं।
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चंडीगढ़ का मौजूदा वित्त वर्ष का कुल बजट 3491.61 करोड़ रुपये है। यह पिछले साल से 575.60 करोड़ रुपये ज्यादा है। इनमें 876.05 करोड़ रुपये प्लान बजट के लिए मिले थे।

चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार केके शर्मा ने कहा कि सभी विभागों को अपने प्रोजेक्टों में तेजी लाने को कहा गया है।

इन प्रोजेक्टों पर धीमी गति से चल रहा काम

-मनीमाजरा में 100 बेड के अस्पताल का काम पूरा करना
-बुड़ैल की पॉलिक्लीनिक को 100 बेड का करना
-सेक्टर-22 के अस्पताल को 100 बेड का बनाना
-सेक्टर-32 स्थित जीएमसीएच का अपग्रेडेशन
-सचिवालय की बिल्डिंग का निर्माण (शुरू नहीं)
-कई कॉलेजों मेें हॉस्टलों का निर्माण

दूसरी मदाें में खर्च किया जा रहा बजट

चंडीगढ़ प्रशासन को कुछ सालों में जिन प्रोजेक्टों के लिए पैसा मिल रहा है, उसे दूसरी मदों में खर्च किया जा रहा है।

इस बार भी केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ प्रशासन के कई ऐसे प्रोजेक्टों के लिए पैसा मंजूर किया है जिन पर अगले वित्तीय वर्ष में भी काम शुरू नहीं हो सकता है।

ऐसे में अगले वित्त वर्ष में भी इन प्रोजेक्टों का बजट कहीं और खर्च हो जाएगा। प्रशासन को एक मद का बजट दूसरी मद में खर्च करने के लिए एमएचए की मंजूरी लेनी पड़ती है।

संशोधित बजट पर बैठक आज
चंडीगढ़ से संशोधित बजट पर बुधवार को नई दिल्ली में एमएचए के अधिकारियों के साथ प्रशासन के अधिकारियों की बैठक होगी। इस बैठक में प्रशासन के अधिकारी एमएचए के समक्ष अपनी जरूरतों को रखेंगे।

एमएचए इसे वित्त मंत्रालय को भेजेगा। प्रशासन नॉन प्लान और प्लान बजट में लगभग 600 करोड़ रुपये की मांग रखेगा। पिछले साल भी प्रशासन ने केंद्र सरकार से संशोधित बजट में प्लान और नॉन प्लान बजट में पैसे मांगे थे।


प्रशासन की मांग पर केंद्र ने नॉन प्लान बजट में तो लगभग 400 करोड़ बढ़ा दिए, लेकिन प्लान बजट को 737.23 करोड़ रुपये से कम कर 620 करोड़ रुपये कर दिया था। प्लान बजट में कैंची चलने से जिन खर्चों की पेमेंट पिछले वित्तीय वर्ष में होनी थी वह अब मौजूदा वित्तीय वर्ष के बजट से की जा रही है।
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